मोदी सरकार का कैबिनेट विस्तार: परफॉर्मेंस ही वजह नहीं, मिशन 2019 पर भी नजर

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मोदी मंत्रिपरिषद में जल्द ही बड़े पैमाने पर बदलाव देखने को मिल सकता है। कुछ मंत्रियों ने गुरुवार को इस्तीफा दिया था। इस्तीफे की वजह मंत्रियों की परफॉर्मेंस को लेकर बीजेपी आलाकमान की नाराजगी बताई जा रही है। हालांकि, राजनीतिक जानकार मानते हैं कि कैबिनेट बदलाव के पीछे का सबसे बड़ा मकसद मिशन 2019 ही है क्योंकि अब सरकार के कार्यकाल में 2 साल से भी कम का वक्त बचा है। इससे पहले, सरकार उन राज्यों में अपनी पकड़ मजबूत करना चाहती है जहां जल्द या अगले साल चुनाव होने वाले हैं। इस्तीफा देने वाले मंत्रियों में शामिल राजीव प्रताप रूडी ने शुक्रवार को कहा कि वह पार्टी के कार्यकर्ता हैं और कहीं भी अपनी भूमिका निभाने को तैयार हैं। वहीं, संजीव बालयान ने भी पुष्टि की कि पार्टी की ओर से उनका इस्तीफा मांगा गया। सूत्रों के मुताबिक, दोनों की विदाई का आधार परफॉर्मेंस है। बालयान और रूडी को अब क्या रोल मिलेगा, इसका जवाब तो निकट भविष्य में ही मिलेगा, लेकिन जिन लोगों को मंत्री बनाए जाने की अटकलें हैं, उनके रोल मोदी और शाह की जोड़ी ने पहले से तय कर रखे हैं। सूत्रों के मुताबिक, कैबिनेट बदलाव का मकसद 2019 चुनाव से पहले पार्टी का विभिन्न राज्यों में जनाधार और मजबूत करना है। मंत्री पद सिर्फ परफॉर्मेंस के आधार पर खाली नहीं हुए हैं। कुछ मंत्रियों ने खुद से पेशकश की है, वहीं कुछ पर अतिरिक्त मंत्रालयों का दबाव है। सूत्रों के मुताबिक, उमा भारती ने स्वास्थ्य कारणों से पद छोड़ना चाहा है। वहीं, रेल दुर्घटनाओं की वजह से आलोचना के शिकार सुरेश प्रभु ने सार्वजनिक तौर पर इस्तीफे की पेशकश की थी। गुरुवार को यूपी बीजेपी अध्यक्ष बनाए गए महेंद्र नाथ पांडेय और पंजाब बीजेपी अध्यक्ष विजय सांपला को ‘संगठन या सरकार में किसी एक ही जगह पद लेने’ के नियम के तहत जगह खाली करनी होगी। वहीं, कई मंत्रालयों के बोझ तले दबे नेताओं की बात करें तो अरुण जेटली के पास वित्त और रक्षा मंत्रालय हैं। वेंकैया नायडू के उपराष्ट्रपति बनने के बाद शहरी विकास मंत्रालय की जिम्मेदारी नरेन्द्र सिंह तोमर के पास है। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय की जिम्मेदारी स्मृति इरानी के पास तो हर्षवर्धन विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के अलावा पर्यावरण मंत्रालय की भी जिम्मेदारी संभाल रहे हैं।

आगे का क्या है प्लान
सूत्रों के मुताबिक, बीजेपी चाहती है कि कर्नाटक, मध्य प्रदेश और हिमाचल प्रदेश के कुछ नेताओं को कैबिनेट में जगह दी जाए। इन राज्यों में जल्द चुनाव होने वाले हैं। इस बार बदलाव सिर्फ कैबिनेट में ही नहीं, बल्कि संगठन में भी किए जाने हैं। कुछ मंत्रियों को वापस संगठन में लाया जा सकता है। इसी तरह से संगठन में सक्रिय कुछ लोगों को मोदी सरकार में जगह मिल सकती है। अटकलें हैं कि संयुक्त एआईएडीएमके एनडीए में शामिल होगी तो उसके कुछ नेताओं को मंत्रीपद देना होगा। जेडीयू पहले ही एनडीए में शामिल हो चुकी है, इसलिए उसे भी दो पद देने हैं।

किसे और क्यों ला रही बीजेपी

गुजरात बीजेपी इन्चार्ज भूपेंद्र यादव को केंद्र में मंत्री बनाए जाने की अटकलें हैं। इसकी सीधी वजह तो राज्य में जल्द होने वाले विधानसभा चुनाव ही नजर आते हैं। पार्टी अध्यक्ष अमित शाह ने राज्य में 182 में से 150 सीटें जीतने का लक्ष्य रखा है।

संजीव बालयान को हटाए जाने के बाद यूपी वेस्ट और जाट फैक्टर को ध्यान में रखते हुए यूपी के बागपत से सांसद और मुंबई के पूर्व कमिश्नर सत्यपाल सिंह को मौका मिल सकता है। सत्यपाल सिंह ने 2014 में आरएलडी के अजित सिंह को हराया था।

जेडीयू के कोटे के तहत आरसीपी सिंह और संतोष कुशवाहा को मंत्री के तौर पर मोदी की कैबिनेट में जगह मिल सकती है। ये दोनों ही नेता बिहार के सीएम नीतीश कुमार के नजदीकी माने जाते हैं।

कर्नाटक से बीजेपी नेता सुरेश अंगडी और प्रह्लाद जोशी जबकि हिमाचल से सतपाल सिंह सत्ती को केंद्रीय कैबिनेट में जगह दी जा सकती है। हिमाचल में इस साल के आखिर में जबकि कर्नाटक में अगले साल चुनाव होने हैं।

कई मीडिया रिपोर्ट्स में मध्य प्रदेश के प्रह्लाद सिंह पटेल को केंद्रीय मंत्री बनाए जाने की संभावना जताई गई है। एमपी में अगले साल चुनाव होने हैं। प्रह्लाद वाजपेयी सरकार में मंत्री रहे हैं।

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