मिशन 2019 : पीएम के मोकामा में कार्यक्रम के सामाजिक व राजनीतिक मायने

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के शनिवार को मोकामा के कार्यक्रम का राजनीतिक गलियारे में निहतार्थ ढूंढे जा रहे हैं. राजनीतिक गलियारे में इसे मिशन 2019 के ट्रेलर के रूप में देखा जा रहा है. वैसे तो मोकामा का कार्यक्रम सरकारी था लेकिन इसके अपने राजनीतिक मायने भी हैं.
जगह के चयन से लेकर प्रधानमंत्री के संबोधन सभी जगह यह दिखा भी. प्रधानमंत्री ने यहां पर लोगों को संबोधित भी किया.

अपने संबोधन में बिहार केशरी श्री बाबू लेकर राष्ट्रकवि दिनकर और बाबा चौहरमल की चर्चा कर सामाजिक समीकरण के साथ-साथ राजनीतिक समीकरण को भी साधा. प्रधानमंत्री के संबोधन से यह इंगित भी हुआ कि नया सिक्स लेन का पुल राज्य के पहले मुख्यमंत्री डाॅ श्रीकृष्ण सिंह को समर्पित होगा. देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू के बाद मोकामा आनेवाले नरेंद्र मोदी दूसरे प्रधानमंत्री हैं.

राज्य में फिर से भाजपा व जदयू की सरकार बनने के बाद पहली बार राज्य में प्रधानमंत्री व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार सार्वजनिक मंच साझा कर रहे थे. नीतीश कुमार के संसदीय क्षेत्र का मोकामा हिस्सा रह चुका है. इन सब को लेकर इसके कई राजनीतिक निहतार्थ हैं. मोकामा का कार्यक्रम कहने को ही सरकारी था.

प्रधामनंत्री ने बिहार को हजारों करोड़ की सौगात दी लेकिन कार्यक्रम को सफल बनाने में भाजपा ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी थी. पार्टी के प्रदेश के बड़े से लेकर छोटे नेता व कार्यकर्ता तक इसकी सफलता में रात दिन एक कर दिया था. प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री ने एक-दूसरे की जमकर तारीफ की. प्रधानमंत्री ने भी अपने संबोधन में नीतीश कुमार को पूरी तवज्जो दी. साथ ही यह संकेत भी दिया कि यह दोस्ती लंबी चलेगी.

राजनैतिक पंडित मानते हैं कि यह एक तरह बिहार में मिशन 2019 का ट्रेलर था. विधानसभा चुनाव की हार को भाजपा का शीर्ष नेतृत्व अभी तक भूला नहीं पाया है. राज्य में लोकसभा की चालीस सीटें है. इस लिहाज से भी 2019 में बिहार अहम है. विधानसभा चुमाव में इस इलाके में भाजपा को सफलता नहीं मिली थी. मोकामा से सटा बेगुसराय का इलाका कभी बिहार का लेनिन ग्राड कहलाता था.

प्रदेश कार्यसमिति की बैठक में ही हो गया था आगाज

इसी महीने संपन्न हुई भाजपा प्रदेश कार्यसमिति की बैठक में मिशन 2019 का आगाज हो गया था. उसके बाद मोकामा का कार्यक्रम भी चुनावी तैयारी की ओर ही संकेत देता है. मंच पर पप्पू यादव की उपस्थिति और स्थानीय विधायक अनंत सिंह का न होना भी चर्चा का विषय रहा. भाजपा नेताओं का मानना है कि प्रधानमंत्री का यह बिहार दौरा पार्टी के लिए काफी मायने रखता है.

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