कांग्रेस में ‘राहुल युग’ की तैयारी, अाज बैठक में लिया जा सकता है अहम निर्णय

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सूत्रों से मिले संकेतों के अनुसार, दिसंबर के पहले हफ्ते में ही कांग्रेस अध्यक्ष के चुनाव की प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी।

नई दिल्ली(ब्यूरो)। पार्टी सूत्रों के अनुसार, कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के आवास 10-जनपथ पर कार्यसमिति की यह अहम बैठक अाज सुबह साढ़े दस बजे बुलाई गई है। जाहिर तौर पर इस बैठक का एजेंडा कांग्रेस अध्यक्ष के चुनाव का कार्यक्रम तय करना है। सूत्रों से मिले संकेतों के अनुसार, दिसंबर के पहले हफ्ते में ही कांग्रेस अध्यक्ष के चुनाव की प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी।

इससे साफ है कि गुजरात चुनाव के पहले दौर के 9 दिसंबर को होने वाले मतदान से पूर्व राहुल गांधी की कांग्रेस अध्यक्ष के रूप में ताजपोशी की पार्टी की तैयारी है। कांग्रेस में राहुल के युग का औपचारिक आगाज भले ही उनके अध्यक्ष बनने के बाद से माना जाएगा मगर व्यावहारिक तौर पर पार्टी की कमान बीते कुछ साल से बतौर उपाध्यक्ष उनके हाथों में ही है। पार्टी के अंदर भी कभी उनके नेतृत्व को लेकर असहज महसूस कर अंदरनी तौर पर सवाल उठाने वाले कांग्रेस नेता भी अब उनका नेतृत्व स्वीकार कर चुके हैं।

सबको साथ लेकर चलने का इरादा

राहुल ने भी हाल के समय में अपनी युवा नेताओं की टीम के साथ वरिष्ठ नेताओं को भी पूरा तवज्जो देकर यह संदेश दिया है कि वह फिलहाल कांग्रेस में सबको साथ लेकर चलने का इरादा रखते हैं। सोनिया गांधी की सेहत ग़़डब़़ड होने के बाद से ही राहुल को पार्टी की कमान सौंपने की बातें चल रही हैं मगर कई मौकों पर इसको लेकर खुद राहुल तैयार नहीं दिखे। हालांकि बीते तीन महीनों के दौरान राहुल ने इस संशय से बाहर आकर नेतृत्व संभालने के अपने इरादे साफ कर दिए।

2004 में राजनीतिक पारी का अागाज

2004 में अमेठी से लोकसभा चुनाव जीतकर राजनीतिक पारी का आगाज करने वाले राहुल गांधी ने 2007 में बतौर कांग्रेस महासचिव संगठन में जिम्मेदारी संभाली। संप्रग की दस साल की सत्ता के दौरान उन्हें कई बार मनमोहन सिंह ने अपने कैबिनेट में शामिल करने का प्रस्ताव दिया, मगर राहुल ने इनकार कर दिया।

जब उठी थी राहुल को पीएम बनाने की बात

2012 में तो कांग्रेस के एक वर्ग ने उन्हें मनमोहन की जगह पीएम बनाने तक की अंदरूनी आवाज बुंलद की। जयपुर में जनवरी 2013 में राहुल को औपचारिक रूप से सोनिया गांधी का उत्तराधिकारी बनाते हुए कांग्रेस उपाध्यक्ष के रूप में प्रमोशन दिया गया। राहुल के मुकाबले पार्टी के अंदर से उनके खिलाफ चुनाव ल़़डने की कोई संभावना नहीं है। ऐसे में राहुल का निर्विरोध कांग्रेस अध्यक्ष चुना जाना भी तय दिखता है।

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