प्रद्युम्न मर्डर में घिरी पुलिस, जुर्म कबूलने के लिए अशोक को दिए बिजली के झटके

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हरियाणा के साथ पूरे देश को हिला कर रख देने वाले प्रद्युम्न मर्डर केस में गिरफ्तार आरोपी बस हेल्पर अशोक कुमार का आखिरकार जमानत मिल गई। 76 दिनों तक हिरासत में रहने के बाद घर पहुंच गया। बुधवार को ही कोर्ट ने उसे जमानत दी थी। अशोक ने रिहाई के बाद वह भगवान का शुक्रगुजार है कि उसने न्याय दिया। उसने कहा कि हमें न्यायपालिका पर पूरा विश्वास है।

रिहाई के बाद अशोक ने हरियाणा पुलिस की ज्यादती के बारे में बताया। अशोक के मुताबिक, पुलिस ने थर्ड डिग्री देकर जुर्म कबूल करने के लिए मजबूर किया। इसके लिए उसे हिरासत में टॉर्चर भी किया गया। उसे बिजली के झटके दिए गए। अशोक की मानें तो जुर्म कबूलने के लिए उसे नशा भी दिया जाता था। इससे पहले प्रद्युम्न हत्याकांड में एसआइटी द्वारा गिरफ्तार रेयान इंटरनेशनल स्कूल भोंडसी का बस हेल्पर रहा अशोक बुधवार को अपने घर घामडोज पहुंचा। घर में परिवार के सदस्य उसका बेसब्री से इंतजार कर रहे थे। घामडोज पहुंचते ही उसे देखने के लिए भीड़ लग गई।

आठ सितंबर को जिन लोगों की आंखों में अशोक के प्रति नफरत दिख रही थी, आज उन्हीं आंखों में दया के भाव नजर आए। मीडिया से बचाने के लिए अशोक को उसके एक संबंधी खजान के घर में ले जाया गया। मीडिया कर्मी उससे बातचीत करने की कोशिश करने लगे तो अशोक को लोगों ने कमरे के अंदर कर दिया। मां से कहा- मैंने बच्चे को नहीं मारा

वहां उसकी मां केला देवी पहुंची। मां को देखते ही अशोक उनके गले लग गया और फफक पड़ा। रुंधे गले से उसने कहा: मां, मैंने बच्चे को नहीं मारा। हमें तो फंसाया गया। हम सीबीआइ व मीडिया की वजह से बच गए। करीब दस मिनट बाद अशोक की पत्नी ममता बच्चों के साथ पहुंची तो अशोक ने दोनों बच्चों को गले लगा लिया, और उन्हें दस मिनट तक दुलारता रहा।

दूसरे गेट से निकाला गया

जेल के बाहर दोपहर से ही मीडिया कर्मी एकत्र थे। मीडिया अशोक से कोई सवाल-जवाब नहीं करे, इसके लिए उसके वकील व परिजनों से पुलिस व जेल के सुरक्षा कर्मियों के साथ प्लान बना उसे मुख्य गेट की बजाए दूसरे गेट से निकाला। गांव में भी जब मीडिया कर्मियों ने अशोक को घेर लिया तो उसने शाल से मुंह ढक लिया गया। मन की बात उसने सिर्फ परिवार के लोगों को बताई।

अशोक की नम आंखों ने बयां कर दी सच्चाई

वहीं, रेयान इंटरनेशनल स्कूल के बस सहायक और प्रद्युम्न हत्याकांड के आरोपी अशोक के अधिवक्ता मोहित वर्मा का मानना है कि कौन अपराधी है, कौन नहीं, यह सच्चाई आंखें आसानी से बता देती हैं।

मोहित वर्मा कहते हैं, ‘आंखों में सच्चाई देखने के लिए देखने वालों का मन भी साफ होना चाहिए। यदि मन में कोई छल कपट है तो फिर सच्चाई नहीं दिखाई देगी।

प्रद्युम्न की हत्या के आरोप में बस सहायक अशोक को गिरफ्तार किया गया। उसका चेहरा देखकर ही करोड़ों लोगों के मुख से यही निकला कि यह आरोपी नहीं है।

पुलिस वाले भी इसी समाज से आते हैं फिर उन्हें क्यों नहीं महसूस हुआ? इसके पीछे निश्चित रूप से कुछ न कुछ खेल है। यह सच्चाई सामने आनी चाहिए। सीबीआइ द्वारा अशोक को जमानत दिए जाने के बाद एसआइटी के खिलाफ जांच को लेकर प्रयास शुरू किया जाएगा। मोहित वर्मा ने कहा कि गुरुग्राम एवं सोहना के अधिवक्ताओं ने आरोपी के मामले को लेने से क्यों इन्कार किया, इस विषय पर वह नहीं जाएंगे। न्याय पाने का अधिकार सभी को है। दोषी कौन है, इसका फैसला अदालत में होता है।

जेल में अशोक से जैसे ही मुलाकात हुई, वैसे ही उसकी आंखों ने पूरी सच्चाई बयां कर दीं। उसकी आंखों के आंसू बता रहे थे कि उसे किस कदर आरोप स्वीकार करने के लिए मजबूर किया गया। उसका गुनाह सिर्फ इतना था कि वह बच्चों के बाथरूम में चला गया।

संयोग से घटना से ठीक पहले बाथरूम से निकला था। उसी दौरान जब एक छात्र भी बाथरूम में आता फिर एसआइटी ने उससे पूछताछ करना मुनासिब क्यों नहीं समझा। यह पूरी तरह सोची समझी साजिश के तहत किया गया। अशोक के खिलाफ मनगढंत कहानी बना दी गई।

प्रद्युम्न के पिता की जिद ने सीबीआइ जांच करा दी

मोहित वर्मा ने कहा कि प्रद्युम्न के पिता वरुणचंद ठाकुर की जिद की वजह से जांच एसआइटी से सीबीआइ के पास चली गई। यदि जांच सीबीआइ के पास नहीं जाती तो सच्चाई सामने नहीं आती। सीबीआइ ने बस सहायक अशोक को निर्दोष मान लिया है।

बस सहायक अशोक का मामला हाथ में लेकर आत्मिक संतुष्टि

रोहतक निवासी 26 वर्षीय मोहित वर्मा कहते हैं कि बस सहायक अशोक का मामला हाथ में लेकर आत्मिक संतुष्टि मिली है। इससे आगे बढ़ने की प्रेरणा भी मिली है। विश्वास मजबूत हुआ है। सौ दोषी भले ही छूट जाएं, लेकिन एक निर्दोंष नहीं फंसना चाहिए।

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