नंबर पोर्ट कराने नहीं दिया समय; अब टावर बंद होने से नेटवर्क भी नहीं मिल रहा

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रिलायंस कम्युनिकेशन ने 2जी व 3जी सेवाएं बंद करने का ऐलान करने के बाद अब टावर भी बंद करना शुरू कर दिए हैं। नेटवर्क नहीं मिलने के कारण सालों से कंपनी का नंबर इस्तेमाल कर रहे उपभोक्ताओं के मोबाइल मौन हो गए हैं। नेटवर्क नहीं मिलने के कारण वे न तो पोर्टेबिलिटी के लिए रिक्वेस्ट भेज पा रहे हैं और न ही कंपनी द्वारा भेजे जा रहे पोर्ट कोड उन्हें मिल रहे हैं। उपभोक्ताओं के सामने सबसे बड़ा संकट यह है कि उन्होंने बैंक, एलपीजी बुकिंग, पैन और आधार कार्ड में यह नंबर दर्ज कराया है। अब वे न तो एलपीजी की बुकिंग कर पा रहे हैं और न ही बैंक या आधार कार्ड संबंधी सूचनाएं उन तक पहुंच पा रही हैं।
– राजधानी में करीब 1 लाख लोगों के पास रिलायंस के फोन हैं। इनमें से 25 हजार से ज्यादा के पास पोस्टपेड कनेक्शन हैं। हालांकि पोस्टपेड ग्राहकों की मदद के लिए कुछ रिलायंस स्टोर चल रहे हैं, लेकिन प्रीपेड ग्राहक बाय डिफॉल्ट आ रहे पोर्ट कोड की लॉटरी पर ही निर्भर हैं।
नहीं मिल रहा नेटवर्क… होशंगाबाद रोड से रोशनपुरा पहुंच गए नेटवर्क ढूंढते-ढूंढते
– अवधपुरी निवासी लक्ष्मण सिंह चौधरी 15 साल से आरकॉम का मोबाइल नंबर इस्तेमाल कर रहे हैं। नेटवर्क ही नहीं होने के कारण एक माह से उनका फोन बंद है। उनके कुछ साथियों ने बताया कि एमपी नगर समेत कुछ इलाकों में नेटवर्क आ रहा है।
– आप वहां जाकर मोबाइल पोर्टेबिलिटी के लिए रिक्वेस्ट डाल सकते हैं। लक्ष्मण उनकी बात मान जब एमपी नगर गए तो पोर्टेबिलिटी के लिए उनकी पोर्ट रिक्वेस्ट का मैसेज सेंड ही नहीं हो रहा।
– होशंगाबाद रोड निवासी अनुज शर्मा के पास भी रिलायंस का नंबर है, जो उन्होंने एलपीजी डीलर के पास रजिस्टर्ड करा रखा है, लेकिन फोन बंद होने के कारण वे गैस की बुकिंग नहीं करा पा रहे हैं। किसा ने बताया कि कुछ इलाकों में नेटवर्क आ रहा है।
– शर्मा अपने बेटे के साथ एलपीजी बुकिंग के लिए नेटवर्क ढूंढ़ते रहे, जो उन्हें रोशनपुरा पर मिला। हालांकि दो दिन पहले उनके फोन नंबर पर बाय डिफॉल्ट एक पोर्टिंग कोड जनरेट होकर आ गया। अब वे दूसरी कंपनी में पोर्ट के लिए आवेदन कर रहे हैं।
इसलिए बंद हो रहे नंबर
– आरकॉम ने देश के 22 सर्किल में 2जी और 3जी सेवा देने के लिए लाइसेंस लिया था। लाइसेंस दो कंपनियों रिलायंस टेलीकम्युनिकेशन और रिलायंस कम्यूनिकेशन के नाम से थे। आरटीएनएल के नाम से कंपनी सीडीएमए सेवाएं दे रही थी। बाद में इन्हें जीएसएम में बदल दिया गया था। मप्र-छत्तीसगढ़ सर्किल में आरटीएनएल अब सेवाएं देना बंद कर रही है।
बंद हुए 8 फ्रेंचाइजी स्टोर
– शहर में कंपनी के 18 स्टोर थे, जो सभी फ्रेंचाइजी स्टोर थे। ये पोस्टपेड ग्राहकों को सेवाएं देने के लिए खोले गए थे। इनमें से 8 अब तक बंद हो चुके हैं। अभी जो फ्रेंचाइजी स्टोर काम कर रहे हैं उन से कंपनी ने 12 सितंबर 2017 के बाद से किसी भी तरह का कम्युनिकेशन नहीं किया है। ऐसे में वे स्टोर पर आने वाले ग्राहकों को कोई जवाब नहीं दे पा रहे हैं।
पोर्ट कोड जनरेट करने 20 से 25 बार भेजनी पड़ रही है रिक्वेस्ट
– कंपनी के प्रीपेड ग्राहकों को बाय डिफॉल्ट पोर्टकोड जनरेट हो रहे हैं। इनकी वेलिडिटी 31 दिसंबर तक बढ़ा दी गई है। स्टोर संचालक उनसे नंबर पोर्ट करने को कह रहे हैं, लेकिन लोगों को एक ही दिन में 20 से 25 बार पोर्ट कोड जनरेट करने के लिए रिक्वेस्ट भेजनी पड़ रही है।
यह तो रिलायंस की जिम्मेदारी है
– भारतीय दूरसंचार विनियामक प्राधिकरण और केंद्र सरकार ने रिलायंस को निर्देश दिए हैं कि वे अपने सभी ग्राहकों को पोर्ट करने के विकल्प उपलब्ध कराएं। उनके लिए पोर्टिंग कोड जनरेट करें।

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