डोकलाम: भारत की बड़ी कूटनीतक जीत, दोनों देश सेना हटाने पर सहमत

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भारत और चीन के बीच सिक्किम सेक्टर के डोकलाम में लगभग तीन महीने से चला आ रहा गतिरोध आखिरकार खत्म हो गया है। भारत और चीन डोकलाम से अपनी-अपनी सेनाएं हटाने को तैयार हो गए हैं। इसे भारत के लिए बड़ी कूटनीतिक जीत माना जा रहा है। भारत हमेशा से इस मसले को बातचीत के जरिए सुलझाने के पक्ष में था, जबकि चीन भारत को लगातार युद्ध के लिए धमका रहा था। भारत की यह जीत इसलिए भी काफी अहम है कि अगले सप्ताह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ब्रिक्स समिट में हिस्सा लेने के लिए चीन के श्यामन शहर जा रहे हैं। सोमवार को विदेश मंत्रालय से दी गई जानकारी के मुताबिक दोनों देश अपनी सेनाएं वहां से पीछे हटा रहे हैं। मंत्रालय ने बताया है कि इस मुद्दे को लेकर चीन के साथ पिछले कुछ हफ्तों से हो रही बातचीत में भारत अपनी चिंताओं और हितों से चीन को वाफिक कराने में कामयाब रहा है, जिसके बाद दोनों देश डोकलाम से अपनी-अपनी सेनाएं हटाने पर सहमत हुए हैं। डोकलाम में दोनों देश तेजी से सेनाएं पीछे हटा रहे हैं। भारत लगातार अपना यह स्टैंड दोहरा रहा था कि पहले दोनों देशों की सेनाएं पीछे हटें, उसके बाद ही इस मसले पर बातचीत हो सकती है, लेकिन चीन इस बात पर अड़ा हुआ था कि भारत पहले अपनी सेना पीछे हटाए। चीन का कहना था कि यह बातचीत की बुनियादी शर्त है, लेकिन भारत अपने रुख पर कायम रहा। इस बीच चीनी मीडिया और चीनी सेना के अफसरों की ओर से लगातार भारत तो युद्ध की धमकियां दी जाती रहीं। चीन की ओर से यहां तक कह दिया गया था कि भारत को 1962 के युद्ध का अंजाम याद रखना चाहिए। जवाब में रक्षा मंत्री अरुण जेटली ने कहा था कि आज का भारत 1962 का भारत नहीं है। चीन का सरकारी मीडिया आए दिन इसे लेकर आक्रामक रुख अपनाए हुए था। लेखों और संपादकीय के जरिए भारत के खिलाफ माहौल बनाने की कोशिश की जा रही थी, लेकिन भारत ने संयम न खोते हुए अपनी तैयारियों पर ध्यान दिया और बातचीत की कोशिशें भी जारी रखीं। अंतरराष्ट्रीय जगत से भी भारत को इस मसले पर समर्थन हासिल होने लगा। जापान और अमेरिका जैसे बड़े देशों के समर्थन से भारत की स्थिति और मजबूत हुई। बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अगले सप्ताह ब्रिक्स समिट में शामिल होने के लिए चीन जाने वाले हैं। उनके दौरे से ठीक पहले यह भारत की बहुत बड़ी जीत है। मामले के जानकारों का भी मानना था कि खुद को ग्लोबल पावर बनाने की इच्छा रखने वाला चीन कभी नहीं चाहेगा कि उसकी मेजबानी में होने वाले ब्रिक्स समिट में डोकलाम विवाद की छाया पड़े, क्योंकि इससे उसकी अंतरराष्ट्रीय छवि पर बुरा असर पड़ता। गौरतलब है कि यह पूरा विवाद जून के महीने तब शुरू हुआ था, जब चीन ने भूटान के इलाके डोकलाम में घुसकर सड़क निर्माण का काम शुरू किया था। चीन डोकलाम को अपना इलाका बताता है, लेकिन भारत और भूटान चीन के इस दावे को नहीं मानते। भारत के सैनिकों ने इस पर आपत्ति जताते हुए सड़क निर्माण के काम को बंद करवा दिया था। इसी घटना के बाद दोनों देशों के बीच डोकलाम विवाद की शुरुआत हुई। दोनों देशों की सेनाओं ने वहां तंबू भी गाड़ लिए थे।

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