बेरोजगारों के गुस्से से बचने को मोदी ने फैलाई सांप्रदायिक नफरत: राहुल

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नोटबंदी के एक साल होने के मौके पर कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर करारा प्रहार किया. राहुल ने पीएम मोदी पर देश की आर्थिक ताकत बिगाड़ने और बेरोजगारी के कारण युवाओं में भड़के गुस्से को ‘सांप्रदायिक नफरत’ में बदलकर देश को नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाया.

राहुल गांधी ने अंग्रेजी अखबार फाइनेंशियल टाइम्स में ‘मोदी के सुधारों के कारण भारत के आर्थिक कौशल का सफाया’ शीर्षक से लेख लिखा है. इसमें उन्होंने कहा, ‘नोटबंदी के कारण भारत की जीडीपी 2% घट गई, असंगठित श्रम क्षेत्र तबाह हो गया और कई छोटे व मझोले कारोबार बंद हो गए. राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री मोदी ने अपने इस फैसले से एक समय फूल-फल रही अर्थव्यवस्था के प्रति विश्वास का सफाया कर दिया है.

राहुल ने लिखा कि एक साल पहले प्रधानमंत्री मोदी ने भारतीय रिजर्व बैंक की अनदेखी कर और ‘अपने मंत्रिमंडल को एक कमरे में बंद कर’ मनमाने ढंग से नोटबंदी का ऐलान किया और देश के लोगों को महज चार घंटे की मोहलत दी. उन्होंने लिखा, ‘प्रधानमंत्री ने दावा किया कि उनके इस फैसले का मकसद भ्रष्टाचार का सफाया है. बारह महीनों में बस यही हुआ है कि उन्होंने भ्रष्टाचार की जगह हमारी फूलती-फलती अर्थव्यवस्था को लेकर भरोसे का सफाया कर दिया.’

कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल ने कहा कि ‘सेंटर फॉर मॉनीटरिंग इंडियन इकोनॉमी’ के आंकलन के अनुसार, नोटबंदी के बाद पहले चार महीनों में 15 लाख लोगों ने रोजगार गंवा दिया. उन्होंने कहा, ‘इस साल जल्दबाजी में लागू की गई जीएसटी के कारण हमारी अर्थव्यवस्था पर दूसरा हमला हुआ. इसने लाखों लोगों की रोजी-रोटी तबाह कर दी.

राहुल गांधी ने लिखा है, ‘मोदी ने बेरोजगारी और आर्थिक अवसरों की कमी से पैदा गुस्से को सांप्रदायिक नफरत में तब्दील कर भारत को नुकसान पहुंचाया है. उन्होंने खुद को छिछले और घृणा से भरे राजनीतिक विमर्श के पीछे छिपाकर रखना पसंद किया. हो सकता है कि लोगों के गुस्से के कारण मोदी सत्ता में आ गए हों, लेकिन इससे नौकरी पैदा नहीं हो सकती और न ही भारत के संस्थानों की समस्याएं दूर हो सकती हैं.’

राहुल ने लिखा कि ये दोनों कदम ऐसे वक्त उठाए गए, जब वैश्विक ताकतों की भारतीय आर्थिक मॉडल से खास उम्मीदें थीं. राज्य की यह एक प्राथमिक जिम्मेदारी होती है कि उसके लोगों को रोजगार मिले. श्रम प्रधान नौकरियों में चीन के वैश्विक एकाधिकार ने अन्य देशों के लिए चुनौतियां पैदा की हैं. इसके कारण लाखों कामगार उत्साहहीन और नाराज हो गए और उन्होंने मतपेटी पर अपनी खीझ उतारी… चाहे वह श्री मोदी, ब्रेक्जिट या डोनाल्ड ट्रंप को मिले वोट ही क्यों न हों.

बता दें कि राहुल गांधी नोटबंदी और जीएसटी के फैसलों को केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार के खिलाफ शुरू से हमलावर रहे हैं. नोटबंदी की पहली बरसी पर राहुल ने सुबह भी ट्वीट कर पीएम मोदी को घेरा था. उन्होंने इस कदम को त्रासदी करार देते हुए ट्वीट किया, ‘नोटबंदी एक त्रासदी है. हम उन लाखों ईमानदार भारतीयों के साथ हैं, जिनका जीवन और जीविका पीएम के विचारहीन कदम से बर्बाद हो गया.’ इसके साथ ही उन्होंने नोटबंदी के दौरान वायरल हुए एक तस्वीर के साथ ट्वीट किया. उन्होंने लिखा, ‘एक आंसू भी हुकूमत के लिए खतरा है, तुमने देखा नहीं आंखों का समुंदर होना.’

बता दें कि पीएम मोदी ने पिछले साल 8 नवंबर को ही 500 और 1000 रुपये के पुराने नोटों को अमान्य घोषित किया था. इस नोटबंदी के एक साल पूरे होने पर बीजेपी आज देश भर में ‘काला धन विरोधी दिवस’ मना रही है. वहीं कांग्रेस की अगुवाई में कई विपक्षी दल इसे ‘काला दिन’ के तौर पर मना रही है.

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