कैडेवर से बच्चेदानी का ट्रांसप्लांट भी मुमकिन

0
163

फाइल फोटो
लखनऊ
केजीएमयू में जल्द ही हाथ, पैर, बच्चेदानी और एनल ट्रांसप्लांट भी संभव हो सकेगा। इसके लिए केजीएमयू के डॉक्टर टोक्यो यूनिवर्सिटी के डिपार्टमेंट ऑफ रीकन्स्ट्रक्टिव सर्जरी के साथ मिलकर काम कर रहे हैं। सर्जिकल गैस्ट्रोएंट्रॉलजी विभाग में बुधवार को हुए एक दिवसीय कंटिन्यूइंग मेडिकल एजुकेशन (सीएमई) में भी इस पर चर्चा हुई।

इंटरनेशनल कोलैबोरेटिव रिसर्च ऑन एनोरेक्टल ट्रांसप्लांटेशन पर हुई सीएमई में विभाग के हेड डॉ. अभिजीत चंद्रा ने बताया कि रिसर्च के लिए दोनों संस्थानों के बीच जल्द ही एमओयू भी होगा। सीएमई में यूनिवर्सिटी ऑफ टोक्यो के डिपार्टमेंट ऑफ रीकन्स्ट्रक्टिव सर्जरी से आए डॉ. जुन अराकी ने भी हिस्सा लिया। वह कैडेवर से हाथ-पैर के अलावा एनल ट्रांसप्लांट भी कर चुके हैं। उन्होंने जापान में कैडेवर से हो रहे विभिन्न अंगों के ट्रांसप्लांट पर चर्चा की।

डॉ. जुन अराकी ने बताया कि वह सुपर माइक्रोस्कोप के जरिए कई अंगों का ट्रांसप्लांट करने में सफल रहे हैं। वह कैडेवर से अंग लेकर जीवित मनुष्य में नसों के साथ-साथ नर्व को भी जोड़ते हैं। इससे उस अंग का मूवमेंट संभव हो जाता है। डॉक्टरों ने सुपर माइक्रोस्कोप के जरिए 0.4 मिलीमीटर से भी पतली नर्व को जोड़ने में सफलता हासिल की है। ऐसे में अब किसी भी अंग का ट्रांसप्लांट आसानी से किया जा सकता है। डॉ. जुन अब तक 12 लोगों पर यह रिसर्च कर चुके हैं।

केजीएमयू में हो रहा एनल रीकन्स्ट्रक्शन
डॉ. जुन अराकी केजीएमयू में हो रहे एनल रीकन्स्ट्रक्शन तकनीक पर भी शोध करेंगे। केजीएमयू के डॉ. अभिजीत चंद्रा ने बताया कि एनल रीकन्स्ट्रक्शन के लिए वह पेट में पहले से ही मौजूद प्य्लोरस (अमाशय के निचला द्वार) को एनल कैनाल के नीचे से जोड़ देते हैं। इससे एनल मोशन नियंत्रित किया जा सकता है।

बताया कि अक्सर ट्रॉमा इंजरी या कैंसर से मानव मल का रास्ता खराब हो जाता है। इसके साथ गर्भवती महिलाओं और नवजात बच्चों में भी यह दिक्कत आती है। इसे सर्जरी से ठीक किया जा सकता है। अभी तक केजीएमयू में 22 मरीजों का एनल रीकन्स्ट्रक्ट किया जा चुका है। इनमें 20 मरीज पूरी तरह स्वस्थ हैं। केजीएमयू में हो रही इस सर्जरी को अमेरिकन सोसयटी ऑफ कोलन रेक्टल सर्जन की जर्नल में भी जगह मिली है।

ब्लड ग्रुप एक होना जरूरी
कैडेवर से हाथ-पैर सहित किसी भी अंग के ट्रांसप्लांट के लिए ब्लड ग्रुप का मिलान बेहद जरूरी होता है। डॉ. अभिजीत चंद्रा ने बताया कि ट्रांसप्लांट की नई तकनीक सीखने के लिए केजीएमयू और टोक्यो यूनिवर्सिटी के बीच एमओयू साइन होगा, जिसके बाद केजीएमयू के डॉक्टर की टीम जापान जाएगी।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here