जहां बेचते थे शराब, शराबबंदी के बाद वहां खोली कपड़े की दुकान, आने लगे खरीदार

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पटना सिटी : जीवन के 60 वसंत देख चुके अशोक कुमार आज खुश हैं. पहले शराब बेचते थे. काफी कमाई थी, लेकिन प्रतिष्ठा नहीं. आज उसी दुकान में कपड़ा बेचते हैं. अब पैसा भी है और इज्जत भी. इसलिए दोनों बेटों को भी कपड़े के बिजनेस में लगा दिया है, जबकि शराब के धंधे से इन्हें दूर रखा था.

अशोक कुमार कहते हैं कि शराब के धंधे में जब तक जुड़ा रहा, तब तक समाज के प्रतिष्ठित व सभ्य आदमी मुझसे बात करने से कतराते थे. अब धंधा बदला, तो दुकान पर महिलाएं भी खरीदारी करने आती हैं और बात करने से कतराने वाले लोग भी. समाज में होने वाले आयोजन में भी लोग मुझे बुलाते हैं.

40 वर्षों तक किया शराब का धंधा झाउगंज गली निवासी अशोक कुमार बताते हैं कि रामबाग मुहल्ला में मैं 40 वर्षों से शराब के धंधे से जुड़ा रहा. पारिवारिक जिम्मेदारी की वजह से छोटी उम्र में ही शराब के धंधे में प्रवेश कर गया था. इस धंधे में आने के बाद हमेशा बदमाशों से सामना होता था.

तनाव बना रहता था. शराब के पेशे में पैसा तो था, मगर प्रतिष्ठा नहीं थी. ऐसी स्थिति में परेशानियों को झेलते हुए यही संकल्प लेता था कि बच्चों को इस धंधे से दूर रखेंगे, क्योंकि अक्सर पुलिस, बदमाश व असामाजिक तत्व शराब दुकान में आकर हंगामा व रंगदारी करते थे. इससे तनाव बना रहता था, अब ऐसा माहौल नहीं है. शुक्रगुजार हूं शराबबंदी का.

अशोक बताते हैं कि सूबे में शराबबंदी के बाद शराब का धंधा बंद हो गया. मुझे दूसरे किसी कार्य का अनुभव नहीं था. चार महीने यूं ही बीता दिये.

इसके बाद परिवार और समाज के सहयोग से जिस दुकान में शराब बेचने का काम करता था, उसी में कपड़ा बेचना शुरू किया. कपड़ा की दुकान खोलने के बाद महिलाएं दुकान पर आकर परिवार के साथ खरीदारी शुरू करने लगीं. अब शराब के धंधे से तोबा होने के बाद मैं परिवार व समाज में सम्मान के साथ जीवन गुजार रहा हूं. उन्होंने कहा कि समाज में अब लोग मेरा उदाहरण भी देने लगे हैं.

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