हॉकी विश्व लीग फाइनल: विश्व स्तर पर छाप छोड़ने उतरेगा भारत, ऑस्ट्रेलिया से पहला मुकाबला

0
172

एशियाई हॉकी की सिरमौर भारतीय टीम शुक्रवार से यहां शुरू हो रहे विश्व हॉकी लीग फाइनल के तीसरे और आखिरी सत्र में उतरेगी तो उसका इरादा दुनिया की दिग्गज अंतरराष्ट्रीय टीमों के बीच अपने प्रदर्शन की छाप छोड़ने का होगा। भारत हॉकी विश्व लीग फाइनल में पूल बी में पिछली चैंपियन और विश्व चैंपियन ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ पहला मैच खेलेगा।

कुछेक मैचों को छोड़ दें तो उपमहाद्वीप में भारतीय टीम का दबदबा रहा है और हाल ही में ढाका में भारत ने एशिया कप में खिताबी जीत दर्ज की। 8 बार के ओलिंपिक चैंपियन भारत के पास इस टूर्नमेंट के जरिये यह साबित करने का सुनहरा मौका है कि उसमें एशिया के बाहर भी अपना दबदबा कायम करने का माद्दा है।दुनिया की दूसरे नंबर की टीम ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ भारत को पिछले कुछ समय में ज्यादा कामयाबी नहीं मिली है। ऑस्ट्रेलिया ने उसे चैंपियंस ट्रोफी, अजलन शाह और राष्ट्रमंडल खेलों में मात दी। 8 देशों के इस टूर्नमेंट में पहले ही मैच में ऑस्ट्रेलिया के रूप में भारत को सबसे कठिन चुनौती मिली है। भारत के नए कोच शोर्ड मारिन की भी यह पहली असल परीक्षा होगा, जिन्होंने दो महीने पहले ही रोलेंट ओल्टमेंस की जगह ली है।

मारिन एशिया कप में कामयाब रहे लेकिन हाकी लीग फाइनल उनके लिए बिल्कुल अलग चुनौती होगी। ओल्टमेंस को हटाते समय भारतीय हॉकी के हुक्मरानों ने स्पष्ट कर दिया था कि एशियाई स्तर पर सफलता कोई मानदंड नहीं होगी और विश्व स्तर पर अच्छा प्रदर्शन करना होगा।

मारिन ने पद संभालने के बाद से खेलने की शैली या टीम की रणनीति में ज्यादा बदलाव नहीं किए हैं। उन्होंने खिलाड़ियों को यह तय करने का अधिकार दिया है कि वह किस शैली से खेलना चाहते हैं। उन्होंने पीछे की तैयारियों पर फोकस किया है जिससे खिलाड़ियों पर ज्यादा जिम्मेदारी सौंपी गई है। एशिया कप में इसका फायदा मिला और 10 साल बाद भारत ने मलयेशिया को 2-1 से हराकर खिताब जीता।

अगले साल एशियाई खेल, राष्ट्रमंडल खेल और विश्व कप जैसे कई टूर्नमेंट होने हैं लिहाजा मारिन के लिए यह टीम की ताकतों और कमजोरियों को आंकने का सुनहरा मौका होगा। भारत ने 2015 में रायपुर में हुए पिछले सत्र में कांस्य पदक जीता था और टीम इस बार पदक का रंग बदलना चाहेगी। मनप्रीत सिंह की अगुवाई में भारत के पास युवा और अनुभवी खिलाड़ियों का अच्छा मिश्रण है। हरमनप्रीत सिंह, सुमित, दिप्सन टिर्की, गुरजंत सिंह और वरुण कुमार के रूप में युवाओं की ऐसी ब्रिगेड है जिसने जूनियर विश्व कप में भारत को खिताबी जीत दिलाई थी।

रुपिंदर पाल सिंह और बीरेंद्र लाकड़ा की वापसी से डिफेंस मजबूत हुआ है। अमित रोहिदास ने भी 2017 हॉकी इंडिया लीग में उम्दा प्रदर्शन के दम पर वापसी की है। दूसरी ओर ऑस्ट्रेलियाई टीम नए कोच कोलिन बैच के साथ आई है जिन्होंने न्यू जीलैंड के साथ पिछले कुछ साल में बेहतरीन प्रदर्शन किया है।

ऑस्ट्रेलियाई टीम अपने आक्रामक खेल के लिए मशहूर है और यहां उम्दा प्रदर्शन करके अपनी उपलब्धियों में एक तमगा और जोड़ना चाहेगी। विश्व, चैंपियंस ट्रोफी, ओशियाना कप, हॉकी विश्व लीग और राष्ट्रमंडल खेल विजेता ऑस्ट्रेलियाई टीम का अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दबदबा रहा है, लेकिन रियो ओलिंपिक में वह छठे स्थान पर रही।

भारत पूल बी में है जिसमें आस्ट्रेलिया के अलावा इंग्लैंड और जर्मनी है जबकि पूल ए में ओलिंपिक चैंपियन अर्जेंटीना, नीदरलैंड, बेल्जियम और स्पेन है। दिन के अन्य मैच में जर्मनी का सामना इंग्लैंड से होगा।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here