टाटा: तरजीही शेयरों पर मताधिकार

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टाटा संस ने तरजीही शेयरधारकों को मताधिकार मामले में शेयरधारकों से मांगी मंजूरी
► रतन टाटा बने टाटा ट्रस्ट्स के निवेश घटने से सबसे बड़े तरजीही शेयरधारक
► टाटा ने टाटा संस के 1,000 रुपये अंकित मूल्य के 10.5 लाख तरजीही शेयरों की खरीदारी के लिए 105 करोड़ रुपये का निवेश किया था
► तरजीही शेयरों के लिए लाभांश का भुगतान दो अथवा इससे अधिक वर्षों के लिए नहीं किया जाता है तो ऐसे शेयरधारकों को प्रस्तावों पर मताधिकार देने का प्रस्ताव

टाटा संस ने अपने आर्टिकल ऑफ एसोसिएशन में संशोधन के लिए शेयरधारकों से मंजूरी मांगी है जिसके तहत दो साल के लाभांश भुगतान में कंपनी द्वारा चूक मामलों में तरजीही शेयरधारकों को मतदान के अधिकार देने का प्रस्ताव है। कंपनी ने अपने आर्टिकल ऑफ एसोसिएशन में एक नई धारा 6 (डी) जोड़ने के प्रस्ताव के साथ 21 सितंबर को सालाना आम बैठक (एजीएम) आयोजित करने के लिए शेयरधारकों को नोटिस जारी की है। इसमें कहा गया है कि तरजीही शेयरों के लिए लाभांश का भुगतान दो अथवा इससे अधिक वर्षों के लिए नहीं किया जाता है तो ऐसे तरजीही शेयरधारकों को कंपनी के सभी प्रस्तावों पर मतदान का अधिकार होगा।

इस बाबत जानकारी के लिए संपर्क करने पर टाटा संस के प्रवक्ता ने कहा कि यह बदलाव कंपनी अधिनियम 2013 के अनुपालन जरूरतों के मुताबिक किया जा रहा है। वार्षिक रिपोर्ट से प्राप्त शेयरधारिता आंकड़ों के अनुसार, टाटा संस के मानद चेयरमैन रतन टाटा सबसे बड़े तरहीजी शेयरधारक (35.6 फीसदी तरजीही शेयर) के तौर पर उभरे हैं क्योंकि टाटा ट्रस्टों- जमशेदजी टाटा ट्रस्ट और नवजीबाई रतन टाटा ट्रस्ट- ने 3.95 करोड़ तरजीही शेयरों में अपने निवेश को घटाकर मार्च 2017 तक शून्य कर लिया है। टाटा ने पिछले साल टाटा संस के 1,000 रुपये अंकित मूल्य के 10.5 लाख तरजीही शेयरों की खरीदारी के लिए 105 करोड़ रुपये का निवेश किया था। टाटा के अलावा अन्य प्रमुख तरजीही शेयरधारकों में अंबुजा सीमेंट के संस्थापक एवं पूर्व चेयरमैन नरोत्तम सेकसरिया और टाटा संस के पूर्व निदेशक नोशिर सूनावाला शामिल हैं।एक कॉरपोरेट वकील के अनुसार, टाटा संस द्वारा चूक की गुंजाइश कम है क्योंकि वह टाटा टेलीसर्विसेज जैसी कंपनियों में अपने शेयरों की अक्सर बिक्री कर सकती है जहां तरजीही शेयरों पर लाभांश भुगतान के लिए उसकी करीब 74 फीसदी हिस्सेदारी है। टाटा समूह की गैर-सूचीबद्ध होल्डिंग कंपनी टाटा संस का शुद्ध लाभ वित्त वर्ष 2017 में 72.4 फीसदी घटकर 824 करोड़ रुपये रह गया जो इससे पिछले वित्त वर्ष में 3,013 करोड़ रुपये रहा था। इसकी मुख्य वजह टाटा टेलीसर्विसेज में 26 फीसदी हिस्सेदारी की पुनर्खरीद के लिए एनटीटी डोकोमो के भुगतान के लिए कंपनी को 4,716 करोड़ रुपये का प्रावधान करना पड़ा। टाटा संस ने इसके लिए दिल्ली उच्च न्यायालय में 8,000 करोड़ रुपये जमा कराया था।

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