SPK News desk, जर्मनी के बॉन शहर में हुए जलवायु परिवर्तन सम्मेलन के वक्त जहां एक ओर दुनिया भर से इक्ट्ठा हुए कई लोग कोयले के इस्तेमाल के खिलाफ नारे लगाते रहे, वहीं दूसरी ओर यहां से कुछ किलोमीटर दूर मुट्ठी भर लोग धरती के सबसे पुराने जंगलों में से एक को बचाने के लिए लड़ते दिखे. बॉन से कोई 50 किलोमीटर दूर हमबख के जंगल आज खत्म होने की कगार पर हैं. इन जंगलों को बचाने के लिए लोग कहते हैं कि पुलिस दमन का खतरा हर वक्त मंडराता है, कई साथी जेल में हैं. हमसे बात करते वक्त इन लोगों ने अपने चेहरे नहीं दिखाए और पहचान छुपाए रखी. इनमें से एक का कहना है कि बिजली बनाने वाली जर्मनी की दूसरी सबसे बड़ी कंपनी RWE यूरोप के सबसे पुराने जंगल को ब्राउन कोल के खनन के लिए खत्म कर रही है. लोगों को अपने घरों से हटाया जा रहा है. हमबख के जंगलों का नब्बे प्रतिशत हिस्सा काटा जा चुका है. पावर और माइनिंग कंपनी RWE को यहां जमीन के नीचे दबे ब्राउन कोल का ठेका मिला है जो बिजली बनाने के लिये इस्तेमाल किया जा रहा है.
प्रदर्शनकारियों ने पुलिस और माइनिंग कंपनी के लोगों को भीतर घुसने से रोकने के लिए जंगल में प्रवेश करने वाली सड़कों को काट दिया है. हमबख फॉरेस्ट को घुसते वक्त हमें शुरुआत में ही एक बैनर लगा दिखा जिसमें अंग्रेज़ी में लिखा था- ‘रिस्पेक्ट एक्जिस्टेंस ऑर एक्पेक्ट रेजिस्टेंस’ यानी लोगों की ज़िंदगी का सम्मान करो वरना विरोध का सामना करो. इसी बैनर के साथ लगा था एक नाका जिस पर एक क्रॉस पर जीसस का पुतला लगाया गया था. एक ने कहा कि इस नाके का मकसद पुलिस को जंगल में आने से रोकना है ताकि जंगल को बरबादी से बचाया जा सके. हम दुआ करते हैं कि ड्राइवर ईसाई हो और यीशू के पुतले को तोड़कर गाड़ी ले जाने से मना कर दे.
लड़ रहे आंदोलनकारियों का कहना है कि जलवायु परिवर्तन सम्मेलन की वजह से जर्मनी सरकार और पावर कंपनी ने पेड़ों को काटने का काम रोक दिया है लेकिन जैसे ही दुनिया भर से आए पर्यावरणविद् और दूसरे देशों के लोग चले जायेंगे तो ये जंगल काट दिया जायेगा. यहां आकर लगा कि जैसे सत्तर के दशक में उत्तराखंड का चिपको आंदोलन यूरोप में हमबख के जंगलों में चला आया हो. तब गौरा देवी गढ़वाल के जंगलों को बचाने के लिये महिलाओं के साथ पेड़ों से चिपक गईं और यहां ट्री-हाउस (मचान) बना कर रह रहे लोग पेड़ों के कटने से पहले खुद मर जाना चाहते हैं.
एक आंदोलनकारी ने कहा, इस तरह मचान बनाने का मकसद पेड़ों को कटने से बचाना है. जब तक इस पेड़ पर कोई आदमी चढ़ा रहेगा इसे काटा नहीं जा सकता. इस तरह से हम पेड़ों को कटने और कोयले के खनन को रोक सकते हैं और जलवायु बिगड़ने से बचा सकते हैं.

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