वैश्विक सुधार से जिंसों के दाम ने पकड़ी तेजी की रफ्तार

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दुनिया भर में जिंस बाजार, विशेष रूप से औद्योगिक जिंस बाजार भारी तेजी के दौर में प्रवेश कर चुके हैं। ऐसा कोई संकेत नजर नहीं आ रहा है, जो कीमतों पर अंकुश लगा सके। इसका मतलब है कि भारतीय उद्योगों को कच्चे माल की ऊंची कीमतें वहन करनी होंगी। जिंसों की खपत वाले उद्योगों को ज्यादा दाम चुकाने के लिए तैयार रहना चाहिए, भले ही कुछ उद्योगों में इसका असर देरी से दिखे।

निर्मल बांग कमोडिटीज में अनुसंधान प्रमुख कुणाल शाह ने कहा, ‘जिंसों में तेजी का रुझान पहले से ही बना हुआ है क्योंकि पिछले तीन साल के दौरान जिंस क्षेत्र में कोई बड़ा निवेश नहीं हुआ है और वैश्विक वृद्धि रफ्तार पकड़ रही है, जिससे औद्योगिक जिंसों की कीमतों में तेजी आ रही है।’ मूल धातुएं, लौह अयस्क, इस्पात, कोयला, नेफ्था समेत ज्यादातर जिंसों के दाम पिछले एक साल या 52 सप्ताह में औसतन 30 से 50 फीसदी बढ़े हैं, जो उनमें भारी तेजी का संकेत है। भारतीय कंपनियों को मजबूत रुपये से थोड़ी राहत मिल रही है, जो पिछले साल के मुकाबले करीब 4.4 फीसदी मजबूत है।

एक वैश्विक अनुसंधान संस्थान फोकसइकोनॉमिक्स के अर्थशास्त्री ओलिवर रेनॉल्ड्स ने कहा, ‘इस साल की शुरुआत से अमेरिकी डॉलर मुद्राओं के एक व्यापक बास्केट के मुकाबले करीब 7 फीसदी कमजोर हुआ है। घरेलू और विदेश नीति को लेकर अनिश्चितता के कारण डॉलर कमजोर हो रहा है, जिससे निवेशकों के बीच इस मुद्रा का आकर्षण कम हो रहा है। जिंसों की कीमतें डॉलर में तय होती हैं, इसलिए डॉलर में गिरावट से इस मुद्रा की खरीद क्षमता कम हुई है और संभवतया इसी वजह से कच्चे माल की कीमतें बढ़ी हैं। हालांकि डॉलर और जिंसों की कीमतों में विपरीत संबंध लागू नहीं हो रहा है, लेकिन गुजरे वक्त में 1990 के दशक की आर्थिक तेजी जैसे ऐसे कई मौके आए, जब यह संबंध बहुत कारगर रहा।’

दरअसल जिंसों में तेजी के संकेत पिछले साल के अंत में दिखे थे, जब डॉनल्ड ट्रंप ने बुनियादी ढांचे पर 10 खरब डॉलर खर्च करने का वादा किया था। यह वादा कितने समय में पूरा होगा यह एक अलग मसला है। वैश्विक अर्थव्यवस्थाएं मजबूत हो रही हैं, जिससे वृद्धि के अनुमान बढ़ाए जा रहे हैं। ओलिवर ने कहा, ‘इस साल अब तक वैश्विक गतिविधियां उम्मीद से मजबूत रही हैं। इसके चलते फोकसइकोनॉमिक्स ने 2017 में वैश्विक जीडीपी का अनुमान 0.2 फीसदी अंक बढ़ाकर 3.1 फीसदी कर दिया है।’ इससे मजबूत वैश्विक आर्थिक स्थितियों का पता चलता है, जिनसे जिंसों की मांग बढ़ रही है और कीमतों में इजाफा हो रहा है।

लैंबर्ट कमोडिटीज के संस्थापक जीन फ्रैंकोइस लैंबर्ट ने कहा, ‘अब अमेरिका कम अहमियत इसलिए रखता है क्योंकि जिंसों में तेजी का यह दौर चीन की अगुआई में उभरते बाजारों की बदौलत आया है। इन उभरती अर्थव्यवस्थाओं में मध्य वर्ग में पहुंचने वाले लोगों की तादाद बढ़ रही है। हालांकि अब चीन में वृद्धि की रफ्तार ज्यादा तर्कसंगत स्तरों पर आ रही है।’ उन्होंने कहा कि इस तेजी को बनाए रखने के लिए उत्प्रेरक की जरूरत है। उनके मुताबिक भारत में यह उत्प्रेरक बनने की संभावना है, लेकिन चीन जैसी आर्थिक हैसियत हासिल करने में भारत को लंबा समय लगेगा। इसके चलते कीमतों में इजाफे की संभावना नहीं है।

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