इनपुट टैक्स क्रेडिट पर और बढ़ेगी मुश्किल!

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वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के लागू होने से पहले बिक्री पर कारोबारियों को दिए जाने वाले इनपुट टैक्स क्रेडिट पर आगे सरकार की चिंता और बढ़ सकती है। जीएसटी के तहत संग्रहीत कुल कर का पहले ही 68 फीसदी से अधिक का इनपुट टैक्स क्रेडिट का दावा किया जा चुका है जबकि बगैर बिल वाले दावे अभी आने हैं। जुलाई माह में जीएसटी के तहत 95,000 करोड़ रुपये का राजस्व मिला है, जिनमें से 1 जुलाई से पहले की गई बिक्री पर 65,000 करोड़ रुपये का इनपुट टैक्स क्रेडिट का दावा किया गया है। ये दावे टीआरएएन 1 के तहत बिलों के जरिये की गई बिक्री के हैं।

व्यापारियों और रिटेलरों के बिना बिल के ट्रांजिट स्टॉक के लिए टीआरएएन 2 दाखिल कर दावा किया जाना अभी बाकी है। एक अधिकारी ने कहा, ‘टीआरएएन 1 के तहत जो दावा किया है वह काफी ज्यादा प्रतीत होता है और उसका सत्यापन किया जा रहा है। लेकिन टीआरएन 2 के तहत कितने का दावा किया जाएगा, यह अभी तय नहीं है। हम राजस्व पर इसके प्रभाव का आकलन करने में जुटे हैं।’कंपनियों को जीएसटी लागू होने के 90 दिनों के अंदर पहले चुकाए गए उत्पाद शुल्क पर इनपुट क्रेडिट का दावा करने की अनुमति दी गई है। जीएसटी परिषद ने कंपनियों को 1 जुलाई से पहले चुकाए गए उत्पाद शुल्क पर बिलों के साथ 100 फीसदी इनपुट टैक्स क्रेडिट का दावा करने की अनुमति दी है। लेकिन बिल उपलब्ध नहीं होने पर टीआरएएन 2 के तहत पहले 40 फीसदी इनपुट टैक्स क्रेडिट की अनुमति थी। हालांकि 4 जून की बैठक में परिषद ने 18 फीसदी जीएसटी दर से अधिक वाली वस्तुओं पर इनपुट टैक्स क्रेडिट बढ़ाकर 60 फीसदी कर दिया गया।

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