सब्जी उत्पादन में बनेगा बिहार नंबर -1

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कृषि रोडमैप की लांचिंग के अवसर पर बोले मुख्यमंत्री नीतीश कुमार
सम्राट अशोक कन्वेंशन सेंटर के बापू सभागार में गुरुवार को तीसरे कृषि रोडमैप की लांचिंग के मौके पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि पहला कृषि रोडमैप 2008 में तैयार किया गया था. इसको व्यवस्थित और संगठित रूप देने के लिए विशेषज्ञों से राय ली.

17 फरवरी, 2008 को किसान पंचायत आयोजित की गयी. इसके बाद 2008 से 2012 तक के लिए कृषि रोडमैप बनाया गया. उन्होंने कहा कि 2005 में मुख्यमंत्री बनने के एक–डेढ़ साल के अंदर दिल्ली में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के सरकारी आवास पर मीटिंग हुई थी.

उसमें मैं भी शामिल हुआ था. कृषि की समस्या पर एक विशेषज्ञ प्रेजेंटेशन दे रहे थे. उनकी नजर जब मुझ पर पड़ी तो मुस्कुराते हुए कहा कि बिहार में उत्पादन और उत्पादकता दोनों कम हैं. मैंने भी उन्हें मुस्कुराते हुए जवाब दिया कि स्थिति में सुधार आ जायेगा.

हमारे यहां बीज की कमी, बीज विस्थापन दर में कमी, बीज निगम बंद होने के कगार पर था. रासायनिक खाद का ज्यादा प्रयोग हो रहा था. इन सभी समस्याओं से मैं अवगत था. चार साल में जो काम हुआ, इससे हमारे अनाज के उत्पादन में चाहे धान हो, गेहूं हो या मक्का हो, तीनों के उत्पादन में वृद्धि हुई और उत्पादकता भी बढ़ी. लोग प्रेरित हुए और कहीं–कहीं तो किसानों ने ऐसा काम किया कि उन्हें दुनिया भर में प्रशंसा मिली. नालंदा के किसान ने ऐसा काम किया कि चावल की उत्पादकता में चीन का विश्व रिकाॅर्ड तोड़ दिया. आलू की उत्पादकता में नालंदा जिले के एक गांव ने विश्व कीर्तिमान बनाया.

मुख्यमंत्री ने कहा कि दूसरे रोडमैप को तैयार करने में 2011 में कृषि कैबिनेट का गठन किया गया. इसका विस्तार करते हुए 18 विभागों को शामिल किया गया. दूसरे कृषि रोडमैप से भी उत्पादन एवं उत्पादकता में व्यापक प्रगति हुई. बीज विस्थापन दर बढ़ी, जैविक खेती, कृषि यांत्रिकीकरण, बागवानी एवं वृक्ष आच्छादन में विस्तार हुआ. दुग्ध, मछली और अंडा उत्पादन में वृद्धि दर्ज की गयी.

धान, गेहूं, मक्का में तो हम आगे हैं ही, सब्जी उत्पादन में भी हमारा तीसरा स्थान है. जल्द ही हम दूसरे नंबर पर होंगे और लक्ष्य है कि सब्जी उत्पादन में हम पहले नंबर को प्राप्त करें.

मुख्यमंत्री ने कहा कि जब हम सीएम बने थे, ग्रीन कवर मात्र 9% था, हमलोगों ने 15% पहुंचाने का लक्ष्य रखा. इसके लिए हरियाली मिशन का गठन किया और अब हम लगभग 15% के लक्ष्य तक पहुंच चुके हैं. 24 करोड़ पेड़ लगाने के लक्ष्य में से 18 करोड़ पेड़ को लगाये जा चुके हैं. अब हमारा लक्ष्य 17% हरित आवरण का है.

मंच पर थे मौजूद

राज्यपाल, मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री और कृषि मंत्री के अलावा ऊर्जा मंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव, जल संसाधन मंत्री ललन सिंह, लघु जल संसाधन मंत्री दिनेश चंद्र यादव, ग्रामीण कार्यमंत्री शैलेश कुमार, सहकारिता मंत्री राणा रंधीर सिंह, पंचायतीराज मंत्री कपिलदेव कामत, शिक्षा मंत्री कृष्णनंदन वर्मा, गन्ना उद्योग मंत्री खुर्शीद अहमद, उद्योग मंत्री जयकुमार सिंह, भूमि एवं राजस्व मंत्री रामनारायण मंडल, पशु एवं मत्स्य संसाधन मंत्री पशुपति कुमार पारस, खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री मदन सहनी व मुख्य सचिव अंजनी कुमार सिंह

– जैविक खेती, खाद्य सुरक्षा, पोषण सुरक्षा, समावेशी विकास, किसानों की आमदनी में बढ़ोतरी के कार्यक्रमों को लागू करने में सदाबहार तकनीक पर जोर

1. कृषि – बीज व फसल उत्पादन में निर्भर बनना

-जैविक कोरिडोर की स्थापना- गंगा व एनएच व एस एच किनारे के जिलों पटना, नालंदा, वैशाली, समस्तीपुर, बेगुसराय, खगड़िया, मुंगेर व भागलपुर के गांवों का चयन कर जैविक खेती को प्रोत्साहित करना. जैविक सब्जी की खेती करने वालों को साल में दो बार इनपुट सब्सिडी
-बगीचा बचाओ अभियान के माध्यम से पांच वर्ष उम्र के आम एवं लीची पौधे तथा इससे अधिक उम्र के बगीचे की जुताई–पुताई. कृषि विपणन पर जोर, 54 बाजार समिति प्रांगण को दुरुस्त करना

-कृषि अनुसंधान व शिक्षा पर जोर. फूड टेक्नोलॉजी कालेज की स्थापना होगी.

2. पशु एवं मत्स्य संसाधन

-राज्य में मौजूदा दूध उत्पादन 8709.65 हजार टन को बढ़ाकर 2022 तक 15990 हजार टन करना. दूध प्रसंस्करण की मौजूदा क्षमता 2560 हजार लीटर प्रतिदिन को बढ़ाकर 2022 तक बढ़ाकर 5070 हजार लीटर प्रतिदिन करना. सालाना अंडा उत्पादन प्रतिवर्ष 11116.674 को बढ़ाकर 54616 करना. मांस के उत्पादन को 326 हजार टन से बढ़ाकर 403 हजार टन करना तथा मछली उत्पादन को 5.09 लाख टन से बढ़ाकर 8.02 टन करने का लक्ष्य

3.जल संसाधन

6.623 लाख हेक्टयर में अतिरिक्त सिंचाई क्षमता का सृजन. 4.238 लाख हेक्टेयर सिंचाई क्षमता का पुनर्स्थापन, 1.4 लाख हे. को जलजमाव से मुक्त करना.

-लघु जल संसाधन : वर्ष 2021–2022 तक 8.249 लाख हेक्टेयर सतही सिंचाई क्षमता तथा 37.324 लाख हेक्टेयर सिंचाई क्षमता का सृजन.
4. सहकारिता

-राज्य में सहकारी समितियों के भंडारण क्षमता को 10 लाख टन करने का लक्ष्य है. इस पर 700 करोड़ खर्च होगा. सब्जी के प्रसंस्करण व विपणन की योजना

-गन्ना उद्योग : उत्पादकता के स्तर को वर्तमान में 69.06 टन हे. से बढ़ाकर लगभग 90 टन/हे. करने एवं चीनी की रिकवरी को 13% के स्तर तक ले जाना.

चीनी मिलों के पेराई क्षमता का विस्तार.
5. राजस्व एवं भूमि सुधार

–वर्ष 2017–18 में राज्य के सभी जिला मुख्यालयों से राजस्व भू–मानचित्रों की आपूर्ति प्रारंभ करने का लक्ष्य विभिन्न चरणों में जिला अभिलेखागारों को डिजिटल पुस्तकालय में परिणत करना.

– खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण : 2022 तक राज्य खाद्य निगम का 21.29 लाख मे. टन भंडारण क्षमता का लक्ष्य.

– ऊर्जा : कार्यरत डीजल चालित पम्प सेटों को विद्युत चालित पम्प सेटों में बदलना. पृथक कृषि फीडरों का निर्माण,
– पर्यावरण एवं वन : हरित क्षेत्र में दो फीसदी की वृद्धि करने का लक्ष्य. तटबंध किनारे 1500 किमी 15 लाख पौधों का रोपण. 2021–2022 के अंत तक हरित आवरण क्षेत्र को बढ़ाकर 17% करना.

6. खाद्य प्रसंस्करण

–वर्ष 2017–22 की अवधि में फल, सब्जी एवं मधु के प्रतिवर्ष प्रसंस्करण क्षमता 14.81 लाख मे. टन का सृजन.
राष्ट्रपति ने… नौ योजनाओं का किया शुभारंभ

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने बापू सभागार में कृषि रोडमैप के अलावा नौ योजनाओं का भी शुभारंभ किया. जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए जैविक कोरिडोर की शुरुआत की. इसके अलावा इनपुट अनुदान योजना की शुरुआत की. पायलट प्रोजेक्ट के रूप में नालंदा, पटना, वैशाली और समस्तीपुर जिलों में इस साल इसकी शुरुआत होगी.

खेती के लिए अलग फीडर योजना. कृषि कार्य के लिए अलग फीडर योजना के तहत पटना के नौबतपुर प्रखंड में पायलट प्रोजेक्ट के तहत दीन दयाल ग्राम ज्योति में दो 11 केवी फीडरों का निर्माण किया गया है. इससे रूस्तमपुर से 11 किलोमीटर 11 केवी लाइन का निर्माण कर और 25 केवीए डिस्ट्रीब्यूटशन ट्रांसफॉर्मर स्थापित कर चार गांवों के 37 नलकूपों को बिजली दी जायेगी.

किशनगंज में बिहार मत्यस्यिकी कॉलेज की स्थापना की जायेगी. इससे हर वर्ष 40 मत्स्य विज्ञान विशेषज्ञ स्नातक उपलब्ध होंगे. त्रिस्तरीय सहकारी सब्जी प्रसंस्करण और विपणन व्यवस्था का शुभारंभ हुआ किया. इसका मुख्य उद्देश्य सब्जी के उत्पादन और उत्पादकता में वृद्धि, सब्जी उत्पादकों को उत्पाद की सही कीमत दिलाना, सब्जी आपूर्ति चेन को प्रभावी बनाना और पोस्ट हारवेस्ट हानि को कम करना है.

मधुबनी जिले के बिहुल नदी पर लक्ष्मीपुर गांव के पास और दरभंगा जिले के टिकमा नदी पर अलीनगर प्रखंड के मोहिउद्दीनपुर पकड़ी में वीयर सिंचाई योजना का शुभारंभ राष्ट्रपति ने किया. इन योजनाओं पर 58 करोड़ से अधिक खर्च होंगे. इन योजनाओं को 2019 तक पूरा किया जाना है.

मोदी ने कहा वर्ष 2022 तक अग्रणी राज्य बनेगा बिहार

कृषि रोडमैप के लांचिंग समारोह में उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने कहा कि बिहार में कृषि की अपार संभावना है. 2022 तक बिहार कृषि रोडमैप के जरिये देश के अग्रणी राज्यों में शुमार हो जायेगा. 2022 तक किसानों की आमदनी को दोगुना करने का लक्ष्य है.

मोदी ने कहा कि बिहार पहला राज्य है जहां कृषि रोडमैप तैयार किया गया है. कृषि रोडमैप की ही बदौलत चावल व आलू के उत्पादन में रिकॉर्ड वृद्धि हुई.पहली हरित क्रांति का फायदा बिहार को नहीं मिल सका था. बिहार के पास प्राकृतिक संपदा की बहुतायत है. प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के सहयोग से बिहार कृषि में भी आगे आएगा. सब्जी व फल की खेती को प्रोत्साहित किया जायेगा. इंट्रीगेटेड फार्मिंग को बढ़ावा दिया जायेगा. पहले के दो कृषि रोडमैप से उत्पादन में बिहार में कई कीर्तिमान स्थापित किये.

राज्यपाल ने कहा बिहार के विकास में कृषि रोडमैप प्रामाणिक दस्तावेज होगा

राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने कहा है कि बिहार के विकास में कृषि रोडमैप प्रामाणिक दस्तावेज होगा. कृषि रोडमैप के लाचिंग समारोह में विशिष्ट अतिथि के अपने संबोधन में राज्यपाल ने कहा कि बिहार प्राकृतिक संसाधनों से भरा-पूरा राज्य है. बिहार की तरफ लोग आशा भरी नजरों से देख रहे हैं.

बिहार दूसरी हरित क्रांति का अगुआ बनेगा ऐसी मेरा विश्वास है. कृषि के क्षेत्र में बिहार ने विकास किया है और किसानों के लिए यह कृषि रोडमैप तैयार किया गया है. राज्यपाल ने कहा कि भारत की आर्थिक समृद्धि खेती पर निर्भर है. खेती के क्षेत्र में इंद्रधनुषी क्रांति होगी. कृषि रोडमैप का जारी होना बिहार के इतिहास का यादगार क्षण है. राज्यपाल ने प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण पर जोर दिया.

– मुख्यमंत्री ने किया स्वागत: मुुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को पुष्प गुच्छ, शाल व स्मृति चिन्ह देकर उनका स्वागत किया. उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने राज्यपाल रामनाथ कोविंद को बुके देकर उनका स्वागत किया. धन्यवाद ज्ञापन मुख्यसचिव अंजनी कुमार सिंह ने किया.

बंद गले के कोट में खूब फब रहे थे महामहिम

राष्ट्रपति के रुप में पहली बार बिहार पधारे रामनाथ कोविंद को एक झलक देखने के लिए वापू सभागार में लोग बेताब थे. राज्यपाल 12 बजकर पांच मिनट पर पधारे . ब्लू रंग के बंद गले के कोट में वो खुब फब रहे थे. उनके आने डेढ़ घंटा पहले ही सभागार खचाखच भर गया. राष्ट्रपति जैसे ही सभागार में पहुंचे तालियों से लोगों ने उनका स्वागत किया.

राजभवन पहुंच यादें हुईं ताजा राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद कृषि रोड मैप 2017-22 की लांचिंग के बाद जब राजभवन पहुंचे तो उनकी पुरानी यादें ताजा हो गयी.

राज्यपाल रहते उन्होंने यहां 22 महीने बिताये थे, लेकिन राष्ट्रपति के उम्मीदवार घोषित होने के बाद उन्होंने जून में ही अपना इस्तीफा दे दिया था. करीब साढ़े चार महीने के बाद राजभवन पहुंचे राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद का स्वागत राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने किया. राष्ट्रपति ने राजभवन में ही दोपहर का भोजन किया. उनके लिए शाकाहारी व्यंजन की व्यवस्था की गयी थी.

– समारोह में थे मौजूद: केंद्रीय राज्यमंत्री रामकृपाल यादव, पूर्व मुख्यमंत्री जीतनराम मांझी, नगर विकास मंत्री सुरेश शर्मा, स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय, समाज कल्याण मंत्री मंजू वर्मा, खान मंत्री विनोद कुमार सिंह, सांसद जनार्दन सिंह सीग्रीवाल सहित कई सांसद , विधायक व विधान पार्षद मौजूद थे.

बिहार : चाक-चौबंद सुरक्षा व्यवस्था के बीच आये और गये राष्ट्रपति

राष्ट्रपति के वापस जाने का पूर्व निर्धारित समय दोपहर 3.30 था, लेकिन 80 मिनट देर से 4.50 में राष्ट्रपति का विमान पटना एयरपोर्ट से उड़ा
पटना : पटना एयरपोर्ट पर राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद का विमान दोपहर 11.20 में निर्धारित समय से पांच मिनट पहले ही लैंड कर गया. वे भारतीय वायुसेना के विशेष विमान बीबीजे से पहुंचे थे.

स्टेट हैंगर में आगवानी को राज्यपाल सत्य पाल मलिक, सीएम नीतीश कुमार और डिप्टी सीएम सुशील मोदी समेत राज्य सरकार के कई मंत्री और वरीय अधिकारी माैजूद थे. राज्यपाल और सीएम ने पुष्पगुच्छ देकर राष्ट्रपति का स्वागत किया. 11.45 में कारकेड स्टेट हैंगर से निकला और पटेल गोलंबर से राजेंद्र चौक, कर्पूरी गोलंबर, राजधानी वाटिका, नया सचिवालय, हड़ताली मोड़, आयकर गोलंबर, डाकबंगला चौराहा, जेपी गोलंबर, चिल्ड्रेन पार्क से होते हुए सम्राट अशोक कन्वेंशन सेंटर स्थित बापू सभागार गया.

लगा रहा लंबा जाम : राष्ट्रपति की यात्रा के कारण कई जगह लंबा जाम लगा रहा. राष्ट्रपति के पूरे परिभ्रमण पथ में उनके आने जाने से 15 मिनट पहले से वाहनों के आवागमन पर रोक लगी थी. इसके कारण कई जगह लंबा जाम रहा. बेली रोड में हड़ताली मोड़ के पास राष्ट्रपति का कारकेड गुजरने के बाद भी 15-20 मिनट तक जाम लगा रहा. वोल्टास गोलंबर और आयकर गोलंबर पर भी ऐसी ही स्थिति दिखी. डाकबंगला चौराहा पर तो सबसे अधिक भीड़- भाड़ और जाम दिखी.

चार फ्लाइट के समय में हुआ बदलाव :

राष्ट्रपति की यात्रा के कारण चार

फ्लाइट के समय में बदलाव किया गया. इसके कारण कैनोपी से लेकर सेक्यूरिटी होल्ड एरिया तक में यात्रियों की भीड़ लगी रही. एयरपोर्ट पर आने जाने वाले

यात्रियों को भी इसके कारण परेशानी उठानी पड़ी.

दोपहर 11.05 बजे से ही पिकड्रॉप एरिया में वाहनों के प्रवेश पर पाबंदी लगा दी गई. इसके कारण लोगों को पार्किंग एरिया से अपने लगेज को ढ़ो कर प्रवेश द्वार तक आना पड़ा और एक्जिट प्वाइंट से समान ढो कर पार्किंग एरिया तक ले जाना पड़ा. अपने पैरों पर चलने में असमर्थ बुजुर्गों को इसके कारण सबसे अधिक परेशानी हुई और उन्हें व्हील चेयर पर एक्जिट प्वाइंट से पार्किंग एरिया तक का सफर करना पड़ा.

दिखी कड़ी सुरक्षा व्यवस्था : राष्ट्रपति के आगमन को लेकर एयरपोर्ट की सुरक्षा व्यवस्था अत्यंत चाक चौबंद दिखी. पूरे परिसर में पुलिस और अर्धसैनिक बलों के जवान और विशेष रूप से प्रशिक्षित कमांडो तैनात थे. स्टेट हैंगर से पीर अली पथ जाने वाले मार्ग में यातायात पर पूरी तरह पाबंदी लगा दी गई थी और राइडिंग रोड वाले सिरे से ही आना-जाना दोनों हो रहा था.

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