विशेषज्ञों की कमी दूर करने के लिए MBBS के बाद डिप्लोमा कोर्स को मंजूरी

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देश में विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी को दूर करने के लिए केंद्र सरकार ने फिजिशियन और सर्जन्स के डिप्लोमा पाठ्यक्रमों को मान्यता दे दी है। अभी तक इन पाठ्यक्रमों को केवल महाराष्ट्र और गुजरात में ही मान्यता थी।

अब ये डिप्लोमा धारक विशेषज्ञ डॉक्टर के रूप में पूरे देश में प्रैक्टिस कर सकेंगे।

पिछले हफ्ते स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार मेडिकल कांउसिल ऑफ इंडिया से हरी झंडी मिलने के बाद मेडिकल कांउसिल एक्ट में संशोधन का फैसला लिया गया।

संशोधन से मुंबई स्थित कॉलेज ऑफ फिजिशियन एंड सर्जन्स से 2009 के बाद 13 पाठ्यक्रमों में डिप्लोमा हासिल करने वाले विशेषज्ञ पूरे देश में प्रैक्टिस कर सकेंगे। दो साल का यह डिप्लोमा कोर्स एमबीबीएस करने वाले डॉक्टरों के लिए है।

इससे एमबीबीएस और पोस्ट ग्रेजुएट के बीच विशेषज्ञ डॉक्टरों की एक नई कड़ी तैयार होगी, जो विभिन्न रोगों का सही तरीके से उपचार कर सकेंगे। देश में हर साल 63835 एमबीबीएस डॉक्टर निकलते हैं, वहीं 25000 से भी कम हैं पोस्ट ग्रेजुएट की सीटें

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