आरुषि-हेमराज हत्याकांड में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने तलवार दंपती को सबूतों के अभाव में बरी किया

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नोएडा
चर्चित आरुषि-हेमराज हत्याकांड में गुरुवार को इलाहाबाद हाई कोर्ट ने राजेश और नुपुर तलवार को बड़ी राहत दी। मामले की जांच में खामियां बताते हुए कोर्ट ने तलवार दंपती को बरी कर दिया। सबूतों के अभाव में तलवार दंपती को बरी किया गया है। हाई कोर्ट ने कहा कि आरुषि को ममी-पापा ने नहीं मारा। कोर्ट ने कहा कि ऐसे मामलों में सुप्रीम कोर्ट भी इतनी कठोर सजा नहीं देता है। बताया जा रहा है कि हाई कोर्ट ने तलवार दंपती को तुरंत जेल से रिहा करने का आदेश दिया है। जस्टिस ए. के. मिश्रा ने फैसला पढ़कर सुनाया। उधर, जेल में बंद तलवार दंपती फैसला सुनने के बाद भावुक हो गए और उन्होंने एक दूसरे को गले लगा लिया। कोर्ट ने कहा कि संदेह का लाभ देते हुए तलवार दंपती को रिहा किया जाता है।

वकीलों का कहना है कि राजेश और नुपूर जल्द ही डासना जेल से रिहा हो सकते हैं। इससे पहले दोपहर करीब 2.50 बजे दोनों जजों ने फैसले पर हस्ताक्षर किया। गौरतलब है कि तलवार दंपती ने उम्रकैद की सजा के खिलाफ इलाहाबाद हाई कोर्ट में अपील की थी। हाई कोर्ट ने अब निचली अदालत के फैसले को पलट दिया है। गौर करने वाली बात यह है कि उम्रकैद की सजा देने वाले पूर्व जज श्यामलाल भी गुरुवार को इलाहाबाद हाईकोर्ट पहुंचे थे। फैसला आने से पहले तलवार दंपती काफी परेशान थे। जेल में बंद राजेश और नुपुर तलवार को रात में नींद नहीं आई। दोनों ने सुबह का नाश्ता भी नहीं किया। बताया जा रहा है कि सुबह हेल्थ चेकअप के दौरान उनका ब्लड प्रेशर भी बढ़ा हुआ था। तलवार दंपती ने डासना जेल से ही टीवी के जरिए फैसला सुना। जेल सूत्रों के मुताबिक आम दिनों की तुलना में नुपूर ने दूसरे कैदियों से बातचीत नहीं की और गुमसुम बैठी रहीं। अपनी बेटी आरुषि की हत्या के आरोपी तलवार दंपती फिलहाल गाजियाबाद की डासना जेल में बंद हैं। करीब 9 साल पहले नोएडा के सेक्टर-25 स्थित जलवायु विहार में हुई इस मर्डर मिस्ट्री की पुलिस के बाद सीबीआई की दो टीमों ने जांच की थी। गाजियाबाद स्थित विशेष सीबीआई अदालत ने 26 नवंबर, 2013 को राजेश और नुपुर को उम्रकैद की सजा सुनाई थी। इससे एक दिन पहले इन्हें दोषी ठहराया गया था।

तलवार दंपती की याचिका पर जस्टिस बी. के. नारायण और जस्टिस ए. के. मिश्रा की खंडपीठ ने 7 सितंबर को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। फैसला सुनाने की तारीख 12 अक्टूबर को तय की थी। क्या हुआ था उस दिन
मई, 2008 में नोएडा के जलवायु विहार इलाके में 14 साल की आरुषि का शव उसके मकान में बरामद हुआ था। शुरुआत में शक की सुई नौकर हेमराज की ओर गई, लेकिन दो दिन बाद मकान की छत से उसका भी शव बरामद किया गया। उत्तर प्रदेश की तत्कालीन मुख्यमंत्री मायावती ने मामले की जांच सीबीआई को सौंपी थी।

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