‘पद्मावती’ पर गुजरात बीजेपी की मांग- ‘रिलीज टले या बैन हो फिल्म’

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भारत निर्वाचन आयोग और गुजरात मुख्य निर्वाचन आयुक्त को पत्र लिखते हुए पार्टी ने राजपूत प्रतिनिधियों को रिलीज से पहले से फिल्म दिखाने की व्यवस्था करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि इससे उनका पारा नीचे जाएगा और चुनावों से पहले किसी तरह की तनावपूर्ण स्थिति से भी बचा जा सकेगा।

बीजेपी प्रवक्ता और राजपूत नेता आई के जडेजा ने कहा कि बीजेपी चाहती है कि या तो पद्मावती चुनाव के बाद गुजरात में रिलीज की जाए या उसे बैन ही कर दिया जाए। जडेजा ने कहा, ‘क्षत्रिय, राजपूत प्रतिनिधियों ने हमसे मिलकर फिल्म में किसी तरह से इतिहास और रानी पद्मावती के चरित्र के साथ छेड़छाड़ किए जाने का विरोध किया है। इतिहास के हिसाब से रानी पद्मावती कभी अलाउद्दीन खिलजी से नहीं मिली थीं।’ उन्होंने कहा कि गुजरात में चुनाव होने वाले हैं। ऐसे में फिल्म में तथ्यों के साथ किसी तरह की छेड़छाड़ नहीं की होनी चाहिए जिससे राजपूत-क्षत्रिय समुदाय की भावनाएं आहत हों।

फिल्म दिसंबर की शुरुआत में रिलीज होने वाली है जबकि चुनाव 9 से 14 दिसंबर के बीच कराए जाएंगे।

जडेजा ने कहा कि समुदाय के नेता केंद्र सरकार, निर्वाचन आयोग और फिल्म सेंसर बोर्ड से मिलकर कथित रूप से तथ्यों को तोड़-मरोड़कर पद्मावती को खिलजी से गलत तरीके से जोड़ने वाली फिल्म को बैन करने की मांग करेंगे।

गुजरात के मल्टीप्लेक्स मालिकों की असोसिएशन को लगभग 10 दिन पहले श्री राष्ट्रीय राजपूत कर्णी सेना की ओर से एक पत्र मिला था। उसमें लिखा था, ‘संजय लीला भंसाली द्वारा निर्देशित फिल्म पद्मावती में हिंदू और राजपूत समुदायों के इतिहास के साथ छेड़छाड़ की गई है। अगर गुजरात में फिल्म रिलीज की गई तो कड़ा विरोध किया जाएगा। इससे संपत्ति को नुकसान पहुंच सकता है।’

असोसिएशन के अध्यक्ष मनुभाई पटेल ने कहा कि अभी फिल्म की रिलीज में एक महीना बाकी है और आमतौर पर ऐसे विवाद सुलझा लिए जाते हैं। हालांकि, चुनावों के समय में इस विवाद के होने से क्या असर पड़ेगा, इस पर उन्हें भी संशय है।

पिछले हफ्ते वाघेला ने चेतावनी दी थी कि अगर फिल्म गुजरात में बिना प्री-स्क्रीनिंग के रिलीज की गई तो राज्य में हिंसक प्रदर्शन होंगे । उन्होंने कानून व्यवस्था के हाथ से बाहर जाने की धमकी भी दी थी।

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