900 रुपये में बेचता था 2000 का नकली नोट

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नई दिल्ली : पिछले साल नवंबर में हुई नोटबंदी के बाद दो हजार रुपये के नए नोट आए थे। अब इन दो हजार के नकली नोटों का भी छपना शुरू हो गया है। इस मामले में गिरफ्तार धंधे के सरगना काशिद ने बताया कि उसे एक नोट 600 रुपये में मिलता था और वह इसे आगे 900 रुपये में बेचता था। नकली नोटों में हर नोट पर अलग-अलग नंबर नहीं होता है, बल्कि एक साथ एक ही सीरीज के सैकड़ो नोट छापे जाते हैं।

काशिद ने बताया कि उसे यह जानकारी नहीं है कि दो हजार रुपये के यह नकली नोट बांग्लादेश में छापे जा रहे हैं या फिर पाकिस्तान में। लेकिन उसे यह जरूर पता है कि अभी इन नोटों की सप्लाई बांग्लादेश के रास्ते की जा रही थी। शक है कि नकली भारतीय नोटों को पाकिस्तान में छापा जा रहा है। 6 लाख 60 हजार रुपये की कीमतके नकली दो हजार रुपये के 330 नोटों में 250 एक सिंगल सीरियल नंबर के हैं और 80 दूसरे सिंगल सीरियल नंबर के। इसमें भी केवल चार सीरियल नंबर इसमें छापे गए हैं। देखने से असली-नकली का पता लगाना आसान नहीं है।

पता लगा है कि जब से दो हजार रुपये के यह नकली नोट छपने शुरू हुए हैं। तब से काशिद करीब दो करोड़ रुपये की कीमत के इन नोटों को भारत में खपा चुका है। नकली नोटों से भरी पोटलियों को कई बार बांग्लादेश से भारत की ओर बॉर्डर क्रॉस करने के लिए फेंका जाता था। जबकि कई बार इन नोटों को ऐसे बॉर्डर इलाकों से भारत लाया जाता था जहां सीमाओं पर चौकसी की कमी है। नकली नोटों की यह खपत ना केवल दिल्ली बल्कि यूपी, बिहार और हरियाणा आदि राज्यों में भी की जाती थी। इनमें दिल्ली में यह खपत कुछ अधिक बताई गई है।

जांच में पता लगा कि नोटबंदी के बाद जब दो हजार और 500 रुपये के नए नोट भारत सरकार ने बाजार में उतार दिए। तब नकली नोटों को छापने वालों को यह परेशानी हो गई कि इस क्वॉलिटी या इससे मिलती-जुलती क्वॉलिटी का कागज कहां से लाएं। इसका प्रबंध करने में काफी समय लग गया। इसी वजह से नकली नोटों की छपाई करीब आठ महीने बाद शुरू हो पाई।

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