नई दिल्ली (बिजनेस डेस्क)। हाल ही में लॉन्च हुआ पेटीएम बैंक अब अपने विस्तार की योजना बना रहा है। इस योजना के तहत वह आने वाले तीन सालों में 3000 करोड़ रुपए का निवेश करेगा ताकि वो अपने ऑफलाइन-वितरण नेटवर्क का विस्तार कर पाए। इसके लिए भरोसेमंद स्थानीय साझेदारों की मदद से नगदी लेन-देन के केंद्र स्थापित किए जाएंगे। पेटीएम देशभर में 1,00,000 “पेटीएम का एटीएम” जोड़ने की योजना बना रहा है और इसके पास मौजूदा समय में 3,000 स्वीकृत आउटलेट्स की ताकत है। आपको बता दें कि कंपनी ने बीते महीने ही अपने पेमेंट बैंक को लॉन्च किया है, जो कि सभी तरह के ऑनलाइन लेनदेन पर कोई भी शुल्क नहीं लेता है। साथ ही इसमें खाते में मिनिमम बैलेंस रखने को कोई अनिवार्यता भी नहीं रहती है। पहले चरण में पेटीएम दिल्ली एनसीआर, लखनऊ, कानपुर, इलाहाबाद, वाराणसी और अलीगढ़ समेत चुनिंदा शहरों में 3,000 पेटीएम का एटीएम लगा रहा है। ये एटीएम पड़ोस की दुकानों जैसे होंगे जो पेटीएम के व्यावसायिक प्रतिनिधि के रूप में काम करेंगे और बचत खाता खोलने, पैसा जमा करने या निकालने जैसी सुविधाएं देगा। पेटीएम पेमेंट्स बैंक की एमडी रेणू सत्ती ने कहा, “पेटीएम का एटीएम बैंकिंग आउटलेट हरेक भारतीय के लिए बैंकिंग सुविधाओं की सुलभता सुनिश्चित करने की दिशा में उठाया गया कदम है। यह हमारे ग्राहकों को सक्षम बनाएगा कि वो अपने निकटतम एवं भरोसेमंद आउटलेट्स पर जाकर अपना खाता खुलवा सकेंगे, पैसे जमा और निकाल सकेंगे। साथ ही वो यहां पर अपना आधार भी लिंक करा पाएंगे।”

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नई दिल्ली (बिजनेस डेस्क)। प्रमुख ग्लोबल रेटिंग एजेंसी फिच ने भारत की आर्थिक विकास दर का अनुमान घटा दिया है। एजेंसी ने चालू वित्त वर्ष के लिए इस अनुमान को 6.9 से घटाकर 6.7 फीसद कर दिया है। रेटिंग एजेंसी का कहना है कि हाल की कुछ तिमाहियों में अर्थव्यवस्था में सुधार की दर उम्मीद से कमतर रही है।अपने ग्लोबल इकोनॉमिक आउटलुक (जीईओ) में फिच ने अगले वित्त वर्ष के लिए भी देश की विकास दर के अनुमान को 7.4 से 7.3 फीसद कर दिया है। हालांकि सरकार की ओर से लगातार उठाए जा रहे आर्थिक सुधार के कदमों के चलते अगले दो वर्षो विकास दर में तेजी का अनुमान जताया गया है। फिच ने जीईओ में कहा, ‘जुलाई-सितंबर तिमाही के दौरान भारत की आर्थिक विकास दर 6.3 फीसद रही। यह इससे पिछली तिमाही में तीन साल के निचले स्तर 5.7 फीसद तक गिर गई थी। इसके बावजूद विकास दर में सुधार उम्मीद से कम है। इसीलिए वृद्धि दर के अनुमान को कम किया गया है। नोटबंदी जैसे अप्रत्याशित कदम और वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) से जुड़ी परेशानियों के चलते हाल की तिमाहियों में विकास दर लगातार निराशाजनक रही है।’लगातार पांच तिमाहियों की गिरावट के बाद चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में विकास दर में तेजी आई है। 30 सितंबर को समाप्त इस तिमाही में मैन्यूफैक्चरिंग सेक्टर की गतिविधियों में तेज सुधार से अर्थव्यवस्था की रफ्तार में बढ़ोतरी हुई। रेटिंग एजेंसी ने कहा कि आर्थिक सुधार की दिशा में सरकार के कदमों से विकास परिदृश्य में सुधार होगा। उद्यमियों का भरोसा बढ़ेगा। अगले दो साल में बैंकों में 2.1 लाख करोड़ की पूंजी डालने संबंधी सरकारी योजना से बैंकों की कर्ज देने की क्षमता बढ़ेगी। इसके अलावा 6.9 लाख करोड़ रुपये की सड़क निर्माण परियोजनाओं से निवेश को प्रोत्साहन मिलेगा। महंगाई भी नियंत्रण में बनी हुई है।बेहतर रहेगी विश्व अर्थव्यवस्था की रफ्तारबीती तिमाही में जीडीपी की वृद्धि दर बढ़ने के बावजूद फिच ने भारत की विकास दर के लिए अपना अनुमान कम कर दिया है। एजेंसी का कहना है कि अर्थव्यवस्था में सुधार उम्मीद के अनुरूप नहीं है।

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