नीतीश कुमार ने निजी क्षेत्रों में आरक्षण पर राष्ट्रीय स्तर पर बहस की उठायी मांग, भाजपा सांसद का मिला समर्थन

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मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने लोकसंवाद कार्यक्रम के बाद प्रेस कॉन्फ्रेन्स कर बिहार के मुख्‍यमंत्री नीतीश कुमार ने निजी क्षेत्रों में भी आरक्षण दिये जाने की वकालत की. उन्‍होंने कहा कि मेरी राय है कि निजी क्षेत्र में भी आरक्षण होना चाहिए. साथ ही राष्ट्रीय स्तर पर बहस किये जाने की बात उठायी. नीतीश कुमार के फैसले का भाजपा सांसद हुकूमदेव नारायण ने भी समर्थन किया है. उन्‍होंने कहा कि ‘हां, यह एक सही फैसला है. इस मुद्दे पर राष्‍ट्रीय स्‍तर पर बहस होनी चाहिए.’ साथ ही कहा कि ‘निजी क्षेत्रों में आरक्षण दिये जाने का मुद्दा उठाने के लिए मैं नीतीश कुमार को बधाई देना चाहता हूं.’

राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद और उनके बेटे तेजस्वी यादव के लगाये आरोपों पर बिना नाम लिये सोमवार को जमकर निशाना साधा. लालू प्रसाद यादव का नाम लिये बिना उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि ‘लोग राजगीर में मेरी समाधि बनवा रहे हैं. मुझे तो खुशी होगी कि मेरी समाधि राजगीर में बने. इससे अच्छी और क्या बात हो सकती है.’ साथ ही कहा कि ‘जो लोग सत्ता से दूर हो गये हैं, उनकी नाराजगी अब झलकने लगी है. बालू माफिया प्रदेश में हावी हो रहे थे. दूसरे गलत काम भी हो रहे थे, इस वजह से मैं महागठबंधन से अलग हुआ. पिछले 40 वर्षों में मुझे जितनी प्रसिद्धि मिली, उससे ज्यादा प्रसिद्धि तो पिछले चार वर्षों में मुझे मिल गयी. पिछले चार वर्षों में मैंने जो भी निर्णय लिये, वह सभी फैसले बिहार के हित में थे. अभी जिसके साथ गठबंधन में हमारी सरकार है, यह वही है, जो चार साल पहले थी.

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने आउट सोर्सिंग के जरिये बिहार सरकार की नौकरियों में आरक्षण प्रणाली को सही ठहराया. उन्होंने कहा कि आउट सोर्सिंग के जरिये नौकरी पानेवालों को जो मानदेय-वेतन दिया जाता है, उसके लिए बिहार सरकार भुगतान करती है. जब बिहार सरकार के खजाने और प्राप्त राजस्व के पैसे से भुगतान किया जा रहा हो, तो आरक्षण क्यों नहीं लागू किया जाना चाहिए. आउट सोर्सिंग की नौकरियों में आरक्षण बिल्कुल सही है. इसका पालन नहीं करनेवालों पर कड़ी कार्रवाई भी की जायेगी.

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सूबे में सेल्फी से उभरे राजनीतिक विवाद को बेहद दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि मुझे ऐसी बातों से बेहद पीड़ा होती है. मैं इन घटिया चीजों पर कोई बयान नहीं देता. लोगों की जुबान ही खराब हो गयी है. अब गंदी-गंदी बातें करने लगे हैँ. हम बिहार के विकास के लिए प्रतिबद्ध हैं. अपना काम करते रहेंगे. न तो मैंने किसी के बारे में कुछ गलत कहा है और न कहूंगा. मैंने अपने पार्टी प्रवक्ताओं को भी बोल दिया है कि कोई मुझ पर निजी हमला करे, तो भी कोई जवाब न दें. सत्ता हाथ से जाने के कारण कुछ लोग ऐसी बयानबाजी कर रहे हैं. मुझे ऐसे घटिया बयानबाजी पर कोई जवाब नहीं देना है.

मुख्यमंत्री ने कहा कि जिन लोगों ने शराबबंदी के समय मेरा साथ दिया था, मानव शृंखला बनाये जाने के समय हाथ से हाथ मिला कर खड़े थे, वही आज अनाप-शनाप बयानबाजी कर रहे हैं. पहले शराबबंदी की वकालत की थी, अब सत्ता से बाहर होते ही शराबबंदी उन्हें गलत लगने लगी. शराबबंदी के धंधेबाजों को मदद करनेवाले नहीं छोड़े जायेंगे. साथ ही शराब की खरीद-बिक्री करने-करानेवाले पुलिसकर्मियों पर भी कार्रवाई की जा रही है. अगर समाज में कुछ अच्छा होता है, तो उसकी तारीफ की जानी चाहिए. जिसके लिए हम तारीफ के पात्र हैं, उसी पर हमको गाली खानी पड़ रही है. शराबबंदी के खिलाफ जानेवालों की जानकारी मिलने पर किसी को नहीं छोड़ेंगे.

लालू प्रसाद पर निशाना साधते हुए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि हमने कभी किसी घोटाले-मामले पर पर्दा नहीं डाला. वे भ्रष्टाचार के पुरोधा है, इसके बावजूद कुछ भी बोल रहे हैं. सृजन घोटाले को किसने उजागर किया? मैंने उजागर किया. आज तक जितने भी घोटाले सामने आये, मैंने कार्रवाई की. रफा-दफा करने की कोशिश नहीं की. मालूम हो कि रविवार को लालू प्रसाद ने ट्वीट कर सृजन घोटाला, शौचालय घोटाला और महादलित मिशन विकास घोटाला का जिक्र करते हुए लिखा था कि जदयू और भाजपा गठबंधन के 100 दिन पूरे होने पर तीन बड़े घोटाले सामने आये हैं.

मुख्यमंत्री ने कहा कि जब हम केंद्र के सत्ता पक्ष के साथ नहीं थे, तब भी हमने नोटबंदी का समर्थन किया था. केंद्र में कोई सरकार रहे, हमलोग बिहार सरकार हैं. हमने हमेशा जीएसटी का पक्ष लिया. हम आज भी जीएसटी के पक्ष में हैं. जीएसटी का विरोध करनेवालों से पूछना चाहिए कि जीएसटी किसने लाया, इसका प्रस्ताव कौन लाया. आज कालाधन पर चोट हो रहा है, तो कुछ लोग परेशान हो रहे हैं. उनकी अर्जित संपत्तियां जो उजागर हो रही हैं. अभी न जाने और कितने लोग इसकी जद में आयेंगे.

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