‘बॉयफ्रेंड होने का मतलब लड़की की ‘हां’ नहीं’

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बॉम्बे उच्च न्यायालय ने कहा है कि यदि कोई किसी महिला का बॉयफ्रेंड है, तो उसे महिला के साथ ‘यौन संबंध’ बनाने का अधिकार नहीं मिल जाता। न्यायाधीश ए.एम. बदर ने इस आधार पर एक दोषी व्यक्ति को जमानत देने से इनकार कर दिया है।

उल्लेखनीय है कि इस अपराधी को अपनी ही अवयस्क रिश्तेदार के साथ बार-बार बलात्कार करने के आरोप में गिर‌फ्तार किया गया था। अदालत ने दोषी के इस तर्क को भी अमान्य कर दिया है कि लड़की के दो बॉयफ्रेंड थे और उनके साथ उसके ‘यौन संबंध’ थे।

न्यायाधीश ने कहा, ‘महिला कैसी भी हो, इसका मतलब यह कतई नहीं है कि कोई भी उसके साथ कुछ भी करे। उसे ‘न’ कहने का अधिकार है।’ न्यायाधीश ने कहा कि बलात्कार के समय पीड़िता वयस्क नहीं थी और उसने ‘यौन संबंध’ के लिए अपनी सहमति नहीं दी थी। लड़की ने अदालत में जिरह के दौरान कहा था कि दोषी ने उसके साथ बार-बार ‘यौन संबंध’ बनाए थे।

दोषी की दलील

यह मामला नासिक का है, जिसमें एक व्यक्ति को पॉक्सो के तहत पिछले साल 10 वर्ष की सजा सुनाई गई थी। लेकिन, उसने इस फैसले के खिलाफ उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया और कहा कि उसने कोई अपराध नहीं किया है और वह अपने परिवार का इकलौता कमाने वाला है। दोषी का कहना था, ‘पीड़ित लड़की ने बलात्कार के तुरंत बाद अपनी ओर से कोई शिकायत या प्राथमिकी दर्ज नहीं कराई। और तो और, जब वह आश्रय गृह में भेजी गई, तो भी उसने किसी को यह नहीं बताया कि उसके साथ कोई बलात्कार हुआ था।’ इस आधार पर आवेदक ने कहा कि कोई घटना हुई ही नहीं। आवेदक ने यह भी कहा कि लड़की के दो बॉयफ्रेंड थे और उनके साथ उसके शारीरिक संबंध थे। लेकिन, न्यायाधीश बदर ने दोषी व्यक्ति के सभी तर्क नामंजूर कर दिए और कहा कि उसकी बातों में दम नहीं है। न्यायाधीश ने कहा, ‘अपराध गंभीर प्रकृति का है और आवेदक अपराध करने का दोषी है। इसलिए उसकी जमानत की अर्जी नामंजूर की जाती है।’

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