दिवाली की मिली सौगात, सितंबर में थोक महंगाई घटकर 2.60% पर पहुंची

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दीवाली से पहले आम आदमी को आर्थिक मोर्चे पर बड़ी राहत मिली है। खाद्य सामग्रियों और खास कर सब्जियों की कीमतें घटने से थोक महंगाई दर सितंबर में घटकर 2.60 फीसदी दर्ज की गई।
एक महीने पहले अगस्त में थोक मूल्य सूचकांक (डब्ल्यूपीआई) पर आधारित महंगाई दर बढ़कर चार महीने के ऊपरी स्तर 3.24 फीसदी पर पहुंच गई थी। एक साल पहले सितंबर 2016 में थोक महंगाई दर 1.36 फीसदी पर थी।

सोमवार को जारी सरकारी आंकड़े के मुताबिक खाद्य महंगाई दर भी घटकर सितंबर में 2.04 फीसदी पर आ गई है, जो अगस्त में 5.75 फीसदी थी।

सब्जियों की महंगाई दर सितंबर में घटकर 15.48 फीसदी रही, जो अगस्त में 44.91 फीसदी थी। प्याज की महंगाई दर हालांकि सितंबर में 79.78 फीसदी के उच्च स्तर पर रही। अंडे, मांस और मछली की महंगाई दर 5.47 फीसदी रही।

विनिर्मित उत्पादों की महंगाई दर आलोच्य अवधि में मामूली बढ़कर 2.72 फीसदी रही, जो अगस्त में 2.45 फीसदी थी। ईंधन और बिजली सेगमेंट में महंगाई दर घटकर 9.01 फीसदी रही, जो अगस्त में 9.99 फीसदी थी।

गत दो महीने में ईंधन महंगाई दर अधिक रही है, क्योंकि कच्चे तेल की वैश्विक कीमतें बढ़ने से पेट्रोल और डीजल मूल्यों में वृद्घि का रुझान रहा। वहीं, घरेलू उत्पादन कम रहने के चलते बिजली की दर भी बढ़ी।

इस बीच दालों की कीमतें 24.26 फीसदी घटीं। इसी तरह आलू की कीमत 46.52 फीसदी और गेहूं की 1.71 फीसदी घटी। जुलाई की थोक महंगाई दर का अंतिम अनुमान 1.88 फीसदी के अस्थायी अनुमान पर बरकरार रहा।

खुदरा महंगाई दर में भी वृद्धि नहीं
इस सप्ताह के शुरू में जारी एक अन्य आंकड़े के मुताबिक खुदरा महंगाई दर सितंबर में 3.28 फीसदी रही, जो अगस्त में भी इतनी ही थी। सब्जियोें और अनाजों की खुदरा कीमतें हालांकि इस दौरान घटीं।

उधर औद्योगिक उत्पादन की वृद्धि दर अगस्त में नौ महीने के ऊपरी स्तर 4.3 फीसदी पर पहुंच गई। मुख्यत: खनन और बिजली क्षेत्रों के बेहतरीन प्रदर्शन और पूंजीगत वस्तुओं के उत्पादन में वृद्धि के चलते औद्योगिक उत्पादन का प्रदर्शन बेहतर रहा।

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