जिनपिंग ने विवाद को दी हवा, तिब्बती चरवाहों को कहा बार्डर के पास घर बनाओ

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चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने लगातार दूसरी बार राष्ट्रपति पद की कुर्सी संभालते ही फिर से सीमा विवाद को हवा देनी शुरू कर दी है।

जिनपिंग ने अरुणाचल प्रदेश की सीमा से सटे तिब्बती इलाके के चरवाहों को चीनी राष्ट्रभक्ति का पाठ पढ़ाया है। राष्ट्रपति ने ऐसा करते हुए चरवाहों को इस बात के लिए उकसाया कि वे अरुणाचल की सीमा के पास अपना बोरिया-बिस्तर डाल दें ताकि चीनी क्षेत्र की रक्षा हो सके।

जिनपिंग ने कहा, ‘क्षेत्र में शांति के बिना करोड़ों लोगों का जीवन भी शांतिपूर्ण नहीं हो सकता।’ वह चीन के दक्षिण पश्चिम में तिब्बती स्वायत्त क्षेत्र के चरवाहों के परिवार से बात कर रहे थे।

चीनी राष्ट्रपति ने अपनी बातों को विकास की चाशनी में लपेटकर पेश किया। उनका कहना था कि चरवाहे सीमाई इलाके में रहना शुरू करें और अपने गृहक्षेत्र को विकसित करें।

वे सीमा इलाके में ‘गैलसांग’ (चीनी फूल) की तरह खिल जाएं। चिनफिंग ने चरवाहों को अब तक चीन के प्रति वफादार रहने पर उनकी पीठ भी थपथपाई।

जिनपिंग ने उम्मीद जताई कि अरुणाचल सीमा के पास ज्यादा से ज्यादा चरवाहे अपना घर बनाएंगे। यहां जो फिलहाल रह रहे हैं, वे दूसरे चरवाहों को भी इस इलाके में रहने के लिए प्रेरित करेंगे।

ज्ञात हो कि अरुणाचल प्रदेश के बड़े हिस्से को चीन दक्षिण तिब्बत का हिस्सा मानता रहा है। हाल ही में सिक्किम क्षेत्र के डोकलाम में 73 दिनों तक आमने-सामने रहने के बाद भारत और चीन की सेनाएं पीछे हटी थी।

चीन के विदेश मंत्री वांग यी दिसंबर महीने में भारत के दौरे पर आएंगे। वह भारत, रूस और चीन के विदेश मंत्रियों की होने वाले वार्ता में शिरकत करेंगे।

उनकी भारतीय विदेश मंत्री सुषमा स्वराज से द्विपक्षीय बातचीत भी होगी। हालांकि अभी चीनी विदेश मंत्री के भारत जाने की तिथि तय नहीं हुई है।

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