स्त्री शक्ति के पर्व पर महिला आरक्षण की मांग

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स्त्री शक्ति के पर्व नवरात्रि की पूर्व संध्या पर कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने महिला सशक्तिकरण की बात करते हुए प्रधानमंत्री से लोकसभा में महिला आरक्षण बिल को जल्द से जल्द पास कराने की अपील की। उन्होंने बुधवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखा है, जिसमें अपील की है कि लोकसभा में बीजेपी को मिले बहुमत को देखते हुए उन्हें जल्द से जल्द महिला आरक्षण बिल पास कराने की कोशिश करनी चाहिए। सोनिया ने लिखा है कि यह बिल मार्च 2010 में राज्यसभा में पास हो चुका है और अब लोकसभा की मंजूरी पाने की बाट जोह रहा है। इसलिए आप इसे लोकसभा में लेकर आइए। साथ ही उन्होंने अपनी पार्टी की ओर से सरकार को इस बिल पर पूरा समर्थन दिए जाने का आश्वासन भी दिया।

20 सितंबर को लिखे पत्र में सोनिया गांधी ने याद दिलाया है कि कांग्रेस और उनके दिवंगत नेता राजीव गांधी ने संविधान संशोधन बिलों के जरिए पंचायतों व स्थानीय निकायों में महिलाओं के आरक्षण के लिए पहली बार प्रावधान किया व महिलाओं को सशक्त बनाने की ओर कदम उठाया था। कांग्रेस ने कहा कि बीजेपी के सत्ता में आने के बाद से लगातार वे पीएम मोदी से महिला आरक्षण बिल को पास कराने को लेकर मांग करते रहे हैं। इतना ही नहीं, पिछले दिनों महिला आरक्षण बिल पास कराने की मांग को लेकर महिला कांग्रेस ने एक देशव्यापी हस्ताक्षर अभियान भी चलाया था। इस बारे में हाल ही में महिला कांग्रेस की अध्यक्ष बनीं सुष्मिता देव ने गुरुवार को मीडिया से मुलाकात के दौरान कहा कि महिला आरक्षण बिल बीजेपी के आम चुनाव के मेनिफेस्टो का भी हिस्सा रहा है। ऐसे में पीएम से अपील है कि वह देश की महिलाओं से किया वादा पूरा करें।

सुष्मिता देव ने बताया कि महिला कांग्रेस इस मुद्दे पर राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद से मिलने जा रही है। उनका कहना था कि हमने राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द से मिलने का समय मांगा है। महिला कांग्रेस का डेलिगेशन उन्हें देश की लाखों महिलाओं द्वारा दस्तखत किया मांग पत्र सौंपेगा, जिसमें महिला आरक्षण बिल लोकसभा में जल्द से जल्द पास कराने की मांग की गई है। देव का कहना था कि पार्टी स्तर पर महिलाओं को टिकट देने से कुछ नहीं होगा, जरूरी है कि लोकसभा व विधानसभाओं में उन्हें उनका हक आरक्षण मिले। देव का कहना था कि अगर पहले ही महिलाओं को आरक्षण मिल गया होता तो भारतीय राजनीति की तस्वीर कुछ और ही होती। उल्लेखनीय है कि इस साल के शुरू में खुद लोकसभा स्पीकर ने सदन में महिला आरक्षण बिल पास कराने की बात कही थी, दूसरी ओर लेफ्ट ने भी सरकार से इसी साल महिला आरक्षण बिल लोकसभा में पास कराने की बात कही थी।

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