वोडाफोन से 11 हजार करोड़ टैक्स की मांग, सुप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार की याचिक पर होगी सुनवाई

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धनंजय महापात्र, नई दिल्ली
सुप्रीम कोर्ट केंद्र सरकार की उस याचिका पर आज सुनवाई करेगा जिसमें 11000 करोड़ रुपये टैक्स की मांग के बाद वोडाफोन की ओर से शुरू की गई डुअल आर्बिट्रेशन प्रॉसीडिंग्स को लेकर दिल्ली हाई कोर्ट के फैसले को चुनौती दी गई है। 2012 में सुप्रीम कोर्ट में मुकदमा हारने के बाद केंद्र सरकार ने टैक्स कानून में संशोधन कर उसे बैक डेट से लागू कर दिया। सरकार ने इसी संशोधित कानून के तहत वोडाफोन से बतौर टैक्स 11000 करोड़ रुपये की मांग की थी जिसके बाद वोडाफोन की याचिका पर दिल्ली हाई कोर्ट ने केंद्र सरकार को डुअल आर्बिट्रेशन प्रॉसीडिंग्स में शामिल होने का आदेश दिया। वोडाफोन सौदे को लेकर हचिसन पर 32,320 करोड़ रुपये का दावा अडिशनल सॉलिसिटर जनरल मनिंदर सिंह ने चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अगुवाईवाली सुप्रीम कोर्ट की बेंच को बताया कि वोडाफोन ने भारत-नीदरलैंड द्विपक्षीय निवेश संरक्षण समझौते (बीआईपीए) का हवाला देकर सबसे पहले अप्रैल 2012 में आर्बिट्रेशन शुरू किया था। सिंह ने कहा, ‘भारत-नीदरलैंड्स बीआईपीए के तहत स्थापित आर्बिट्रेशन प्रॉसिंडिंग्स अब भी चल रही है, इसलिए वोडाफोन ग्रुप पीएलसी और वोडाफोन कन्सॉलिडेटिड होल्डिंग्स ने एक ऐसे कथित विवाद को सुलझाने के लिए केंद्र सरकार को भारत-नीदरलैंड्स बीआईपीए के तहत नोटिस भेजा है जिस पर भारत-नीदरलैंड्स बीआईपीए के तहत ही गठित आर्बिट्रल ट्राइब्युनल में सुनवाई चल रही है। वोडाफोन ग्रुप पीएलसी और वोडाफोन कन्सॉलिडेटिड होल्डिंग्स दोनों ही वोडाफोन इंटरनैशनल होल्डिंग्स बीवी (वीआईएचबीवी) के ही हिस्से हैं।’
सुप्रीम कोर्ट की बेंच वोडाफोन की याचिक पर शीघ्र सुनवाई पर सहमत हो गया है। केंद्र सरकार की शिकायत है कि उसने भारत-नीदरलैंड्स बीआईपीए के तहत विवाद की सुनवाई के दौरान ही भारत-नीदरलैंड्स बीआईपीए के तहत दूसरी आर्बिट्रेशन प्रॉसिडिंग्स को दिल्ली हाई कोर्ट में चुनौती दी थी। सरकार ने कहा कि हाई कोर्ट पहले तो वोडाफोन को भारत-नीदरलैंड्स बीआईपीए के तहत कोई कार्रवाई करने से रोका था, लेकिन बाद में आदेश आया कि दोनों पक्ष भारत-नीदरलैंड्स बीआईपीए के तहत एक प्रिजाइडिंग आर्बिट्रेटर की नियुक्ति की प्रॉसीडिंग्स में शामिल होने के लिए स्वतंत्र हैं। केंद्र ने कहा कि इस आदेश की वजह से वोडाफोन की ओर से सरकार के खिलाफ एक ही विवाद में एक ही बार दो अलग-अलग आर्बिट्रल ट्राइब्युनल्स में सुनवाई चलेगी। 22 अक्टूबर 2010 को टैक्स डिपार्टमेंट ने वीआईएचबीवी को इनकम टैक्स ऐक्ट के सेक्शन 195 के तहत हचिंसन टेलिकम्यूनिकेशन्स इंटरनैशनल (एचटीआईएल, केमन आइलैंड्स कंपनी) को 11,076 मिलियन डॉलर का पेमेंट करने से पहले टैक्स नहीं काटने के लिए ‘असेसी-इन-डिफॉल्ट’ घोषित कर दिया। विभाग ने 7,900 करोड़ रुपये के कैपिटल गेन्स समेत कुल 11,218 करोड़ रुपये का टैक्स निर्धारित किया।

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