चीन की चिंता बढ़ाएगा भारत और सिंगापुर का समझौता

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नई दिल्ली
भारत और सिंगापुर के बीच एक ऐसा समझौता हुआ है, जिससे चीन की चिंता बढ़ सकती है। भारत के नौसैनिक जहाज अब सिंगापुर से फ्यूल ले सकते हैं। यह इसलिए अहम है कि शिपिंग रूट से भारत और सिंगापुर, दोनों के कारोबार के लिए दक्षिण चीन सागर अहम है, जिसे चीन अपना जल क्षेत्र होने का दावा करता है। भारत और सिंगापुर के रक्षा मंत्रियों के बीच बुधवार को यहां बातचीत हुई। इसमें दोनों देशों की नौसेनाओं के सहयोग पर अग्रीमेंट हुआ। इसके तहत दोनों देश एक दूसरे की नौसैनिक सुविधाओं का इस्तेमाल कर सकेंगे। लॉजिस्टिक सपॉर्ट भी मिलेगा। सिंगापुर के रक्षा मंत्री एन.ई.हेन ने कहा, ‘हम अपने नौसैनिक अड्डे पर भारत के नौसैनिक जहाजों को आते-जाते देखना चाहेंगे। दोनों देशों के रक्षा मंत्रियों ने समुद्री आवाजाही की आजादी और अंतरराष्ट्रीय कानून के मुताबिक कारोबार को जरूरी बताया है। दोनों देशों की नौसेनाएं मलक्का स्ट्रेट में सहयोग बढ़ाएंगी। इस गलियारे के दोनों तरफ भारत और सिंगापुर का रोल बेहद अहम है। चीन का ज्यादातर तेल आयात मलक्का स्ट्रेट के संकरे समुद्री गलियारे से होता है।’सिंगापुर के चीन से अच्छे कारोबारी संबंध हैं, जबकि वह सैन्य नजरिये से अमेरिका के करीब है। समुद्री इलाकों में चीन के कारण मिल रही चुनौतियों को देखते हुए भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया को साथ आते देखा जा रहा है। इन चारों देशों के साथ क्या सिंगापुर भी आ सकता है, इस अटकल को रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने खारिज नहीं किया, लेकिन उन्होंने कहा कि अभी हम सिंगापुर के साथ द्विपक्षीय सहयोग चाहते हैं और दक्षिण पूर्व एशियाई देशों के संगठन आसियान के साथ भी सहयोग बढ़ाना चाहते हैं।सिंगापुर आसियान का सदस्य देश है। भारत इन दिनों आसियान के दूसरे सदस्यों वियतनाम, म्यांमार, मलयेशिया और इंडोनेशिया से भी रक्षा संबंध बढ़ा रहा है। चीन और दक्षिण पूर्व एशियाई देशों (फिलिपींस, ब्रुनेई, मलयेशिया और विएतनाम) के बीच इस पर विवाद है और सिंगापुर विवाद सुलझाने की कोशिश कर रहा है। सिंगापुर में अगले साल शंगरीला डायलॉग में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी हिस्सा लेंगे और हिंद महासागर क्षेत्र पर भारत का नजरिया रखेंगे। एशिया प्रशांत क्षेत्र के करीब 50 देशों की मौजूदगी वाले इस सालाना सम्मेलन को डिफेंस डिप्लोमैसी के लिए बेहद अहम समझा जाता है, लेकिन भारत ने इसमें हिस्सा नहीं लिया था

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