जेल से निकलकर हनीप्रीत ने सीक्रेट मीटिंग की थी, मेहमानों जैसी सिक्युरिटी मिली थी

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हरियाणा पुलिस बाबा की जिस दत्तक पुत्री हनीप्रीत को लुकआउट नोटिस जारी कर शिद्दत से तलाश कर रही है, उसको जेल प्रशासन ने पूरी सिक्युरिटी के साथ 25 अगस्त को फतेहाबाद के लिए रवाना किया था। पंचकूला में बाबा को दोषी ठहराए जाने के बाद हनीप्रीत हेलीकाॅप्टर में बाबा के साथ सुनारिया जेल आई थी। यहां पर लगभग साढ़े चार घंटे रहने के बाद उसे लेने के लिए चार लोग गाड़ी में आए थे। जेल से निकलकर हनीप्रीत ने सीक्रेट मीटिंग भी की थी। उसने जेल प्रशासन को लिखित में दिया था कि वह फतेहाबाद पुलिस के कांस्टेबल विकास के साथ फतेहाबाद जा रही है। उसके साथ झज्जर निवासी जितेंद्र कुमार और रोहतक निवासी संजय भी कार में मौजूद थे, लेकिन जेल से बाहर आने के बाद वह कुछ ही घंटे में लापता हो गई। फतेहाबाद एसपी कुलदीप सिंह साफ इनकार कर रहे हैं कि विकास नाम का यह कांस्टेबल उनके यहां का नहीं है। इस वजह से बड़े सवाल खड़े हो रहे हैं कि हनीप्रीत ने जेल प्रशासन को क्यों गुमराह किया। शायद उसे पहले से ही आशंका थी कि जैसे-जैसे बाबा के करीबी जांच के दायरे में आएंगे वह भी पुलिस गिरफ्त में सकती है। पुलिस को बाबा की सबसे बड़ी राजदार हनीप्रीत के विदेश भागने की भी आशंका है। इस वजह से उसके लुकआउट नोटिस भी जारी किए गए हैं। हनीप्रीत की आखिरी लोकेशन जींद बाईपास की मिली है। उसके बाद से वह लापता है। झज्जर के रहने वाले जितेंद्र सिंह के मुताबिक,” मैं सात महीने पहले डेरे से जुड़ा था। मेरे पास 25 अगस्त की शाम को आर्य नगर रोहतक निवासी संजय का फोन आया कि जेल तक कार लेकर जानी है। यहां पिताजी आए हुए हैं। उनके साथ कुछ लोग आए हुए हैं, इन्हें छोड़कर आना है। यह बात सुनकर मैं बहकावे में गया और गाड़ी लेकर सुनारिया जेल तक गया। संजय के पास रिट्ज कार थी। मेरे पास फोर्ड जेल में जाने को पुलिस ने वैरिफिकेशन किया। एसपी भी यहां पर आए थे। वैरिफिकेशन के दौरान रोहतक के संजय, हिसार के राजली निवासी वेदप्रकाश और मैंने एक कागज पर साइन किए। साथ ही फतेहाबाद पुलिस का एक कांस्टेबल विकास वहीं पर था। यहां पर लिखित में हनीप्रीत ने बताया कि वह विकास के साथ फतेहाबाद जा रही है। इसके अलावा हम तीन लोगों ने भी हस्ताक्षर किए। जेल से साढ़े 9 बजे निकले थे। इसके बाद हमने हनीप्रीत को संजय के घर छोड़ दिया। यहां पर पहले से इनोवा गाड़ी थी। संजय के घर पर एक घंटे तक तीनों ने गुप्त बैठक की। इस बैठक में हनीप्रीत, विकास और वेदप्रकाश थे। मैं और संजय बाहर थे। संजय ने खाने के लिए पूछा लेकिन हनीप्रीत ने इंकार कर दिया। इसके बाद हनीप्रीत वहां से इनोवा कार में निकली। गोहाना रोड स्थित वीटा मिल्क प्लांट तक हम साथ-साथ चले। इसके बाद उन्होंने मुझे गोहाना बाईपास से वापस भेज दिया। उसके बाद मुझे कुछ पता नहीं कि वे कहां पर गए।
12 सेकंड के वीडियो ने मचाई सनसनी
इस 12 सेकंड के वीडियो में हनीप्रीत कार में रोहतक से जाती दिखी। हनीप्रीत का आखिरी वीडियो व फोटो रोहतक में पीटीसी स्थित मैस के बाहर का है। बता दें कि राम रहीम ने हनीप्रीत को जेल में साथ रखने की बात कही थी, जिसे अफसरों ने मना कर दिया था। हालांकि, अब राम रहीम ने जेल में मिलने आने वालों की जो लिस्ट अधिकारियों को दी, उसमें हनीप्रीत का नाम नहीं है।
कौन है हनीप्रीत?
हनीप्रीत का असली नाम प्रियंका तनेजा है। हरियाणा के फतेहाबाद की रहने वाली प्रियंका तनेजा उर्फ हनीप्रीत और विश्वास गुप्ता की शादी डेरा प्रमुख राम रहीम ने ही कराई थी। दोनों की शादी ज्यादा दिन नहीं चल सकी और कुछ समय बाद हनीप्रीत ने राम रहीम से शिकायत की कि उसके ससुराल वाले उसे दहेज के लिए परेशान कर रहे हैं। इसके बाद राम रहीम ने साल 2009 में उसे गोद ले लिया। गुरमीत राम रहीम की खुद की दो बेटियां और एक बेटा है। उनके नाम अमनप्रीत, चमनप्रीत और जसमीत इंसा हैं। 2011 में विश्वास गुप्ता ने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में मुकदमा दायर कर राम रहीम के कब्जे से उसकी पत्नी यानी हनीप्रीत को मुक्त कराने की मांग की थी। गुप्‍ता ने राम रहीम पर हनीप्रीत के साथ अवैध संबंध होने का भी आरोप लगाया था। हनीप्रीत राम रहीम के सबसे करीबियों में रही है। वह डेरा के कई महत्‍वपूर्ण फैसले लेने के साथ ही राम रहीम की फिल्‍मों को भी डायरेक्‍ट कर चुकी है। राम रहीम को दोषी ठहराए जाने के दौरान वह कोर्ट रूम से लेकर जेल भेजे जाने तक वह तरह राम रहीम के साथ रही।

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