नवाज़ुद्दीन ने मांगी माफ़ी, पूर्व प्रेमिका ने कहा झूठा

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बॉलीवुड अभिनेता नवाज़ुद्दीन सिद्दीकी ने सोमवार को अपनी जीवनी ‘ऐन ऑर्डेनरी लाइफ’ को लेकर माफ़ी मांगी है. इस किताब में जिन महिलाओं का ज़िक्र है उसे लेकर नवाज़ुद्दीन ने माफ़ी मांगी है.

नवाज़ुद्दीन ने अपने ट्वीट में कहा है कि वो भावनाओं को आहत करने के माफ़ी मांग रहे हैं.

नावज़ुद्दीन सिद्दीकी ने बिना सहमति के अपनी किताब में उन महिलाओं के नाम शामिल करने के लिए माफ़ी मांगी है. उनकी जीवनी को लेकर विवाद बढ़ा तो उन्होंने ट्विटर पर आकर माफ़ी मांगनी पड़ी.

नवाज़ुद्दीन की इस किताब की सह-लेखिका रितुपर्णा चटर्जी हैं. इस किताब में नवाज़ुद्दीन ने पूर्व मिस इंडिया निहारिका सिंह और अभिनेत्री सुनिता रजवार से रिलेशनशिप और प्रेम प्रसंगों का विस्तार से ज़िक्र किया है.

अपने ख़ास अभिनय से पहचान बनाने वाले नवाज़ुद्दीन की इस किताब के लिए कड़ी आलोचना हो रही थी. नवाज़ुद्दीन ने अपनी जीवनी में मिस लवली में काम कर चुकीं निहारिका सिंह से प्रेम प्रसंगों का विस्तार से ज़िक्र किया था.

किताब के उद्धरणों की चर्चा गर्म थी. इसे लेकर 23 अक्टूबर को निहारिका सिंह ने एक बयान जारी किया था. अपने बयान में उन्होंने कहा था कि नवाज़ुद्दीन ने अपनी किताब बेचने के लिए एक महिला का इस्तेमाल और अनादर किया है. .

सुनीता ने फ़ेसबुक पोस्ट के ज़रिए कहा है कि नवाज़ुद्दीन झूठ फैला रहे हैं. सुनिता का कहना है कि उन्होंने नवाज़ुद्दीन को ओछी सोच के कारण छोड़ा था. रजवार ने लिखा है, ‘मैंने तुम्हें छोटी औक़ात के कारण नहीं बल्कि छोटी सोच के कारण छोड़ा था.

कहते हैं नसीब वक्त बदल सकता है, इंसान की फ़ितरत नहीं. नवाज़ की किताब पढ़कर कुछ ऐसा ही लगा और यकायक ‘मेलाराम वफ़ा’ का एक शेर याद आ गया, “एक बार उसने मुझको देखा था मुस्कुराकर, इतनी सी हक़ीक़त है बाक़ी कहानियां हैं.” इस बायोग्राफी में सच्चाई नहीं है. कई बातें नवाज़ ने अपने मन से, अपने हिसाब से और अपने हक़ में लिखी हैं. चित भी मेरी पट भी मेरी टाइप्स.

उन्होने बड़ी ही ख़ूबसूरती से खुद को बुरा भी कह दिया है और उतनी ही ख़ूबसूरती से अपनी बुराई का सारा ठीकरा औरतों पर भी फोड़ दिया है. ख़ासकर मुझपे, क्योंकि उनकी माने तो मेरे बाद उनका प्यार से और औरतों से विश्वास ही उठ गया था और उनके सारे इमोशन्स RIP यानी रेस्ट इन पीस हो गए थे.’

बहरहाल, उनकी बायोग्राफी में जहां तक मेरा सवाल है तो उनके झूठ का फ़लसफ़ा वहीं से शुरू हो जाता है जहां से मेरा ज़िक्र, यानी शुरुआत की पहली दो लाइन से ही, जहां नवाज़ कह रहे हैं कि वो मुझे एनएसडी में कभी नही मिले.

एनएसडी में वो मेरे एक साल सीनियर थे तो ज़ाहिर है मुलाक़ात तो होती होगी. हां, उस वक़्त हमारे बीच कुछ था नहीं, लेकिन ये कहना कि कभी मिले ही नहीं, ये अटपटा सा ज़रूर लगता है.

फिर उन्होंने कहा कि मैं उनके घर की दीवारों में आर्ट-वर्क करती थी, नाम उकेरा करती थी, दिल बनाया करती थी, जिनके बीच से होकर कभी-कभी तीर भी गुज़रा करता था. ये पढ़ कर ऐसा लगा मानो मैं उनसे मिलने नही बल्कि उनकी आर्ट्स एंड क्राफ्ट्स की क्लास लेने जाया करती थी.

हद तो तब हो गई जब उन्होंने रोमांटिक बॉलीवुड मूवी स्टाइल में लिख दिया कि हमारे ब्रेक-अप के बाद उन्होंने वाइट पेंट की बाल्टी ली और ब्रश से मेरे आर्ट-वर्क को दीवार से और मुझे दिल से मिटाते गए.

अब सवाल ये उठता है कि जब मैंने कभी कोई आर्ट-वर्क बनाया ही नही था तो वो किसके आर्ट वर्क को मिटाने की बात कर रहे हैं?

चलो इन छोटी-छोटी बातों को नज़र अंदाज़ भी किया जा सकता है, लेकिन असली खेल तो उन्होने वहां खेला जहां हमारे ब्रेक-अप की बात आई. नवाज़ हमेशा से सहानुभूति बटोरने वाले रहे हैं. वो कोई ऐसी चीज़ नही छोड़ते जहां से सहानुभूति बटोरी जा सकती हो.

कभी अपने रंग-रूप को लेकर, कभी ग़रीबी को लेकर, कभी ये कहकर की वो वॉचमैन की नौकरी कर चुके हैं, जब की सच तो ये है कि उस वक़्त उनका फैमली बैकग्राउंड मेरी फैमली से अच्छा था. एक कामयाब आदमी को इतना असुरक्षित देखकर कामयाबी से डर सा लगने लगता है.

ख़ैर, नवाज़ का कहना है कि वो ग़रीब थे और स्ट्रगलर थे, इसलिए मैंने उन्हें छोड़ दिया. तो नवाज़ मैं क्या थी? तुम से ग़रीब तो मैं थी, तुम तो कम से कम अपने घर में रह रहे थे. मैं तो दोस्त के घर में रह कर स्ट्रगल कर रही थी.

ये सिर्फ़ तुम अच्छी तरह जानते हो कि हमारा रिश्ता एक प्ले से शुरू होकर उस प्ले के मात्र तीन शो से पहले ख़त्म हो चुका था, क्योंकि तुम्हारी सच्चाई मेरे सामने आ चुकी थी.

मैंने तुम्हारा फोन लेना छोड़ दिया था, क्योंकि घिन आती थी तुम्हारे बारे में सोच कर, बात क्या करती तुमसे. मैंने ये कभी नही कहा कि तुम अपने करियर पे फोकस करो और मैं अपने.

अब जब तुम सब हदें पार कर ही चुके हो तो ये भी जान लो कि मैंने तुम्हें क्यों छोड़ा था. मैंने तुम्हें इसलिए छोड़ा था, क्योंकि तुम हमारे संबंध का मज़ाक बनाते हुए सब व्यक्तिगत बातें हमारे कॉमन फ्रेंड्स के साथ शेयर किया करते थे.

दूसरा बड़ा झूठ जिसने मुझे ये पोस्ट लिखने के लिए मजबूर किया वो ये कि तुम्हारे सफल होने पर मैंने लोगों को ये बताना शुरू कर दिया कि कभी तुम्हारे और मेरे गहरे संबंध थे. ना मैंने तब किसी को कुछ बोला था और ना आज तक किसी को कुछ बताया.

फिर इतना बड़ा झूठ क्यों नवाज़, अगर बहुत सच्चे बनते हो तो उन लोंगो का नाम भी छाप देते अपनी बायोग्राफी में जिनके साथ मैं तुम्हारे हिसाब से तुम्हारे सफल होने के बाद हमारे संबंधों का बखान किया करती थी.

तुमने लिखा है कि मैं तुम्हारा पहला प्यार थी, सूखे में पहली बारिश की तरह, अगर ये पहला प्यार था तो भगवान करे किसी को ऐसा पहला प्यार ना मिले. आज नाम है तुम्हारा, अच्छा काम कर रहे हो, इसलिए तब तो नही कहा था पर अब ज़रूर कहूंगी कि अपने करियर पर फोकस करो.

मैंने तुम्हें तुम्हारी ग़रीबी की वजह से नही तुम्हारी ग़रीब सोच की वजह से छोड़ा था. तुमने अपनी बायोग्राफी से साबित कर दिया कि मैं जिस नवाज़ को जानती थी तुम आज उससे ज्यादा ग़रीब हो. ना तुम्हे तब औरतों की इज़्ज़त करनी आती थी और ना ही अब सीख पाए हो.

तुम्हारे हालात पर बस इतना ही कहूंगी, “जा, तू शिकायत के क़ाबिल होकर आ, अभी तो मेरी हर शिकायत से तेरा क़द बहुत छोटा है.

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