नोटबंदी का 1 साल : प्रॉपर्टी और सोना-चांदी की खरीद-फरोख्त में 35%की कमी

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नोटबंदी पर एक साल पूरा हो गया है। ठीक एक साल पहले और आज के जीवन में आए बदलावों ने काफी कुछ बदल दिया है। हमें भी। राजस्थान में पिछले साल की तुलना में नेट बैंकिंग प्रतिमाह 165 प्रतिशत बढ़ी है। नोटबंदी से पहले 1 लाख 73 हजार 49 प्रतिमाह नेट बैंकिंग के ट्रांजेक्शन हुए जो अक्टूबर माह में चार लाख 58 हजार 800 तक बढ़े है। वहीं प्रदेश में ऑनलाइन ट्रांजेक्शन दो गुना से अधिक बढ़े हैं। नवंबर 2015 से अक्टूबर 2016 तक प्रदेश में करीब दो हजार करोड़ के ऑनलाइन ट्रांजेक्शन हुए थे लेकिन नोटबंदी के बाद नवंबर 2016 से अक्टूबर 2017 के बीच ये 4 हजार 400 सौ 53 करोड़ के ऑनलाइन ट्रांजेक्शन हुए। यूपीआई से भुगतान में प्रदेश में आठ गुना अधिक वृद्धि दर्ज की गई है।
नोटबंदी के दौरान पुराने नोटो से लेन-देन पर 60 छापे व सर्वे, सैकडों को नोटिस
पुराने नोटों से ज्वैलरी खरीदने, पुराने नोटों से कर्मचारियों को एडवांस में तनख्वाह देने, वाहनों की खरीद करने, या पुुराने नोटो को नए नोटों को तब्दील कराने वाले केसों में आयकर विभाग ने 70 से ज्यादा कार्रवाईयां की। जयपुर सहित राजस्थान में सैकड़ों की संख्या में नोटिस दिए गए है। इस केस में साेने आभूषण के निर्माता निशाने पर रहे हैं। इसके अलावा प्रॉपर्टी खरीद से जुड़े केस भी इसमें शामिल है।
हालांकि नोटबंदी के बाद राजस्थान में आयकर विभाग का रेवेन्यू पिछले वर्षों की तुलना में 15 प्रतिशत से अधि क बढ़ा है।

प्रदेश में एक साल में 40 प्रतिशत तक घट गया है ट्रेड एंड इंडस्ट्री का कारोबार
– एक साल में प्रदेश के व्यापार और उद्योग जगत पर क्या असर रहा जब यह जानने के लिए विशेषज्ञों से बात की गई तो उनकी राय थी कि इस दौरान कारोबार 40 फीसदी तक घट गया। उनका कहना था कि जिस देश में ज्यादातर लेन-देन नकद होता रहा हो वहां नाेटबंदी करना यानी देश की गति को थाम लेने जैसा कदम था। यही हुआ भी, जब तीन माह तक सभी कारोबारी गतिविधियां लगभग ठप-सी रहीं।
– राजस्थान खाद्य पदार्थ व्यापार संघ के अध्यक्ष बाबूलाल गुप्ता के अनुसार सरकार के इस फैसले से देश की आर्थिक प्रणाली में 86 फीसदी मुद्रा चलन से बाहर हो गई जिससे आर्थिक और कारोबारी गतिविधियां काफी प्रभावित हुईं। नोटबंदी ने वास्तव में ग्रामीण अर्थव्यवस्था की कमर तोड़ दी। आर्थिक गतिविधियों में नरमी और घरेलू वस्तुओं की मांग में जबरदस्त गिरावट से कीमतों को भी झटका लगा।
– दालें, प्याज, सब्जियां और तिलहन के खुदरा और थोक मूल्य उनके न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से भी नीचे आ गए। नोटबंदी के कारण ग्रामीण क्षेत्र को अच्छे मानसून का फायदा नहीं मिल सका। कृषि क्षेत्र को सबसे अधिक झटका लगा और उसका प्रभाव गैर-कृषि असंगठित क्षेत्र पर भी पड़ा जिससे संगठित क्षेत्र प्रभावित हुआ।
एक साल में सांस लेने लायक होगा बाजार
ट्रेडर्स और प्रदेश में राेजगार के मुख्य अाधार रहे सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योग यानी एमएसएमई पर तो जबर्दस्त गाज गिरी। 40से 45 फीसदी लेबर जॉब लेस हो गई। जब प्रॉडक्शन ही नहीं रहा तो रोजगार कहां से आते? अब भी अगले एक साल में ट्रेड और इंडस्ट्री सेक्टर सांस लेने लायक होने की उम्मीद है।
सोने-चांदी का कारोबार 35% तक घटा
जयपुर सर्राफा ट्रेडर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष कैलाश मित्तल के अनुसार नोटबंदी से प्रदेश का सोने-चांदी का कारोबार 30 से 35 फीसदी तक घट गया। मििडल क्लास पर मार से ओवरआॅल ट्रेड 40 फीसदी तक नीचे आ गया नोटबंदी के बाद शुरुआती महीनों में कारोबार तकरीबन 75 फीसदी गिर गया था।
जीएसटी ने नाेटबंदी के घाव हरे कर दिए
फोर्टी के अध्यक्ष सुरेश अग्रवाल के अनुसार नोटबंदी के पहले तीन माह ट्रेड और इंडस्ट्री के लिए काफी खराब रहे। पटरी पर हालात लौटे ही थे कि जीएसटी लागू हो गया जिससे नोटबंदी के घाव फिर हरे हो गए। नोटबंदी ने प्रॉपर्टी सेगमेंट पर अधिक असर डाला। यह कारोबार एक साल बाद भी संभला नहीं है।
छूट मिली तो 10 गुना बढ़ा स्वैपिंग ट्रांजेक्शन, लेकिन अब घट गया
बैंकों द्वारा एमडीआर चार्ज वृद्धि से राजस्थान के ईमित्रों पर एटीएम की पोस मशीनों पर स्वैपिंग की संख्या घटी है । हालांकि नोटबंदी के तुरंत बाद दिसंबर से फरवरी तक एमडीआर चार्जेज से ग्राहकों को छूट दी गई थी ताे इस तरह के लेनदेन में 10 गुना वृद्धि दर्ज की गई थी। प्रदेश में राज्य सरकार ने एक हजार ई मित्रों पर लेनदेन के लिए ऐसी मशीनें स्वैप के लिए दे रखी है लेकिन बैंक के एमडीआर चार्जेज के कारण ग्राहक इस सुविधा का फायदा नहीं उठाते है।

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