राष्ट्रपति जिनपिंग का आदेश, युद्ध के लिए तैयार रहे सेना

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चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने गुरुवार से अपना दूसरा कार्यकाल शुरू कर दिया। इस मौके पर उन्होंने देश की सेना को युद्ध की तैयारी करने और उन्हें जीतने पर ध्यान केंद्रित करने का आदेश दिया। शी ने यह आदेश शीर्ष सैन्य अधिकारियों के साथ बैठक में दिया।

न्यूज एजेंसी ने साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट के हवाले से जानकारी दी है कि जिनपिंग ने गुरुवार रात टॉप आर्मी अफसरों के साथ जो मीटिंग की थी, उसमें कुछ अफसर शामिल नहीं हुए। रिपोर्ट के मुताबिक, इस मीटिंग में दो टॉप जनरल, पूर्व चीफ ऑफ जनरल स्टाफ फेंग फेंगहुई और पॉलिटिकल वर्क डिपार्टमेंट के डायरेक्टर झांग येंग इस मीटिंग में शामिल नहीं हुए थे।

जिनपिंग ने मीटिंग के दौरान सेना अधिकारियों से पार्टी के लिए वफादार रहने को कहा है। साथ ही युद्ध में जंग जीतने पर फोकस करने, नियमों का पूरी तरह पालन करने और सेना को जंग के लिए तैयार रहने को कहा है।

चीन के मानवाधिकार कार्यकर्ताओं में डर का माहौल-

चीन में राष्ट्रपति शी जिनपिंग के दूसरे कार्यकाल पर जब मुहर लगी तो उन्होंने कहा कि उनके देश ने “नए दौर” में प्रवेश किया है। लेकिन उनका यह बयान मानवाधिकार कार्यकर्ताओं को रास नहीं आया है। उन्हें इस बात की आशंका है कि इस नए दौर में उन पर दमनकारी कार्रवाई और बढ़ सकती है।

वर्ष 2012 में राष्ट्रपति बनने के बाद से जिनपिंग सिविल सोसाइटी पर दबाव बढ़ाते गए। प्रदर्शनकारियों से लेकर मानवाधिकार वकीलों, शिक्षकों और ब्लॉगरों को निशाना बनाया गया। जिनपिंग ने कम्युनिस्ट पार्टी के महासम्मेलन में साफ कर दिया कि इस “नए युग” के दौरान देश के मामलों के नियंत्रण में ढील नहीं दी जाएगी। उन्होंने चीन को 2050 तक महाशक्ति बनाने की इच्छा भी जताई। सामाजिक तनाव और समस्याओं के मामले में कानून के तहत कड़ाई से निपटने का निर्देश दिया।

जिनपिंग ने हांगकांग और स्वशासित ताइवान की स्वतंत्रता का समर्थन करने वालों को आगाह भी किया। उन्होंने कहा, “हम किसी को भी अपने किसी भी हिस्से को चीन से अलग करने की अनुमति नहीं देंगे।”

ज्ञात हो कि सरकार ने हाल के वर्षों में राष्ट्रीय सुरक्षा के नाम पर इंटरनेट नियंत्रण के लिए कई कानून बनाए और कई तरह के उपाय किए। हांगकांग में कई लोकतंत्र समर्थकों को गिरफ्तार किया गया।

ओवरसीज चाइनीज ह्यूमन राइट्स डिफेंडर्स ग्रुप के शोधकर्ता फ्रांसिस इवा ने कहा, “जिनपिंग द्वारा स्वीकृत किए गए राष्ट्रीय सुरक्षा के कानूनों के दम पर पुलिस सरकारी नीतियों की आलोचना करने वालों पर कार्रवाई कर सकती है। कड़ी कार्रवाई, गिरफ्तारियां, लोगों की निगरानी और सेंसरशिप के मामले बढ़ सकते हैं।”

2015 में दो सौ से ज्यादा गिरफ्तार-

साल 2015 में पुलिस कार्रवाई में दो सौ से ज्यादा चीनी मानवाधिकार वकीलों और प्रदर्शनकारियों को पकड़ा गया या पूछताछ की गई।

नोबेल विजेता पर नरमी नहीं-

चीनी अधिकारियों ने लोकतंत्र समर्थक और नोबेल पुरस्कार विजेता ली शाओबो को रिहा करने के अंतरराष्ट्रीय समुदाय के आग्रह को नजरअंदाज कर दिया था। कैंसर के चलते उनकी इस साल जुलाई में मौत हो गई। वह साल 2009 से जेल में बंद थे।

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