चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के 3 घंटे लंबे भाषण के क्या हैं मायने?

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कम्युनिस्ट पार्टी के सम्मेलन में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के भाषण पर चीन समेत दुनिया के कई मुल्कों की निगाहें थीं.

तीन घंटे लंबे दिए भाषण में शी जिनपिंग ने अपनी उपलब्धियां गिनवाईं और भविष्य के लिए अपना रोडमैप बताया. शी जिनपिंग ने कहा, ”चीन एक नए युग में प्रवेश कर चुका है, जहां हमें दुनिया के केंद्रीय मंच पर अपनी जगह लेनी चाहिए.

चीनी विशेषताओं के साथ समाजवाद के तहत मुल्क ने तेजी से विकास किया. ये दिखाता है कि दूसरे मुल्कों के पास एक नया विकल्प है.”

इस सम्मेलन का मकसद चीन के अगले प्रमुख को चुनना और नीतियों का ऐलान करना है. सम्मेलन में शी जिनपिंग के पार्टी प्रमुख बन रहने की संभावना जताई जा रही है.
लेकिन संवाददाताओं का कहना है कि चीन पहले के मुक़ाबले ज़्यादा सत्तावादी बनी है. क्योंकि इस दौरान वकीलों और कार्यकर्ताओं की गिरफ़्तारी और सेंसरशिप बढ़ी है.
शी जिनपिंग पहले के राष्ट्र प्रमुखों से ज़्यादा मुखर नेता रहे हैं. सम्मेलन के दौरान अपनी लंबे भाषण में वो काफी आत्मविश्वास से भरे नज़र आए.
जिनपिंग ने अपने पांच सालों की उपलब्धियों को गिनाते हुए कहा कि पार्टी ने असंभव लक्ष्य पूरे किए, विश्व में चीन की भूमिका बढ़ी है.
हाल ही में पार्टी की मीडिया ने पश्चिमी लोकतंत्र में फैले संकट की तुलना चीन की मजबूती और एकता से की थी. शी जिनपिंग अपने भाषण में कहते हैं कि वो विदेश राजनीतिक प्रणाली की नकल नहीं करेंगे.
जिनपिंग ने कहा, ”कम्युनिस्ट पार्टी हर उस बात का विरोध करेगी, जो चीन के नेतृत्व को नकारेगी.”
जिनपिंग ने अपने भाषण में चीन के समाजवादी आधुनिकीकरण की योजना को 2050 तक लाने के लिए दो चरण की योजना का ब्यौरा दिया. इस योजना में पर्यावरण और अर्थव्यवस्था से जुड़े सुधार शामिल हैं, जिसके ज़रिए चीन को ”समृद्ध और खूबसूरत” बनाने की बात कही गई.
शिंजियांग, तिब्बत और हॉन्गकॉन्ग में बीते दिनों में अलगाववाद को लेकर हुए आंदोलनों को लेकर भी जिनपिंग ने चेतावनी दी. जिनपिंग ने ताइवान को चीन का हिस्सा बताने की चीनी सरकार की बात को दोहराया.
जिनपिंग ने कहा, ”हम दुनिया के लिए अपने दरवाजों को बंद नहीं करेंगे, हम विदेशी निवेशकों के लिए नियमों को आसान करेंगे.”
बीजिंग में बीबीसी संवाददाताओं की रिपोर्ट के मुताबिक, जिनपिंग ने पार्टी में अनुशासन बढ़ाने का भी ज़िक्र किया. इसके अलावा उन्होंने क़रीब 10 लाख अधिकारियों को भ्रष्टाचार पर दी सज़ा का भी ज़िक्र किया.

इस सम्मेलन के लिए बीजिंग में त्योहार जैसा माहौल है. बीजिंग की सड़के बैनरों से पटी हुई हैं. सुरक्षा के मद्देनज़र राजधानी को हाई अलर्ट पर रखा गया है.

इस हफ्ते रेलवे स्टेशनों पर लंबी कतारें और अतिरिक्त ट्रांसपोर्ट हब्स साफ़ दिखती हैं. इस सम्मेलन का असर व्यापार पर भी पड़ा है.

चीन की सरकारी मीडिया का कहना है कि पार्टी अपने संविधान को फिर से लिख सकती है, ताकि जिनपिंग की वर्क रिपोर्ट और राजनीतिक विचारों को इसमें शामिल किया जा सके. ऐसे करने से जिनपिंग का क़द पार्टी के पूर्व दिग्गजों माओ त्से तुंग और डेंग शियाओ पिंग जितना हो जाएगा.

बीबीसी के बीजिंग संवाददाता जॉन सडवर्थ का कहना है कि कुछ लोग शी जिनपिंग को माओ के बाद का सबसे ताक़तवर नेता मान रहे हैं. कांग्रेस पर पैनी नज़र रखी जा रही है ताकि उन संकेतों पर पता लगाया जा सके कि एक आदमी के हाथ में कितनी शक्ति दी जानी है.

जिनपिंग ने अपने शासन के दौरान पार्टी और चीनी समाज में नियंत्रण कसा है. लेकिन वो आम नागरिकों के बीच मिले विशाल समर्थन को इंजॉय भी कर रहे हैं.

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