यातायात नियमों के उल्लंघन से होते हैं 80 फीसद हादसे

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जागरण संवाददाता, सोनभद्र : एक सप्ताह पूर्व बभनी थाना क्षेत्र के नधिरा गांव के समीप बालू लदा ओवरलोड ट्रक सवारी जीप में टक्कर मारने के बाद पलट गया। इस हादसे में खलासी की मौत हो गई थी। इसी तरह शक्तिनगर के खड़िया बाजार में तेज रफ्तार हाईवा ने शनिवार की रात जीप चालक को रौंद दिया था, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। ये दो मामले महज नमूने हैं।

अगर देखा जाय तो हर साल नियमों का उल्लंघन करते हुए सड़कों पर फर्राटा भरने वाले वाहनों की वजह से सैकड़ों लोगों की जान चली जाती है। इन हादसों में कोई अपना भाई खोता है तो किसी की कोख सुनी हो जाती है। इतना ही नहीं कई नौनिहालों के सिर से पिता का साया भी उठ जाता है तो कितनी महिलाओं का सुहाग उजड़ जाता है।

आदिवासी बहुल जनपद में होने वाले ऐसे सड़क हादसों पर नजर डालें तो यहां बड़े वाहनों की तुलना में छोटे वाहनों से होने वाले हादसों की संख्या काफी अधिक होती है। गत कुछ सालों में हुई सड़क दुर्घटनाओं पर गौर करें तो वर्ष 2014 से लेकर अब तक कुल 279 सड़क हादसे हो चुके हैं। इन हादसों में 80 फीसद हादसे यातायात नियमों के उल्लंघन की वजह से हुए हैं। यातायात विभाग से जुड़े सूत्रों की मानें तो यातायात नियमों का उल्लंघन करने में ऐसा नहीं कम पढ़े लिखे या ग्रामीण क्षेत्र के लोग ही शामिल होते हैं।

इसमें शहरी लोगों की भी तादात काफी अधिक है। वहीं 20 फीसद हादसे जिले की खराब सड़कों के कारण होते हैं। उबड़-खाबड़ व घुमावदार ग्रामीण क्षेत्र की सड़कों पर अक्सर वाहनों के अनियंत्रित होने या पलटने का मामला प्रकाश में आता है।

इन वजहों से हुए सबसे ज्यादा हादसे

जिले में चार साल के भीतर जो सड़क हादसे हुए हैं उनमें नशे की हालत में गाड़ी चलाने, तेज रफ्तार, ओवरलोड वाहन, ट्रैक्टर-ट्राली और और सड़कों की खामियों के कारण हुए हैं। यातायात विभाग के अनुसार जो हादसे होते हैं उनमें तेज रफ्तार या नशे की हालत में वाहन चलाने वाले हादसों में तो तत्काल मौत हो जाती है। बाकी ट्रैक्टर-ट्राली या सड़कों की खामियों वाले हादसों में ज्यादातर लोग गंभीर रूप से घायल हो जाते हैं। जिले के ओवरलोड वाहनों से होने वाले हादसों की भी संख्या कम नहीं है। जो पुलिस से बचने के लिए तेज रफ्तार से वाहन चलाते हुए हादसों के सबब बन जाते हैं।

बाइक सवारों की होती है सबसे ज्यादा मौत

जिले में यातायात नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहनों पर कार्रवाई के बावजूद हादसों की संख्या काफी अधिक है। यातायात विभाग के अनुसार जिले में वर्ष 2014 से लेकर अब तक हुए सड़क हादसों में बाइक दुर्घटना करीब 150 से अधिक हुई है। जबकि अब तक हुए कुल हादसों की संख्या 279 है। विभागीय लोग बताते हैं कि दोपहिया वाहनों से जब भी हादसे होते हैं तो पता चलता है कि उनके पास हेलमेट नहीं था। ऐसे में उसके सिर में गंभीर चोट लग गई और मौत हो गई। इसके अलावा चार पहिया वाहनों के हादसों में सीट बेल्ट न लगाने के कारण भी कई हादसे हो चुके हैं।

अन्य कारणों से भी होते हैं हादसे

यातायात नियमों का उल्लंघन करने के साथ ही अन्य कारणों से भी कई सड़क हादसे होते हैं। इसमें वाहनों के फिटनेस की खामी, ट्रैक्टर-ट्राली और जुगाड़, सड़कों पर आधे-अधूरे निर्माण कार्य, खराब ट्रैफिक सिग्नल, सड़क पर गलत पार्किंग, सड़क पर खड़े खराब पड़े वाहन आदि हादसों की प्रमुख वजह बनते हैं।

जिले में कहां और क्यों होता है सबसे ज्यादा हादसा

जिले में वैसे तो सबसे ज्यादा हादसा वाराणसी-शक्तिनगर मार्ग पर होता है लेकिन अन्य क्षेत्रों में भी होने वाले हादसों की संख्या कम नहीं होती। जिले के घोरावल क्षेत्र में होने वाले हादसों पर गौर करें तो यहां सबसे ज्यादा हादसे बाइक सवारों के होते हैं। इसके बाद यहां ट्रैक्टर-ट्राली की चपेट में आने से होने वाली मौतों का मामला सबसे अधिक होता है। बताया जाता है कि इस क्षेत्र की विभिन्न नदियों से चोरी-छिपे कुछ अवैध खननकर्ता बालू निकालते हैं। रात में बालू का परिवहन होता है जिससे हादसे होते हैं। इसी तरह रामगढ़ क्षेत्र में राब‌र्ट्सगंज-खलियारी मार्ग पर तेज रफ्तार वाहनों से हादसे होते हैं।

यहां सड़क की खराबी बनती है हादसे की वजह

बात करें जनपद के दक्षिणांचल में होने वाले हादसों की तो इस क्षेत्र में ओवरलोड वाहनों व खराब सड़क दोनों की वजह से हादसे होते हैं। बताया जाता है कि मध्य प्रदेश व छत्तीसगढ़ की तरफ से आने वाले वाहन ओवरलोड होते हैं। जो हादसे की वजह बनते हैं। इसी तरह बभनी से आसनडीह मार्ग करीब 16 किलोमीटर व म्योरपुर ब्लाक में म्योरपुर से आश्रम मोड़ तक की सड़क भी खस्ताहाल स्थिति में है। यहां भी हादसे आयेदिन होते रहते हैं।

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एक नजर आकड़ों पर

एक साल में कुल हादसे : 279

दोपहिया वाहनों के हादसे : 150

मरने वालों की कुल संख्या : 163

घायल होने वालों की कुल संख्या : 212

बिना हेलमेट मरने वालों की संख्या : 110

ट्रैक्टर-ट्राली से हुए हादसे : 25

ओवरट्रकों से हुए हादसे : 20

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