बीजेपी अध्यक्ष से मिले हरियाणा के सीएम खट्टर, कहा-इस्तीफा मांगने वाले मांगते रहें

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डेरा प्रमुख गुरमीत राम रहीम की सजा के बाद हुई हिंसा को रोकने में असफल रहने के कारण आलोचनाओं का शिकार हरियाणा के सीएम मनोहर लाल खट्टर ने बुधवार को बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह से मुलाकात की। मुलाकात के बाद खट्टर ने कहा कि उन्होंने पार्टी चीफ को ताजा हालात की जानकारी दी है। साथ ही यह भी कहा कि कोर्ट के आदेश के मुताबिक कदम उठाए गए हैं। खट्टर ने यह भी कहा कि उन्होंने हालात के हिसाब से कदम उठाया, जिससे वह पूरी तरह संतुष्ट हैं। विपक्ष के इस्तीफे की मांग से जुड़े सवालों को खट्टर ने अनसुना कर दिया। इस्तीफे पर सीएम ने बस इतना कहा, ‘जो मांगता है, वो मांगता रहे। हमने अपना काम अच्छी तरह से किया है।’
खट्टर ने बाद में पत्रकारों के कुछ सवालों के भी जवाब दिए। क्या प्रदर्शनकारियों पर गोलियां चलाने में जल्दबाजी की गई, इस सवाल पर खट्टर ने कहा कि हिंसा को डिफ्यूज करने के लिए कोर्ट के आदेश के मुताबिक न्यूनतम बल का इस्तेमाल किया गया। क्या राज्य में बीजेपी की सरकार बनाने के लिए राम रहीम से कोई डील की गई, इस सवाल पर खट्टर ने कहा कि लोकतंत्र में सभी से सहयोग की अपील की जाती है, लेकिन यह सहयोग कानून तोड़ने की शर्त पर नहीं लिया जाता। बाबा की कथित बेटी हनीप्रीत के उनके साथ हेलिकॉप्टर में जाने की इजाजत दिए जाने को सीएम ने सुरक्षा कारणों से जोड़ा। उन्होंने कहा कि हनीप्रीत का हेलिकॉप्टर में जाना इतना बड़ा मुद्दा नहीं है। उन्होंने बताया कि राम रहीम ने कोर्ट और जेल, दोनों ही जगह हनीप्रीत को साथ रखने की अपील की थी। उन्हें सिर्फ कोर्ट में साथ रहने की इजाजत दी गई। फैसले के तुरंत बाद सुरक्षा कारणों में हनीप्रीत को हेलिकॉप्टर में जाने दिया गया। बता दें कि राम रहीम को दोषी करार दिए जाने के एक हफ्ते पहले ही अदालत ने फैसला सुरक्षित रख लिया था। पर्याप्त वक्त होने के बावजूद लाखों डेरा अनुयायियों को सिरसा और पंचकूला पहुंचने से रोकने और बाद में हिंसा पर लगाम कसने में खट्टर सरकार नाकाम रही थी। इससे पहले, जाट आंदोलन और बाबा रामपाल की गिरफ्तारी के बाद हुई हिंसा के मामलों की वजह से भी खट्टर प्रशासन आलोचना का शिकार रहा था। पहले खबरें आईं कि खट्टर को बर्खास्त किया जा सकता है। हालांकि, बाद में बीजेपी आलाकमान ने साफ कर दिया कि हरियाणा के सीएम को फिलहाल ‘अभयदान’ दे दिया गया है।
खट्टर को मुख्यमंत्री पद से न हटाने के पीछे केंद्र सरकार की इस सोच की दलील दी गई थी कि बदलाव करने से प्रशासन और अस्थिर हो सकता है।इस बीच, खबरें हैं कि खट्टर के कामकाज पर अब प्रधानमंत्री कार्यालय कड़ी निगाह रख रहा है। अधिकारियों ने बताया कि पीएमओ से बातचीत के दौरान हिंसक भीड़ से निपटने के मुद्दे पर खट्टर की बातें ‘दमदार’ नहीं लगी थीं। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, ‘हमने पाया कि पिछले सप्ताह पुलिस और ब्यूरोक्रैसी का सिस्टम पूरी तरह टूट गया था। केंद्र इसे हल्के में नहीं लेगा। हम अब गौर कर रहे हैं कि कहां-कहां चूक हुई, लेकिन जो कुछ हुआ उससे पता चलता है कि राज्य सरकार को अपना रवैया ठीक करना होगा।’
बता दें कि राम रहीम को कोर्ट की ओर से सजा सुनाए जाते ही कई जगहों पर हिंसा भड़की। इसकी वजह से 30 से ज्यादा लोग मारे गए। वहीं, कई सरकारी इमारतों और गाड़ियों को जला दिया गया। पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने भी खट्टर सरकार पर लचरता बरतने का आरोप लगाते हुए कड़ी फटकार लगाई थी। कोर्ट ने सरकार से जानना चाहा था कि धारा 144 लगने के बावजूद लाखों डेरा अनुयायी पंचकूला और सिरसा कैसे पहुंच गए? कोर्ट ने यह भी माना था कि राज्य सरकार ने सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम नहीं किए।

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