शरद यादव के निष्कासन पर राजनीति शुरू

0
7

शरद गुट कोर्ट जाएगा, नीतीश गुट खाली पद भरने की तैयारी में विशेष संवाददाता, नई दिल्ली : जेडीयू के बागी नेता और सांसद शरद यादव और अली अनवर की राज्यसभा सदस्यता खत्म होने पर सियासत तेज हो गई है। जेडीयू के नीतीश गुट ने इसे सही फैसला बताते हुए कहा कि शरद को अब आरजेडी में चले जाना चाहिए। वहीं शरद गुट ने मामले को कोर्ट में ले जाने की धमकी दी है। आरजेडी इस मामले में शरद के साथ खड़ा दिख रही है। बाकी विपक्षी दलों ने भी शरद यादव को समर्थन दिया। शरद यादव का राज्यसभा में अभी 5 साल टर्म बाकी था तो अली अनवर को टर्म अगले साल अप्रैल में समाप्त हो रहा था।सीन करते वक्‍त डगमगा रहे थे शर्मिला टैगोर के पांवआरजेडी ने शरद के निष्कासन पर कहा कि उनका कद इतना बड़ा है कि वह किसी पद के मोहताज नहीं हैं। उनकी पहचान उनकी सिद्घांत और उनकी विचारधारा रही है। पार्टी प्रवक्ता मृत्यंजुय तिवारी ने राज्यसभा सचिवालय के इस फैसले को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि शरद ने जिन लोगों को राजनीति में चलना सिखाया, वही लोग उनकी सदस्यता समाप्त करने में लगे रहे। वहीं जेडीयू प्रवक्ता नीरज कुमार ने मंगलवार को शरद यादव को नसीहत देते हुए कहा कि अब केवल आरजेडी अध्यक्ष लालू प्रसाद जिंदाबाद कहने से काम नहीं चलेगा बल्कि उन्हें लालू के पुत्र तेजस्वी, तेजप्रताप और राबड़ी देवी का भी गुणगान करना होगा। मालूम हो कि शरद यादव और अली अनवर को सोमवार को राज्यसभा से अयोग्य करार दिया गया। उनकी सदस्यता तत्काल प्रभाव से रद्द कर दी गई। नीतीश कुमार के बीजेपी से हाथ मिलाने के बाद से ये दोनों नेता नाराज चल रहे थे और पार्टी से बगावत कर दी थी। वहीं शरद यादव ने मंगलवार को कहा कि लोकतंत्र को बचाने के लिए अपनी लड़ाई जारी रखेंगे। सूत्रों के अनुसार इस मामले में शरद यादव कोर्ट की शरण जाने की तैयारी में है।शरद पर नायडू के फैसले का असर होगा : येचुरीसीपीएम के महासचिव सीताराम येचुरी ने शरद यादव को राज्यसभा की सदस्यता से अयोग्य घोषित करने के फैसले के नकारात्मक असर के प्रति आगाह करते हुए कहा कि सभापति के फैसलों को सवालों से ऊपर होना चाहिए। येचुरी ने ट्वीट कर अपनी बात रखी। येचुरी ने नायडू के फैसले पर सवाल उठाते हुए कहा कि जिस तेजी से यह फैसला किया गया, उससे संशय पैदा होता है। एक अन्य ट्वीट में उन्होंने कहा कि इस तरह के तमाम अन्य मामले लोकसभा में एक साल से अधिक समय से लंबित हैं। इससे साफ है ऐसे मामलों में राजनीतिक झुकाव अहमियत रखता है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here