नोटबंदी से इकॉनमी को नुक्सान, खत्म नहीं हुआ काला धन

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नई दिल्ली: रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन ने हाल ही में पी.एम. नरेंद्र मोदी की ओर से की गई नोटबंदी को इकॉनमी के लिए नुक्सानदायक करार दिया था। अब आर.बी.आई. के एक और पूर्व गवर्नर बिमल जालान ने कहा है कि नोटबंदी से बैंकों में जमा राशि में इजाफे समेत कई लाभ हुए हैं, लेकिन इससे काला धन खत्म नहीं हुआ है।

पूर्व गवर्नर ने एक इंटरव्यू में कहा कि जी.एस.टी. और नोटबंदी से जुड़े सवालों के जवाब में कहा कि जी.एस.टी. पूरी तरह सही कदम है। हमें इसे जमीन पर सही से लागू होने के लिए डेढ़ से 2 साल का वक्त देना होगा। नोटबंदी को लेकर पहले ही काफी चर्चा हो चुकी है। निश्चित तौर पर इसके कुछ सकारात्मक नतीजे आए हैं। बैंकों में अधिक फंड आया है, लेकिन आप जमीन पर देखेंगे तो ब्लैक मनी खत्म नहीं हुई है।

नोटबंदी को लेकर बिमल जालान ने कहा कि जब सरकार कोई कदम उठाती है तो कुछ वर्गों को उससे होने वाली परेशानियों को दूर करने के बारे में भी सोचा जाता है। जैसे किसान कैश में ही लेन-देन करते हैं। हमें यह भी देखना होगा कि टैक्सेशन सिस्टम में सुधार के लिए क्या किया जा सकता है। प्रत्यक्ष कर के मामले में हमें लॉन्ग टर्म पॉलिसी बनानी होगी।

सरकार का नौकर नहीं होता रिजर्व बैंक का गवर्नर : रघुराम राजन
आर.बी.आई. के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन ने कहा है कि केंद्र सरकार के लिए रिजर्व बैंक का गवर्नर कोई नौकरशाह नहीं है और उसे नौकरशाह समझना सरकार की भूल है। यह बात रघुराम राजन ने अपनी नई किताब के जरिए रखते हुए कहा है कि केंद्र सरकार को रिजर्व बैंक गवर्नर के पद को लेकर अपने रुख में सुधार करने की जरूरत है।
राजन के मुताबिक रिजर्व बैंक गवर्नर के अधिकारों की स्पष्ट परिभाषा नहीं होने का सबसे बड़ा खतरा यही है कि ब्यूरोक्रेसी लगातार उसकी शक्तियों को कम करने की कोशिश में रहती है। हालांकि राजन ने कहा कि गवर्नर की शक्तियों को लेक मौजूदा सरकार से पहले की सरकारें भी ऐसा करती रही हैं जिससे अर्थव्यवस्था में केंद्रीय बैंक की भूमिका कमजोर हुई है। रिजर्व बैंक में अपने कार्यकाल के आखिरी दिन राजन ने कहा था कि भारत को वृहद आर्थिक स्थायित्व के लिए मजबूत और स्वतंत्र रिजर्व बैंक की आवश्यकता है, जो कि सर्वाधिक महत्वपूर्ण है।

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