‘अयोध्या’ को लगता है रामजी करेंगे बेड़ा पार!

0
239

शिवम भट्ट, अयोध्या अयोध्या का जिक्र आते ही लोगों के दिमाग में सबसे पहले दो छवियां उभरकर सामने आती हैं। हिंदू धर्म में जहां लोग इसे भगवान राम की जन्मभूमि के तौर पर जानते हैं, तो वहीं दूसरी ओर इसे राम मंदिर-बाबरी मस्जिद विवाद के लिए भी जाना जाता है। अयोध्या मामले पर सुप्रीम कोर्ट में 5 दिसंबर से नियमित सुनवाई शुरू हो चुकी है और अब सबकी निगाहें इस बात पर हैं कि अंतिम फैसला जब भी आएगा, वह क्या होगा? अयोध्या की सड़कों पर निकलेंगे तो आपको एक अलग ही माहौल देखने को मिलेगा। कभी आपको यह हरिद्वार-काशी जैसा अनुभव देगा, तो कभी आपको यहां का अपना खास रंग दिखेगा। लोगों से बात करने पर ज्यादातर लोगों का यही कहना था कि यह विवाद जल्दी निपटे और फैसला राम मंदिर के पक्ष में आए। अयोध्या विवादः जानिए क्या है पूरा मामला लोगों का मानना, टूरिज़म को मिलेगा बढ़ावा राम मंदिर के पक्ष में फैसला आने की इच्छा के पीछे आस्था तो एक कारण दिखा ही, मगर सबसे बड़ा कारण था उनकी एक उम्मीद। उम्मीद यह कि अगर यहां राम मंदिर बना, तो उसके बहाने उनके जीवन स्तर में सुधार आएगा। रोजगार के मौके बढ़ेंगे और टूरिज़म के चलते यहां बिजली-पानी और स्वास्थ्य से जुड़ीं बेहतर सुविधाएं होंगी। अयोध्या विवाद के दौरान पनपा था यावर और हेम का प्यार हनुमान गढ़ी के बाहर 30 साल से प्रसाद बेचने वाली दयावती से जब पूछा गया कि उन्हें अयोध्या में किस चीज की कमी महसूस होती है, तो उन्होंने हंसते हुए सीधा सा जवाब दिया राम मंदिर। मगर जब उन्हें बताया गया कि हमारा सवाल बिजली-पानी को लेकर है, तब उन्होंने कहा कि हां, यहां बिजली-पानी की थोड़ी बेहतर व्यवस्था होनी चाहिए और सबको रोजगार मिलना चाहिए।हनुमान गढ़ी की तस्वीर तांबे-स्टील के बर्तन बेचने वाले आशीष ने भी अयोध्या में राम मंदिर की इच्छा जताई। उन्होंने बताया, ‘राम मंदिर बनने से सबसे बड़ा फायदा होगा कि बाहर से लोग यहां आएंगे, जिससे यहां के युवाओं को रोजगार मिलेगा। टूरिस्ट के सामने अच्छी छवि हो, इसलिए बिजली-पानी और सड़कों की अच्छी व्यवस्था होगी। ये तीन मुस्लिम भी करते हैं रामलला की सेवा अयोध्या के एक युवा समाजसेवी जीशान मेहंदी ने कहा कि दोनों समाज के लोग अब कोई ना कोई फैसला चाहते हैं, चाहे वह राम मंदिर के हक में हो या बाबरी मस्जिद के। उन्होंने कहा कि अगर यहां राम मंदिर बनता है, तो जाहिर तौर पर पर्यटन के चलते बिजली-पानी और अयोध्या की सबसे बड़ी समस्या गंदगी से निजात मिलेगी।उधर मस्जिद काज़िया के इमाम मौलाना जलाल अशरफ ने कहा कि उन्हें इस विवाद में खास रुचि नहीं है, मगर जो भी फैसला हो वह अयोध्या के हित में हो। उन्होंने कहा कि फैसले के बाद यहां के लोगों को रोजगार देना और खराब सड़कें सही करवाना सरकार की पहली प्राथमिकता होनी चाहिए।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here