लालू और तेजस्वी को तीसरी नोटिस जारी करने वाली सीबीआइ ले सकती है बड़ा एक्शन, जानें

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बिहार के सबसे बड़े सियासी परिवार के लगभग सभी सदस्य बेनामी संपत्ति के मसले को लेकर सीबीआइ और ईडी के नोटिस को झेल रहे हैं. मामले में कई बार ईडी और सीबीआइ ने नोटिस जारी कर राजद सुप्रीमो लालू यादव सहित उनके बेटे तेजस्वी यादव का पूछताछ के लिए उपस्थित होने का नोटिस जारी किया है. सीबीआइ की दो नोटिस के बाद भी लालू और तेजस्वी उपस्थित नहीं हुए थे. दोनों लोगों को तीन और चार अक्तूबर को सीबीआइ के समझ सफाई देने के लिए उपस्थित होना है. जानकारी के मुताबिक इस बार तीसरी नोटिस के जारी होने के बाद यदि तेजस्वी यादव और लालू यादव उपस्थित नहीं होते हैं, तो सीबीआइ दंडात्मक कार्रवाई कर सकती है. इससे पूर्व में जब भी नोटिस जारी हुआ , तो लालू सहित तेजस्वी ने कई कार्यों का हवाला देकर उपस्थिति के लिए दूसरे किसी दिन को निर्धारित करने की बात कही. सीबीआइ ने लालू और तेजस्वी को पहले 11 और 12 अगस्त को उपस्थित होने के लिए कहा था. उसके बाद दोबारा 25 और 26 सितंबर को उपस्थित होने के लिए नोटिस जारी किया और अब तीसरी बार यानी 3 और चार अक्तूबर को दोनों पिता-पुत्र को सीबीआइ के समक्ष उपस्थित होना है. मामला रेलवे से जुड़े टेंडर घोटाले का है.

इधर, ईडी ने भी गत 27 सितंबर को तेजस्वी यादव को पूछताछ के लिए तीसरा नोटिस भेजा था. इस नोटिस के जरिये विभाग ने तेजस्वी यादव को पूछताछ के लिए विभाग के दिल्ली स्थित मुख्यालय में बुलाया था. आईआरसीटीसी रेलवे टेंडर घोटाले मामले में लालू यादव ,राबड़ी देवी सहित तेजस्वी यादव के खिलाफ सीबीआई ने भी तीसरी बार नोटिस जारी की है. बताया जा रहा है कि ईडी ने उसी मामले को आधार बनाते हुए अपनी ओर से भी मुकदमा दर्ज किया था. जानकारी के मुताबिक यदि इस बार तेजस्वी यादव ईडी की इस नोटिस को हल्के में लेते हैं, तो उन पर बड़ी कार्रवाई हो सकती है. इससे पूर्व गत 26 सितंबर को सीबीआई ने राजद प्रमुख लालू प्रसाद और उनके पुत्र तेजस्वी यादव को कथित भ्रष्टाचार के मामले में पूछताछ के लिये क्रमश: तीन और चार अक्तूबर को जांच एजेंसी के समक्ष उपस्थित होने के लिये नये सिरे से सम्मन जारी किया था. सीबीआई ने लालू की जांच दल के समक्ष उपस्थित होने के लिये 15 दिन का वक्त दिये जाने की मांग करने वाली अर्जी ठुकरा दी थी. लालू के खिलाफ कथित भ्रष्टाचार का यह मामला एक निजी फर्म को रेलवे के दो होटलों के रखरखाव का ठेका देने से संबंधित है. यह मामला 2006 का है, जब लालू केंद्र में रेल मंत्री थे. एजेंसी सूत्रों ने बताया कि तेजस्वी को आज तलब किया गया था. उन्होंने अपने वकील को भेजा। उन्होंने और समय दिये जाने का अनुरोध किया. सीबीआई प्रवक्ता अभिषेक दयाल ने कहा कि लालू को अब तीन अक्तूबर और तेजस्वी को चार अक्तूबर को तलब किया गया है.

मामला उन आरोपों से संबंधित है जिसमें कहा गया है कि रेल मंत्री के तौर पर लालू ने रांची और पुरी में आईआरसीटीसी द्वारा संचालित दो होटलों का रख-रखाव सुजाता होटल को सौंप दिया. इसके बदले में उन्होंने कथित तौर पर बेनामी कंपनी के जरिये पटना में तीन एकड़ महत्वपूर्ण जमीन हासिल की. सुजाता होटल का स्वामित्व विनय और विजय कोचर के पास है. प्राथमिकी में आरोप लगाया गया है कि लालू ने विनय और विजय कोचर को अनुचित फायदा पहुंचाने के लिये अपने आधिकारिक पद का दुरुपयोग किया और बेनामी कंपनी डिलाइट मार्केटिंग कंपनी के जरिये महंगी जमीन हासिल की थी. बदले में उन्होंने बेईमानी और कपट पूर्ण तरीके से दोनों होटलों का ठेका विनय और विजय कोचर को दिया. सुजाता होटल को ठेका दिये जाने के बाद डिलाइट मार्केटिंग का स्वामित्व भी सरला गुप्ता से राबड़ी देवी के हाथ में 2010 में और 2014 में तेजस्वी यादव के हाथ में आ गया. इस समय तक लालू ने रेल मंत्री के पद से इस्तीफा दे दिया था. सीबीआइ ने लालू, उनकी पत्नी राबड़ी देवी, बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव और पूर्व केंद्रीय मंत्री प्रेमचंद गुप्ता की पत्नी सरला गुप्ता के खिलाफ मामला दर्ज किया.

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