सायरस के विरोध के बावजूद टाटा संस को प्राइवेट लिमिटेड कंपनी बनाने का प्रस्ताव पास

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माइनॉरिटी हिस्सेदारी रखने वाली सायरस मिस्त्री के परिवार की कंपनियों के भारी विरोध के बावजूद टाटा ग्रुप की होल्डिंग कंपनी टाटा संस के मेजॉरिटी शेयरहोल्डर्स ने गुरुवार को कंपनी की ऐनुअल जनरल मीटिंग (एजीएम) में इसे फिर से प्राइवेट लिमिटेड कंपनी बनाने के पक्ष में वोट डाला। शेयरधारकों ने टाटा संस के आर्टिकल्स ऑफ असोसिएशन (एओए) में बदलाव के पक्ष में भी मतदान किया। इससे कुछ कॉर्पोरेट गवर्नेंस रूल्स को मजबूत बनाया जा सकेगा। इनमें महिला डायरेक्टर की नियुक्ति, बोर्ड में डायरेक्टरों की संख्या बढ़ाना, एक तिहाई इंडिपेंडेंट डायरेक्टर और इंडिपेंडेंट डायरेक्टर के छुट्टी पर होने के दौरान ऑल्टरनेट डायरेक्टर की नियुक्ति जैसी बातें शामिल हैं।

शेयरधारकों ने कंपनी के बोर्ड में कम से कम 5 डायरेक्टरों की नियुक्ति को मंजूरी दी, जिनकी संख्या अभी तक 3 है। वहीं, मैक्सिमम डायरेक्टरों की संख्या (15 ) में बदलाव नहीं किया गया। एजीएम में जो अन्य प्रस्ताव पास हुए, उनमें से एक नॉन-कन्वर्टिबल डिबेंचर्स या एनसीडी के जरिये 45,000 करोड़ रुपये जुटाने का था। कंपनी में चीफ फाइनैंशल ऑफिसर की नियुक्ति पर भी शेयरधारकों ने मुहर लगाई है।

टाटा संस में 66 पर्सेंट हिस्सेदारी टाटा ट्रस्ट्स की है, जो चैरिटेबल संस्थाएं हैं। इन ट्रस्टों के चेयरमैन रतन टाटा हैं। टाटा संस में सायरस मिस्त्री के परिवार की कंपनियों की हिस्सेदारी 18.4 पर्सेंट है। बाकी के शेयर टाटा ग्रुप की कंपनियों और टाटा परिवार के कुछ सदस्यों के पास हैं। एन चंद्रशेखरन के चेयरमैन बनने के बाद यह कंपनी की पहली एजीएम थी। उन्हें इस साल फरवरी में टाटा संस का चेयरमैन बनाया गया था।

मिस्त्री एजीएम में शामिल नहीं हुए, लेकिन उन्होंने प्रस्तावों पर वोट डालने के लिए अपने दो प्रतिनिधि भेजे थे। मिस्त्री ने टाटा संस को पब्लिक लिमिटेड कंपनी से प्राइवेट लिमिटेड कंपनी बनाने का विरोध किया। उनका कहना है कि इससे उनके परिवार के शेयर ट्रांसफर करने या बेचने के अधिकार पर अंकुश लगेगा क्योंकि कंपनी ऐक्ट, 2013 में पब्लिक लिमिटेड कंपनी की तरह प्राइवेट लिमिटेड कंपनी के शेयर ट्रांसफर करने की आजादी नहीं है। इस कानून में कहा गया है कि प्राइवेट लिमिटेड कंपनी के शेयर बेचने या ट्रांसफर करने से पहले उसके बोर्ड से इजाजत लेनी होगी।

मिस्त्री ने टाटा संस में हिस्सेदारी रखने वाली टाटा ग्रुप की सभी कंपनियों को लेटर लिखकर इस प्रस्ताव के खिलाफ वोट डालने की अपील की थी। इन कंपनियों में टाटा मोटर्स, टाटा पावर, टाटा स्टील, टाटा केमिकल्स, टाटा ग्लोबल बेवरेजेज और इंडियन होटल्स शामिल हैं।

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