आशीष नेहरा को युवराज सिंह का इमोशनल सलाम, सोशल मीडिया पर किए कई खुलासे

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आशीष नेहरा से जुड़ी एक और रोचक कहानी सामने आई है। इससे पर्दा युवराज ने हटाया है। दिग्गज ऑलराउंडर ने सोशल मीडिया पर एक लंबा-चौड़ा पोस्ट शेयर करते हुए बेस्ट फ्रेंड नेहरा के बारे में कई खुलासे किए। उन्होंने यह भी बताया कि पूर्व भारतीय कप्तान सौरभ गांगुली इस तेज गेंदबाज को क्यों पोपट कहकर बुलाते थे।

18 साल बाद क्रिकेट को अलविदा कहने वाले नेहरा के लिए युवी ने लिखा: आशीष नेहरा- मैं अपने दोस्त आशू के बारे में जो पहली चीज कहना चाहता हूं वह यह कि वह बहुत ईमानदार हैं। वे दिल के साफ इंसान हैं। शायद कोई धार्मिक किताब ही उनसे ज्यादा ईमानदार होगी। मैं जानता हूं कि कई लोग यह पढ़कर हैरान हो जाएंगे। मेरे लिए वे हमेशा से आशू या नेहरा जी रहे। साफ दिल का फनी इंसान।

पहली बार ऐसे मिले नेहरा-युवी
युवी ने नेहरा से अपनी पहली मुलाकात के बारे में लिखा- जब मैं पहली बार नेहरा से तब मिला, जब हम अंडर-19 के लिए खेला करते थे। वे हरभजन सिंह के साथ रूम शेयर कर रहे थे। मैं भज्जी से मिलने उनके कमरे में गया और एक लंबे, पतले लड़के को देखा, जो बिना हिले-डुले खड़ा नहीं रह पा रहा था। वे ऐसी बिल्ली की तरह थे, जिसे बेहद गर्म छत पर छोड़ दिया गया हो। वे थोड़ी देर चुपचाप बैठेंगे। दूसरे ही पल कुछ करने लगेंगे। नेहरा को पहली बार मुझे देखकर बहुत हंसी आई। ऐसा लगा जैसे किसी ने उनकी मतलून में चीटियां छोड़ दी हैं। बाद में जाना कि आशू ऐसे ही हैं।

गागंली क्यों कहते हैं नेहरा को पोपट?
वे आगे लिखते हैं- सौरभ गांगुली ने आशु को नाम दिया ‘पोपट’ क्योंकि वह बहुत ज्यादा बोला करते थे। वह पानी के अंदर भी बोल सकते थे और मजाकिया भी खूब थे। मेरे लिए उन्हें कुछ बोलने की जरूरत नहीं थी। उनकी शारीरिक भाव-भंगिमाएं ही हंसाने के लिए काफी थीं। अगर आप नेहरा के साथ हैं तो आपका दिन खराब नहीं जा सकता। वह बंदा आपको हंसा-हंसा करके गिरा देगा। मैंने यह बात आशू से कभी नहीं कही कि मुझे उनसे ही प्रेरणा मिली।

… तो मैं भी खेल सकता हूं
चोट के बारे में चर्चा करते हुए युवी ने लिखा- मैंने देखा कि अगर आशू 38 की उम्र में कई इंजरी और सर्जरी के बाद भी बोलिंग कर सकते हैं तो मैं भी 36 की उम्र में खेल सकता हूं। आशू की 11 सर्जरी हुईं, लेकिन कुछ कर दिखाने की चाह ने उन्हें खेल में बनाए रखा। 2003 वर्ल्ड कप के दौरान उनकी एड़ी चोटिल हो गई थी। इंग्लैंड के खिलाफ खेलना नामुमकिन था। नेहरा जी की जिद थी कि वे खेलेंगे।अगले 72 घंटे में उन्होंने 30-40 बार बर्फ से सिकाई की, टैपिंग कराई, दवा खाई और चमत्कारिक रूप से खेलने के लिए तैयार हो गए। बाहर की दुनिया को लगा कि उन्हें फर्क नहीं पड़ता, लेकिन हमें पता था कि उनके लिए इसके क्या मायने थे। उन्होंने 23 रन देकर छह विकेट लिए और भारत जीत गया।

बल्लेबाज होता तो 45 साल तक खेलता
उन्होंने वर्ल्ड कप-2011 के पाकिस्तान के खिलाफ मुकाबले का भी जिक्रा किया। युवी ने लिखा-आशू ने 2011 वर्ल्ड कप के दौरान सेमीफाइनल में पाकिस्तान के खिलाफ शानदार स्पेल डाला। पर चोटिल हो गए। फाइनल नहीं खेल पाए। इसके बावजूद वे हंसते रहते और सब की मदद के लिए तैयार रहते थे। नेहरा के दो बच्चे हैं। बेटा आरुष और बेटी अराएना। आरुष बोलिंग करता है। आशू अपनी बैटिंग के बारे में कभी गंभीर नहीं थे। जब वे अपनी बैटिंग को लेजेंड्री कहते तो मैं हंसी नहीं रोक पाता था। नेहरा जी यह भी कहते हैं कि अगर वे बल्लेबाज होते तो 45 की उम्र तक खेलते। लेकिन यह उनका आखिरी मैच था। मैं क्रिकेट का आभारी हूं जिसने मुझे एक सच्चा दोस्त दिया, जिसे मैं हमेशा प्यार करूंगा।

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