शेयर बाजार में जारी रहेगी गिरावट या आएगी तेजी, पढ़िए एक्सपर्ट की राय

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बीते हफ्ते गिरावट झेलने वाली दलाल स्ट्रीट में इस हफ्ते निवेशकों की नजर महंगाई के आंकड़ों और अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड की कीमत पर रहेगी। इस हफ्ते अक्टूबर के महंगाई के आंकड़े जारी होने हैं। दो हफ्ते की तेजी के बाद पिछले हफ्ते प्रमुख शेयर बाजारों में गिरावट देखी गई। बंबई शेयर बाजार (बीएसई) का सेंसेक्स 371 अंक लुढ़का। इस दौरान नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) के निफ्टी ने भी 131 अंक नीचे आया। सऊदी अरब में चल रही राजनीतिक उठापटक और लगातार तेजी के बाद बीते हफ्ते मुनाफावसूली इस गिरावट की प्रमुख वजह रही।

जियोजित फाइनेंशियल सर्विसेज के रिसर्च हेड विनोद नायर ने कहा कि इस हफ्ते थोक और खुदरा महंगाई के आंकड़े आने हैं। निवेशक इन पर नजर रखेंगे। इसके अलावा क्रूड के दाम बढ़ोतरी का मौजूदा ट्रेंड बने रहने से भी निवेशकों की धारणा पर असर पड़ेगा। इस हफ्ते आइडिया सेलुलर, एनएमडीसी, स्पाइसजेट और यूनाइटेड बैंक ऑफ इंडिया के तिमाही नतीजे भी जारी होने हैं। बाजार की दशा और दिशा तय करने में इनकी भूमिका भी रहेगी।

कोटक सिक्योरिटीज की टीना विरमानी ने कहा, ‘इस हफ्ते मध्य-पूर्व की राजनीतिक गतिविधियों और क्रूड की कीमतों पर नजर रहेगी। इसका कारण मध्य-पूर्व में बढ़ता तनाव और अमेरिका में तेल उत्पादन में बढ़ोतरी है। घरेलू मोर्चे पर कंपनियों के नतीजे भी निवेशकों की धारणा प्रभावित करेंगे।’ इस बीच, औद्योगिक उत्पादन की वृद्धि दर सितंबर में घटकर 3.8 फीसद रही। इसका कारण मैन्यूफैक्चरिंग क्षेत्र का कमजोर प्रदर्शन और उपभोक्ता वस्तुओं के उत्पादन में गिरावट है। इसका भी बाजार पर असर देखने को मिल सकता है। हालांकि जीएसटी काउंसिल की बैठक में कई रोजमर्रा की वस्तुओं पर टैक्स घटाए जाने से उपभोक्ता वस्तुओं के शेयर फायदे में रह सकते हैं।

शीर्ष 10 में से छह कंपनियों का मार्केट कैप गिरा: देश की शीर्ष 10 में से छह कंपनियों के बाजार पूंजीकरण (मार्केट कैप) में 60,422.54 करोड़ रुपये की कमी आई। इसमें सर्वाधिक प्रभावित रिलायंस इंडस्ट्रीज रही। बीते हफ्ते रिलायंस इंडस्ट्रीज (आरआइएल) का एमकैप 39,328.34 करोड़ रुपये घटकर 5,59,526.33 करोड़ रुपये रहा। एचडीएफसी, आइटीसी, एचडीएफसी बैंक, मारुति सुजुकी और ओएनजीसी के बाजार मूल्यांकन में भी गिरावट आई। दूसरी तरफ टीसीएस, हिंदूस्तान यूनिलीवर, इन्फोसिस और भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआइ) के एमकैप में इस दौरान बढ़ोतरी हुई।

पार्टिसिपेटरी नोट्स (पी-नोट्स) के जरिये शेयर बाजार में निवेश आठ साल के निचले स्तर पर पहुंच गया है। सितंबर के अंत में यह 1,22,684 करोड़ रुपये रहा। सेबी की ओर से नियमों को सख्त किए जाने के कारण इस रूट से निवेश में कमी आई है। अगस्त, 2009 के बाद से यह इसका सबसे निचला स्तर है। उस समय पी-नोट्स निवेश 1,10,355 करोड़ रुपये के स्तर पर रहा था। पी-नोट्स रजिस्टर्ड विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों के द्वारा विदेश के उन इन्वेस्टर्स को जारी किए जाते हैं, जो बिना पंजीकरण के भारतीय शेयर बाजार में निवेश करना चाहते हैं। हालांकि इस रूट के जरिये निवेश में कई तरह की गड़बड़ियों की आशंका के बाद सेबी ने निवेश के नियम सख्त कर दिए थे

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