मोबाइल वॉलेट यूजर्स अब कर पाएंगे ये काम!

0
214

(RBI) मोबाइल वॉलेट के लिए नई गाइडलाइंस लाने जा रही है. माना जा रहा है कि नई गाइडलाइंस में आरबीआई वॉलेट यूजर को गलत ट्रांजैक्‍शन से बचाने के लिए लिए इंटरऑपरेबिलिटी को मंजूरी दे सकती है. इसको अगर आसान शब्दों में समझें तो अब धोखाधड़ी का पता लगाना आसान हो जाएगा. इसके अलावा यूजर्स के लिए केवाईसी कराना जरूरी होगा.

क्रेडिट पॉलिसी में आरबीआई ने एलान किया है कि अगले साल अप्रैल तक अलग-अलग ईवॉलेट के बीच पैसे ट्रांसफर किए जा सकेंगे. ई-वॉलेट कंपनियां आरबीआई के इस कदम से काफी उत्साहित नजर आ रही हैं.

RBI की नई गाइडलाइंस!
> कस्‍टमर्स UPI के जरिए अलग- अलग कंपनियों और बैंकों से पैसे ट्रांसफर कर सकेंगे.
> इससे पहले वो लोग जो पैसे लेने देने के लिए ई-वॉलेट का इस्तेमाल करते थे वो एक कंपनी के ई-वॉलेट से दूसरी कंपनी के ई-वॉलेट में पैसे ट्रांसफर नहीं कर पाते थे.
> एक ऐप ई-वॉलेट से दूसरे ई-वॉलेट में पैसे ट्रांसफर करने की सर्विस फिलहाल उन्ही ई-वॉलेट्स में हैं जो सरकार के यूनिफाइड पेमेंट इंटरफेज यानि UPI से जुड़े हुए हैं.
> फंड ट्रांसफर की सुविधा मिल जाने पर सभी ई-वॉलेट्स को KYC नियमों का पालन करना होगा.
> केवाईसी पूरी नहीं होने तक यूजर्स सिर्फ 10 हजार रुपए ट्रांसफर कर सकते है.
> अगर यूजर्स 12 महीने के दौरान केवाईसी पूरी करा लेता है तो वह एक लाख रुपए तक ट्रांसफर कर पाएगा.

भारत में तेजी से बढ़ रहा है डिजिटल भुगतान
> कैपजेमिनाई की वर्ल्‍ड पेमेंट्स रिपोर्ट 2017 के मुताबिक 2022 तक देश का मोबाइल वॉलेट उद्योग वृद्धि के साथ 4.4 अरब डॉलर के स्तर तक पहुंच सकता है.
> वल्र्ड पेमेंट्स रिपोर्ट 2017 के मुताबिक एशिया में डिजिटल भुगतान की रफ्तार में तेजी इस वजह से हुई क्योंकि चीन और भारत ने सब तक डिजिटल सेवाएं मुहैया कराने की दिशा में लगातार कोशिश की.
> अगले कुछ साल में बेहतर कनेक्टिविटी और ज्यादा तादाद वाले स्मार्टफोन यूजर की वजह से भारत के मुकाबले चीन में ज्यादा तेजी से वृद्धि की उम्मीद है.
> हालांकि, भारत भी पीछे नहीं है और यहां बेहतर कनेक्टिविटी के साथ स्मार्टफोन यूजरों की तादाद में भी इजाफा हुआ है.

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here