नोटबंदी के बाद बैंकों के पास कैश बढ़ा

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नोटबंदी के बाद बैंकों में बड़े पैमाने पर कैश जमा कराया गया था जिसका बड़ा हिस्सा साल भर बाद भी बैंकिंग सेक्टर में बना हुआ है। इससे बैंकों की डिपॉजिट कॉस्ट में कमी आई है और उनका करेंट एंड सेविंग रेशियो (कासा) बेहतर हुआ है। आरबीआई के मॉनेटरी पॉलिसी डिपार्टमेंट ऑफ स्टेटिस्टिक्स एंड इंफॉर्मेशन मैनेजमेंट के डायरेक्टर भूपल सिंह और इंद्रजीत रॉय की स्टडी के मुताबिक, नोटबंदी से बैंकिंग सिस्टम में 2.8-4.3 लाख करोड़ रुपये का अतिरिक्त डिपॉजिट आया था। यह स्टडी आरबीआई की वेबसाइट पर पब्लिश की गई है।

आरबीआई की स्टडी के मुताबिक, ’11 नवंबर से 30 दिसंबर 2016 यानी नोटबंदी के दौरान एक्सेस डिपॉजिट ग्रोथ 4-4.7 पर्सेंट के बीच रही। इसमें मध्य फरवरी 2017 तक का समय मिला दिया जाए तो एक्सेस डिपॉजिट ग्रोथ 3.3-4.2 पर्सेंट रही। वहीं, मार्च 2017 तक यह डेटा 3-3.8 पर्सेंट था।’ इस बारे में इंडिया रेटिंग्स एंड रिसर्च के सीनियर एनालिस्ट उदित कारीवाला ने बताया कि फिक्स्ड डिपॉजिट या कासा के तौर पर जमा 55-60 पर्सेंट एक्सेस डिपॉजिट बैंकों के पास बना हुआ है।

कारीवाला ने कहा, ‘हर बैंक को एक्सेस डिपॉजिट से फायदा हुआ है। सरकारी बैंकों को बॉन्ड के दाम बढ़ने से मार्क टु मार्केट गेन हुआ, तो प्राइवेट बैंकों को डिपॉजिट बढ़ाने में मदद मिली। इससे उनका कासा बढ़ा और फंडिंग कॉस्ट घटी।’ इस वजह से यस बैंक, इंडसइंड बैंक और कोटक महिंद्रा बैंक की लागत में अनुमान से कहीं अधिक कमी आई। इंडसइंड का कासा बढ़कर 42.3 पर्सेंट हो गया है, जो मार्च 2017 तिमाही तक 36.9 पर्सेंट था। कोटक का कासा सितंबर 2017 तिमाही में 47.8 पर्सेंट हो गया था, जो पिछले वित्त वर्ष के अंत तक 44 पर्सेंट था। यस बैंक का कासा भी इस दौरान 37.2 पर्सेंट से बढ़कर 36.3 पर्सेंट पहुंच गया।

इकरा में फाइनेंशियल सेक्टर रेटिंग्स के हेड कार्तिक श्रीनिवासन ने बताया कि नोटबंदी के बाद सरकारी और प्राइवेट बैंक के बीच लोन ग्रोथ में बड़ा अंतर रहा है। सरकारी बैंक बैड लोन की वजह से लोन ग्रोथ नहीं बढ़ा पा रहे हैं, जबकि प्राइवेट बैंकों के बिजनेस में अच्छी ग्रोथ दिख रही है। आरबीआई की वेबसाइट पर मौजूद डेटा से पता चलता है कि मार्च 2017 को खत्म वित्त वर्ष में बैंकिंग सेक्टर की एवरेज लोन ग्रोथ 8 पर्सेंट रही जो सरकारी बैंकों के लिए 4.4 पर्सेंट थी। इस दौरान प्राइवेट बैंकों की लोन ग्रोथ 20.3 पर्सेंट रही।

नोटबंदी से डिजिटल बैंकिंग को भी बढ़ावा मिला। इसमें प्राइवेट बैंकों ने बढ़त बनाई है। वे मॉडर्न टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल कर रहे हैं। सरकार भी डिजिटल इकनॉमी को बढ़ावा देने में मदद कर रही है

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