बिहार में नीतीश को घेरने के लिए लालू-शरद ने मिलकर बनायी नयी रणनीति, जानकर हो जायेंगे हैरान

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पटना : बिहार की सियासत के तीन बड़े चेहरे इन दिनों आमने-सामने नहीं हो रहे हैं, लेकिन उनकी एक दूसरे को पछाड़ने की रणनीति जारी है. इन तीन चेहरों में सबसे पहले बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का नाम आता है. उसके बाद दूसरे नंबर पर बिहार के सबसे बड़े सियासी परिवार के मुखिया लालू यादव. तीसरे चेहरे के रूप में अपने को जदयू का असली दावेदार बताने वाले राज्यसभा सांसद शरद यादव हैं. लालू यादव बिहार में नोटबंदी के एक साल पूरे होने पर उसके खिलाफ रैली करने वाले हैं. उन्होंने इसकी घोषणा कर दी है. उन्होंने मीडिया को बताया है कि वह आठ नवंबर को इसके खिलाफ पूरे बिहार में रैली करेंगे. आठ नवंबर को लालू यादव की रैली और उसके ठीक पहले तीन नवंबर को शरद यादव की बिहार के विभिन्न इलाकों में जनसंवाद यात्रा. बिहार की राजनीति को करीब से देखने वाले वरिष्ठ पत्रकार प्रमोद दत्त कहते हैं कि शरद और लालू मिलकर बिहार में अभी से ठोस जनसंपर्क अभियान की शुरुआत कर रहे हैं. लालू की रैली से ठीक पहले शरद का निकलना एक खास रणनीति का हिस्सा है.

लालू ने मीडिया को यह बताया है कि राजद नोटबंदी की विफलता के खिलाफ इसे लागू किये जाने के दिन आगामी आठ नवंबर को राज्यव्यापी रैली करेगी.उन्होंने कहा कि वह भाजपा नीत राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) से आगामी आठ नवम्बर को पूछेंगे कि 500 और 1000 रपये के नोट को जानबूझकर बंद किये जाने से आम जनता को क्या लाभ पहुंचा. लालू ने आरोप लगाया कि नोटबंदी ने छोटे कारोबारियों को भारी नुकसान पहुंचाया. लाखों लोगों को बैंक के बाहर पुराने नोट बदलने के लिए घंटों खडे रहने को मजबूर होना पडा. इस निर्णय के कारण देश की अर्थव्यवस्था चरमरा गयी है. उल्लेखनीय है कि इससे पूर्व लालू ने गत 27 अगस्त को भाजपा भगाओ, देश बचाओ नारे के साथ केंद्र सरकार और भाजपा के साथ मिलकर बिहार में राजग की नयी सरकार बनाने पर मुख्यमंत्री एवं जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार के खिलाफ पटना के गांधी मैदान में महारैली का आयोजन किया था. लालू के इस फैसले पर जदयू के नेता कहते हैं लालू के पास अब कुछ बचा नहीं है. प्रवक्ता नीरज कुमार ने कहा कि लालू के रिश्तेदारों ने यूपी चुनाव में नोटबंदी का विरोध करके परिणाम भुगत लिया है. लालू की भी वही दशा होगी.

वहीं दूसरी ओर लालू यादव के सपोर्ट में खड़े हुए, अपने को जदयू के असली दावेदार बता रहे शरद यादव 3 नवंबर से एक बार फिर बिहार में तीसरे चरण के अपने जनसंवाद यात्रा पर निकलेंगे. तीसरे चरण की अपनी यात्रा के दौरान शरद यादव 3 दिनों के अंदर पटना, बेगूसराय, खगड़िया, भागलपुर, मुंगेर और लखीसराय जिलों का दौरा करेंगे और 30 से ज्यादा जनसभाओं को संबोधित करेंगे. शरद यादव महागठबंधन टूटने के बाद से नीतीश कुमार से काफी नाराज हैं और तब से ही उन्होंने जेडीयू के खिलाफ बागी तेवर अपना लिया है. नीतीश के महागठबंधन से अलग होकर बीजेपी के साथ सरकार बनाने के फैसले को शरद यादव ने महागठबंधन को 2015 में मिले जनादेश का अपमान बताया है. शरद की तीसरे चरण की जन संवाद यात्रा के कार्यक्रम के मुताबिक 3 नवंबर को वह पटना जिले के फतुआ, बख्तियारपुर और हाथीदह में जनसभा को संबोधित करेंगे. इसी दिन बेगूसराय जिले के बरौनी, बेगूसराय, साहेबपुर कमाल में भी जनसभाएं करेंगे. 4 नवंबर को शरद यादव खगड़िया जिले के मानसी, महेशखूंट और पसराहा में सभाएं करेंगे. 5 नवंबर को शरद भागलपुर जिले के नाथ नगर, अकबरपुर और सुल्तानगंज समेत लखीसराय जिले के सूर्यगढ़ा और बड़हरिया और मुंगेर जिले के बरियारपुर और मुंगेर में जनसभा करेंगे.

लालू यादव की रैली से ठीक पहले शरद यादव के जन संवाद यात्रा को राजनीतिक हलकों में एक साथ जोड़कर देखा जा रहा है. बिहार की राजनीति में यह चर्चा जोरों पर है कि लालू के साथ शरद यादव अब खुलकर सामने आ गये हैं और लालू के साथ मिलकर केंद्र सरकार और बिहार सरकार के खिलाफ लड़ाई लड़ने को तैयार हैं. बेनामी संपत्ति का दंश झेल रहे लालू परिवार द्वारा रैली की घोषणा पर जदयू ने पलटवार करते हुए कहा है कि लालू यादव इस रैली के साथ बिहार के विभिन्न जिलों में अर्जित किये गये अपनी बेनामी संपत्ति का कागज भी लेकर लोगों को दिखाएं, ताकि लोगों को पता चले कि उनके नेता पास कहां-कहां और कितनी बेनामी संपत्ति है.

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