वित्त वर्ष 2018 के लिए पीएफ के ब्याज दर पर फैसला नवंबर में

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मौजूदा वित्त वर्ष के लिए पांच करोड़ से ज्यादा कर्मचारियों के भविष्य निधि (पीएफ) पर देय ब्याज का फैसला अगले महीने हो सकता है। कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) का सेंट्रल बोर्ड ऑफ ट्रस्टीज (सीबीटी) इस पर फैसला करेगा। ट्रस्टी बोर्ड के प्रमुख श्रम मंत्री संतोष गंगवार हैं।

सूत्रों के अनुसार ट्रस्टी बोर्ड की नवंबर में होने वाली बैठक में चालू वित्त वर्ष 2017-18 की ब्याज दर का प्रस्ताव रखा जा सकता है। पिछले साल दिसंबर में सीबीटी ने बीते वित्त वर्ष 2015-16 के लिए 8.65 फीसद ब्याज दर तय की थी। यह ब्याज दर उससे पिछले वर्ष के ब्याज 8.8 फीसद से कम की गई थी।

तय व्यवस्था के अनुसार ब्याज दर के बारे में पहले सीबीटी ईपीएफओ की आय का आंकलन करके निर्णय करता है। इसके बाद वित्त मंत्रालय ईपीएफओ की वित्तीय स्थिति पर गौर करके ब्याज दर को अंतिम मंजूरी देता है। मंत्रालय इस पर खास ध्यान देता है कि ईपीएफओ ब्याज देने की स्थिति में है या नहीं। वित्त मंत्रालय से मंजूरी मिलने के बाद ईपीएफओ के सदस्यों के खाते में ब्याज का भुगतान कर दिया जाता है।

वित्त मंत्रालय ने वर्ष 2015-16 के लिए ब्याज दर घटाकर 8.7 फीसद कर दिया था। जबकि सीबीटी ने 8.8 फीसद ब्याज देने का फैसला किया था। वित्त मंत्रालय के इस फैसले के बाद श्रम संगठनों ने खासी नाराजगी जताई। इसके बाद सरकार को 8.8 फीसद ब्याज देने का निर्णय करना पड़ा।

दरअसल वित्त मंत्रालय ईपीएफओ से आग्रह कर रहा है कि वह पीपीएफ जैसी सरकारी बचत योजनाओं पर ब्याज घटने के अनुरूप वह भी पीएफ पर ब्याज में कटौती करे।

आमतौर पर वित्त मंत्रालय सीबीटी के फैसले के बाद ब्याज दर को मंजूरी दे देता है, क्योंकि ईपीएफओ स्वायत्त संगठन और वह अपनी आय से ब्याज का भुगतान करता है।

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