हूती विद्रोहियों ने यमन के पूर्व राष्ट्रपति सालेह के मारे जाने का दावा किया

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सना यमन में विद्रोहियों के गठबंधन के टूटने के बाद सना में भीषण मुठभेड़ होने के बीच हूती विद्रोहियों ने पूर्व राष्ट्रपति अली अब्दुल्ला सालेह के मारे जाने का दावा किया है। हालांकि, विद्रोहियों के इस दावे की अभी तक स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है। सना में सालेह के करीबी बलों और ईरान समर्थित शिया विद्रोहियों के बीच भारी गोलीबारी हो रही है। तीन साल पहले दोनों ने संयुक्त रूप से सना के एक खासे हिस्से पर कब्जा कर लिया था।गठबंधन टूटने के बाद राष्ट्रपति ने अपने सैन्य बलों को फिर से राजधानी सना पर कब्जा पाने का आदेश दिया है। उनकी सरकार को राजधानी से हटना पड़ा था। हूती नियंत्रित आंतरिक मंत्रालय ने सालेह की मौत की अल-मसीराह टेलिविजन स्टेशन पर घोषणा की। सना में ईरान के दूतावास को भी जला दिया गया। हालांकि अभी तक यह साफ नहीं हो पाया है कि दूतावास को जलाने के पीछे किस संगठन का हाथ है। बता दें कि यमन में जारी गृह युद्ध ने अभी तक 10 हजार से ज्यादा लोगों की जान ले ली है।पिछले सप्ताह गठबंधन टूटने के साथ राजधानी में भीषण जंग शुरू हो गई थी। विश्वासघात का आरोप लगाया गया और पूर्व राष्ट्रपति सालेह ने विद्रोहियों से लड़ने के लिए सऊदी अरब की अगुवाई वाले गठबंधन से संपर्क साधा था। दक्षिणी शहर अदन से सरकार चला रहे राष्ट्रपति अबेदरब्बो मंसूर हादी ने इस मौके का फायदा उठाया। राष्ट्रपति कार्यालय के एक सूत्र ने बताया, राष्ट्रपति ने (सना के पूर्व) मारिक में मौजूद उपराष्ट्रपति अली मोहसेन अल अहमर को सैन्य टुकड़ियों को फिर सक्रिय करने और राजधानी की ओर बढ़ने का आदेश दिया है। UN नें संघर्षविराम की अपील की संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुतारेस ने मौजूदा मानवीय संकट के मद्देनजर यमन में संघर्षविराम लागू करने की फिर से अपील की है। गुतारेस के प्रवक्ता स्टीफन दुजारिक ने कहा कि पिछले कई दिनों में गुतारेस संघर्ष में शामिल सभी पक्षों से अनुरोध करते रहे हैं कि वह जमीनी और हवाई हमले बंद करें और वह पिछले कुछ दिनों में सशस्त्र संघर्ष में तेजी से वृद्धि को लेकर काफी चिंतित हैं। सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन से देश को अलग-थलग करने की नीति खत्म करने की अपील दुहराते हुए उन्होंने कहा, एम्बुलेंस और मेडिकल टीमें घायलों का परीक्षण नहीं कर पा रही हैं और लोग भोजन खरीदने के लिए घरों से बाहर नहीं जा पा रहे हैं। सहायता कार्यकर्ता यात्रा करने और जीवन-रक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण कार्यक्रमों को चलाने में असमर्थ हैं, वह भी ऐसे वक्त में जब लाखों यमन नागरिक जीवित रहने के लिए सहायता पर निर्भर हैं।

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