उत्तराखंड से 10.20 हजार करोड़ के पुराने नोट हुए जमा

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नोटबंदी के दौरान उत्तराखंड से कितनी राशि के पुराने नोट बैंकों में जमा कराए गए, इसकी तस्वीर अब जाकर साफ हो पाई है। नोटबंदी के एक साल पूरे होने पर रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआइ) ने जमा किए गए पुराने नोटों के आंकड़े जारी करते हुए बताया कि प्रदेश में करीब 10 हजार 20 करोड़ रुपये के पुराने नोट जमा कराए गए।

आरबीआइ के महाप्रबंधक (उत्तराखंड) सुब्रत दास के मुताबिक राज्य में 500 व 1000 रुपये के 67 लाख 25 हजार पुराने नोट जमा कराए गए। इनमें 1000 रुपये के नोटों की संख्या 34 लाख 30 हजार है, जबकि 500 रुपये के नोटों की संख्या 32 लाख 95 हजार। राशि में इन नोटों का आंकलन करें तो पता चलता है कि उत्तराखंड में 1000 रुपये के नोटों के रूप में 3430 करोड़ रुपये बैंकों को लौटाए गए।

वहीं, 500 रुपये के नोटों के रूप में यह आंकड़ा 6590 करोड़ रुपये रहा। आरबीआइ महाप्रबंधक दास के अनुसार सबसे अधिक पुराने नोट एसबीआइ व पीएनबी में जमा कराए गए। इन दोनों बैंकों में ही पुराने नोट जमा कराने का आंकड़ा 65 फीसद से अधिक रहा। नोटबंदी के आखिरी दिनों में जमा कराए गए पुराने नोटों की राशि 7500 करोड़ रुपये से अधिक आंकी जा रही थी। जबकि अब यह आंकड़ा 10020 करोड़ रुपये निकलकर आया है। हालांकि अभी भी यह आंकड़ा अंतिम तौर पर घोषित नहीं किया गया है। इसमें आंशिक संशोधन संभव है।

318 लोगों के पास शेष थे पुराने नोट

नोटबंदी की अवधि समाप्त होने के बाद भी दून में 318 लोग पुराने नोट लेकर घूम रहे थे और उन्हें यह आशा थी कि उनके नोट बदल दिए जाएंगे। यह उन लोगों का आंकड़ा है, जो लोग पुराने नोट लेकर आरबीआइ महाप्रबंधक कार्यालय पहुंचे थे। इनका नाम-पता व पुराने नोटों की संख्या आरबीआइ कार्यालय के एक अस्थायी रजिस्टर में दर्ज किया गया था।

इस रजिस्टर के अनुसार 500 व 1000 रुपये के 3820 पुराने नोट इन लोगों के पास थे, जिनकी राशि 24 लाख रुपये से अधिक थी। नोट बदलवाने के लिए लोगों के आरबीआइ कार्यालय पहुंचने पर यह व्यवस्था की गई थी।

हालांकि लोगों की बढ़ती भीड़ को देखते हुए इसे 12 दिन में ही बंद कर दिया गया। क्योंकि नोटबंदी के बाद 31 मार्च 2017 तक नोट बदलने की अनुमति सिर्फ कुछ शर्तों के साथ एनआरआइ को दी जा रही थी और ऐसे केंद्र भी बाहर के राज्यों में थे।

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