RSS के बड़े नेता बोले- अगर जय शाह के खिलाफ पुख्ता सबूत मिलें तो जांच होनी चाहिए

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अमित शाह के पुत्र जय शाह के मामले में भाजपा का रवैया संघ को रास नहीं आया है। संघ का मानना है कि मामले को संभालने में भाजपा ने बड़ी तकनीकी भूल की है। संघ ने स्पष्ट किया है कि यदि जय शाह के खिलाफ लगे आरोपों के पुख्ता प्रमाण मिलते हैं तो मामले की जांच होनी चाहिए।अमित शाह के पुत्र जय शाह पर लग रहे आरोपों पर पहली बार संघ का रुख सामने रखते हुए सह सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबोले ने कहा है कि अगर पहली नजर में कोई मामला बनता हो तो जांच होनी चाहिए।
भोपाल में चल रही संघ के अखिल भारतीय कार्यकारी मंडल की बैठक से पहले पत्रकारों को संबोधित करते हुए उन्होंने यह भी कहा कि आरोप लगाने वालों को प्रमाण सामने रखना चाहिए। बिना प्रमाण के आरोप लगाना उचित नहीं है। होसबोले ने साफ कहा कि जो आरोप होते हैं तो उसमें जो आवश्यक जानकारी हों वो हो। साथ ही उन्होंने कहा कि आरोप भी प्रथम दृष्टया होने के बाद होना चाहिए। आरोप लगाने वाले पहले सिद्ध करें।
जय शाह मामले पर संघ को भाजपा का रवैया रास नहीं आया है। संघ मान रहा है कि जय शाह का यह मामला निजी है इसे भाजपा की राजनीति से नहीं जोड़ा जाना चाहिए था। सरकार के मंत्रियों के बजाय जय शाह को खुद अपने ऊपर लग रहे आरोपों पर सफाई देनी चाहिए थी। सूत्र बताते हैं कि भोपाल में गुरुवार को शुरू हुई कार्यकारी मंडल की बैठक से एक दिन पूर्व संघ अधिकारियों की शीर्ष टोली ने मामले पर अलग से मंत्रणा की है।

बैठक में शामिल एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार जय शाह के मामले पर भाजपा को इतना आक्रामक नहीं होना चाहिए था। पीयूष गोयल के जरिये जय शाह के मामले पर पत्रकार वार्ता आयोजित कराने का फैसला बड़ी भूल थी। भाजपा की सफाई के वजह से विपक्ष को एक सियासी औजार मिल गया। दरअसल पीयूष गोयल को जय शाह मामले में मैदान में उतारने का फैसला खुद अमित शाह का था। खबरिया वेबसाइट ने जय शाह की खबर छापने से पूर्व उनसे उनका पक्ष रखने का आग्रह किया था। मगर शाह के पक्ष से पहले भाजपा ही मैदान में कूद पड़ी।

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