21 साल पहले आज ही बूम-बूम अफरीदी के बल्ले से थर्रा उठा था नैरोबी

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गेंदबाजों की धुनाई के लिए मशहूर शाहिद अफरीदी के लिए आज (4 अक्टूबर) का दिन खास है. फैंस के बीच ‘बूम-बूम’ नाम से मशहूर अफरीदी ने 21 साल पहले वनडे इतिहास का सबसे तेज शतक जमाया था, वो 37 भी गेंदों पर. इस रिकॉर्ड को तोड़ने में दुनियाभर के बल्लेबाजों को 18 साल लग गए. वनडे के सबसे तेज शतकों की बात करें, तो अफरीदी का नाम तीसरे नंबर पर है. हालांकि मौजूदा टॉप-5 सबसे तेज वनडे शतक की लिस्ट पर नजर डालें, तो उसमें दो बार अफरीदी का नाम दर्ज है.

नैरोबी में खेले गए कीसीए टूर्नामेंट-1996 के छठे मैच में पाकिस्तान और श्रीलंका आमने-सामने थे. टॉस हारकर पहले बल्लेबाजी करने उतरी पाकिस्तानी टीम का पहला विकेट गिरने के बाद अफरीदी क्रीज पर आए. फिर क्या था उन्होंने रनों की बरसात कर दी. मात्र 16 साल की उम्र में अफरीदी ने 37 गेंदों में सेंचुरी बनाकर वनडे में सबसे तेज सेंचुरी बनाने का कारनामा कर दिया.

अफरीदी की इस रिकॉर्डतोड़ सेंचुरी की मदद से पाकिस्तान ने 371/9 रन का पहाड़ जैसा स्कोर खड़ा किया. उस समय वनडे का यह दूसरा सबसे बड़ा स्कोर था. अफरीदी ने उस मैच में चौके (6) से ज्यादा छक्के (11) बरसाए. तब उन्होंने सनथ जयसूर्या के वनडे की एक पारी में सर्वाधिक छक्के के रिकॉर्ड की बराबरी की थी. अफरीदी आखिरकार 40 गेंदों में 102 रन बनाकर लौटे. इस मैच में पाक ने श्रीलंका को 82 रनों से मात दी थी.

दरअसल, इस पाकिस्तानी धुरंधर ने महज छह महीने में श्रीलंका के तूफानी ओपनर सनथ जयसूर्या के रिकॉर्ड को तोड़ डाला था. जयसूर्या ने उसी साल यानी 1996 में 48 गेंदों में सेंचुरी लगाने का वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया था. मजे की बात है कि जयसूर्या ने पाकिस्तान के ही खिलाफ सिंगापुर में वह कातिलाना पारी खेली थी.

अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास लेने के बाद भी अफरीदा का जलवा बरकरार रहा. अफरीदी ने अगस्त 2017 नेटवेस्‍ट टी-20 ब्‍लास्‍ट क्‍वार्टर फाइनल में महज 42 गेंदों पर शतक जड़कर अपनी बल्लेबाजी का एक बार फिर लोहा मनवाया.

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