अरब, यूरोप, संयुक्त राष्ट्र….ट्रंप के यरुशलम वाले फैसले की चौतरफा निंदा

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लंदन अरब और मुस्लिम देशों ने बुधवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप के यरुशलम को इजरायल की राजधानी के तौर पर मान्यता दिए जाने के फैसले की कड़ी निंदा की है और इसे फिलिस्तिनियों के साथ ही इस पूरे इलाके में हिंसा भड़काने वाला कदम बताया है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय का कहना है कि वॉशिंगटन शांति स्थापित करने के लिए मध्यस्थ की भूमिका निभाने वाले अपने वादे से पीछे हट रहा है। यूरोपियन यूनियन और संयुक्त राष्ट्र ने भी अमेरिकी दूतावास को तेल अवीव से यरुशलम ले जाने के फैसले के बाद किसी भी तरह की स्थिति पैदा होने की आशंका जाहिर की है। इन दोनों संगठनों का कहना है कि इससे इजरायल-फिलिस्तीन के बीच वापस अशांति पैदा हो सकती है। अमेरिका के बड़े सहयोगियों ने भी दशकों पुरानी अमेरिकी नीती में आए इस बदलाव के खिलाफ आवाज उठाई है। विरोध के बीच डॉनल्ड ट्रंप का ऐलान, यरुशलम इजरायल की राजधानी फ्रांस ने इस ‘एकतरफा’ फैसले को ठुकरा दिया है और पूरे क्षेत्र में शांति की अपील की है। ब्रिटेन का कहना है कि इस कदम से शांति प्रयासों में मदद नहीं मिलेगी और आखिरकार यरुशलम को इजरायल और भविष्य के फिलिस्तीन को साझा करना ही पड़ेगा। जर्मनी ने कहा है कि यरुशलम की स्थिति दोनों देशों को ध्यान में रखकर ही सुलझ सकती है। यरुशलम विवाद की क्या है पूरी कहानी इन सबसे उलट, इजरायल ने राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप के फैसले की सराहना की है। इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने एक रिकॉर्डेड विडियो मेसेज में कहा कि यह शांति की दिशा में एक अहम कदम है और इजरायल की स्थापना के पहले दिन से ही यह हमारा लक्ष्य था। दूसरी तरफ फिलिस्तीन के राष्ट्रपति महमूद अब्बास ने कहा है कि इस फैसले के साथ ही अमेरिका ने शांति प्रक्रिया के दौरान मध्यस्थ की भूमिका से पीछे हटने की घोषणा कर दी है। फिलिस्तीन के चरमपंथी समूह हमास ने इसके खिलाफ प्रदर्शन का ऐलान किया है।

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